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मुस्लिम आबादी पर बर्बरता से लगाम लगा रहा है चीन, जन्मदर को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है जबरन नसबंदी

By अनुराग आनंद | Updated: June 30, 2020 18:35 IST

देश भर में जहां आईयूडी के इस्तेमाल और नसबंदी में गिरावट आई है वहीं शिनजियांग में ये तेजी से बढ़ रहे हैं।

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ठळक मुद्देचीन में जनसंख्या नियंत्रण के इन उपायों पर जोर बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिया जाता है।2015 से 2018 के बीच उइगर आबादी वाले होतन, काशगर जैसे इलाकों में जन्मदर में 60 पर्सेंट से अधिक की गिरावट आई है।

नई दिल्ली:चीन अपने देश में मुस्लिम आबादी को बढ़ने से रोकने के लिए उइगर मुस्लिम व दूसरे अल्पसंख्य समुदाय के लोगों का जबरन नसबंदी करा रहा है। इन लोगों की संख्या को कानूनी व गैरकानूनी तरह से रोकने के लिए चीन पूरी तरह से प्रयासरत है। 

एचटी रिपोर्ट की मानें तो एक तरफ देश में हान बहुसंख्यकों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर चीन मुस्लिम समुदाय की संख्या को बढ़ने से रोकने के लिए कई तरीके अपना रहा है। 

अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाएं नियमित तौर पर करवाती है गर्भावस्था जांच 

रिपोर्ट की मानें तो पहले कभी-कभार कोई महिला जबरन गर्भनिरोधक के बारे में बोलती थी, लेकिन यह चलन पहले के मुकाबले ज्यादा बड़े पैमाने पर और सुनियोजित तरीके से शुरू हो चुका है। शिनजियांग के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में पिछले चार साल से चलाए जा रहे अभियान को कुछ विशेषज्ञ जनसांख्यिकीय नरसंहार करार दे रहे हैं। 

पड़ताल के दौरान लिए गए साक्षात्कार और आंकड़े बताते हैं कि इस प्रांत में अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को नियमित तौर पर गर्भावस्था जांच कराने के लिए कहा जाता है। इतना ही नहीं उन्हें कॉपर-टी जैसे अंतर्गर्भाशयी उपकरण (आइयूडी) लगवाने के अलावा नसबंदी कराने तथा लाखों महिलाओं को गर्भपात कराने के लिए भी मजबूर किया जाता है।

शिनजियांग में ये तेजी से बढ़ रहे हैं आईयूडी का इस्तेमाल-

देश भर में जहां आईयूडी के इस्तेमाल और नसबंदी में गिरावट आई है वहीं शिनजियांग में ये तेजी से बढ़ रहे हैं। जनसंख्या नियंत्रण के इन उपायों पर जोर बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेकर दिया जाता है।

निरोध केंद्र में भेजे जाने को धमकी के साथ ही जन्म दर पर काबू करने में विफल रहने पर दी जाने वाली सजा का इसके लिए इस्तेमाल किया जाता है।

काशगर जैसे इलाकों में जन्मदर में 60 पर्सेंट से अधिक की गिरावट

बता दें कि 2015 से 2018 के बीच उइगर आबादी वाले होतन, काशगर जैसे इलाकों में जन्मदर में 60 पर्सेंट से अधिक की गिरावट आई है। जन्म नियंत्रण वाले कार्यक्रम से लोगों में आंतक का माहौल है। रिपोर्ट में एक महिला के मुताबिक बताया गया है कि उसके पति सब्जी बेचते हैं।

महिला का तीसरा बच्चा पैदा हुआ तो सरकार ने आईयूडी लगाने का आदेश दिया। दो साल बाद जनवरी 2018 में सैन्य जैसी वर्दी में 4 अधिकारी उसके घर आए और उसे तीन दिन के भीतर करीब 2 लाख रुपए जुर्माना चुकाने का आदेश दिया। ऐसा नहीं करने पर जेल में डाले जाने की बात कहकर चले गए।

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