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जस्टिस जे चेलमेश्वर ने अपने फेयरवेल में हिस्सा लेने से किया इनकार

By स्वाति सिंह | Updated: May 9, 2018 19:03 IST

जस्टिस चेलमेश्वर ने फंक्शन में आने से इसलिए मना किया क्योंकि वह वहां जाने में सहज महसूस कर रहे थे।

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नई दिल्ली, 9 मई: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस जे चेलमेश्वर ने बुधवार को बार एसोसिएशन द्वारा उनके लिए आयोजित फेयरवेल फंक्शन में जाने से इनकार कर दिया है। खबरों की मानें तो उन्होंने इस फंक्शन में आने से इसलिए मना किया क्योंकि वह वहां आने में सहज महसूस नहीं कर थे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जस्टिस चेलमेश्वर आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट से विदाई के वक्त भी समारोह में नहीं गए थे। जस्टिस चेलमेश्वर 22 जून को रिटायर हो रहे हैं। हालांकि बार एसोसिएशन के अधिकारीयों ने बताया कि न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुये उनका निमंत्रण अस्वीकार कर दिया। 

न्यायमूर्ति चेलमेश्वर के नेतृत्व में 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों की प्रेस कांफ्रेस में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर लगाए गए आरोपों के बाद से ही वे विवादों में घिरे हुये हैं। इस प्रेस कांफ्रेंस में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई , न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने भी हिस्सा लिया था। 

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने बताया कि न्यायमूर्ति चेलमेश्वर से एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उन्हें 18 मई को विदाई समारोह में आमंत्रित करने के लिये पिछले सप्ताह मुलाकात की थी। सुप्रीम कोर्ट में ग्रीष्मावकाश शुरू होने से पहले 18 मई अंतिम कार्य दिवस है। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन की कार्य समिति के सदस्यों ने बुधवार को एक बार फिर उनसे विदाई समारोह में शामिल होने का अनुरोध किया परंतु व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुये उन्होंने इसके लिये अपनी सहमति नहीं दी। 

जस्टिस चेलमेश्वर ने बार एसोसिएशन के सदस्यों को बताया कि उनका जब आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण हुआ था तो उस वक्त भी उन्होंने विदाई कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था। एसोसिएशन के सचिव विक्रांत यादव ने बताया कि न्यायमूर्ति चेलमेश्वर से आज उनके निवास पर बार के सदस्यों ने मुलाकात की लेकिन उन्होंने अपने विदाई कार्यक्रम का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया। 

जस्टिस चेलमेश्वर आज न्यायिक कार्य के लिये शीर्ष अदालत नहीं आये थे। इस वजह से वह लगातार तीसरी बार न्यायाधीशों के पारंपरिक बुधवार के दोपहर भोज में भी शामिल नहीं हो सके थे। न्यायाधीशों के प्रत्येक बुधवार को होने वाले सामूहिक भोजन कार्यक्रम में बारी बारी से न्यायाधीश अपने गृह राज्य के व्यंजन घर से लाते हैं।

(भाषा इनपुट के साथ )

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