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सुलेमानी की हत्या के बाद ड्रोन पर भारत में भी अलर्ट, नियमों को सख्त बनाने जा रही है मोदी सरकार!

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 10, 2020 08:45 IST

फिलहाल भारत में बीवीएलओएएस ड्रोनों को आसमान में उड़ान भरने की इजाजत नहीं है। यदि कोई ड्रोन नजर के सामने उड़ान भरता है तो डीजीसीए उचित प्रक्रिया के बाद उसकी अनुमति देता है। 

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ठळक मुद्देड्रोन हमला पिछले हफ्ते बगदाद में हुआ था जब ईरान के टॉप मिलिट्री कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया गया।सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से चिंता जताए जाने के बाद ड्रोन पॉलिसी पर विचार किया जा रहा है।

केंद्र सरकार ड्रोन से जुड़े नियमों को सख्त बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह प्रस्ताव हाल ही में वैश्विक स्तर पर हुए दो बड़े ड्रोन हमलों के बाद लाया गया है। पहला हादसा सितंबर में हुआ था जब सऊदी अरब के रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया गया था। इससे आधी दुनिया में क्रूड ऑयल की सप्लाई प्रभावित हुई थी। दूसरा ड्रोन हमला पिछले हफ्ते बगदाद में हुआ था जब ईरान के टॉप मिलिट्री कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया गया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दो वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से चिंता जताए जाने के बाद ड्रोन पॉलिसी पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में अपनी तरह का पहला डिजिटल स्काई प्लेफॉर्म लांच किया गया है। इसमें ड्रोन के उत्पादकों और संचालकों का लाइव रजिस्ट्रेशन होता है। इसमें ड्रोन से जुड़े नियमों को सख्त बनाने के लिए ‘National Counter Rogue Drone Guidelines’ को जोड़ा जाएगा। अधिकारी के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि ड्रोन से जुड़े खतरों को देखते हुए नियमों पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।

वैश्विक स्तर पर ड्रोन इंडस्ट्री बहुत तेजी से बढ़ रही है। सालाना 35 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए इस साल 2 लाख 75 हजार यूनिट की बिक्री हुई है। भारत में मानवरहित ऑब्जेक्ट के लिए नो परमिशन-नो टेकऑफ की नीति है। इसका मतलब भारत के आकाश में बिना नियामक अनुमति के ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता।

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि दृष्टि से ओझल होने के बाद उड़ने वाले वाणिज्यक ड्रोनों (बीवीएलओएस) के परिचालन का अध्ययन करने के लिए जनवरी में परीक्षण किये जाएंगे और फिर नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) उनपर मसौदा नियमावली जारी करेगा। मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र कुछ सप्ताह में बीवीएलओएस और अन्य ड्रोनों का पंजीकरण भी शुरू करेगा। 

उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी का भावी इस्तेमाल बहुत अधिक है और केंद्र ‘बीवीएलओएस ड्रोनों को इजाजत देने की दिशा में बढ़ रहा’ है। फिलहाल भारत में बीवीएलओएएस ड्रोनों को आसमान में उड़ान भरने की इजाजत नहीं है। यदि कोई ड्रोन नजर के सामने उड़ान भरता है तो डीजीसीए उचित प्रक्रिया के बाद उसकी अनुमति देता है।

पुरी ने कहा, ‘‘ (अध्ययन के लिए) इस महीने बाद में परीक्षण किये जाएंगे। डीजीसीए सीएआर (नागर विमान जरूरतें) का मसौदा तैयार करेगा और फीडबैक के लिए उसे संबंधित पक्षों के साथ साझा किया जाएगा।’’ उन्होंने ‘ड्रोन फेस्टिवल ऑफ इंडिया’ में कहा, ‘‘ सीएआर 2.0 से बीवीएलओएस परिचालन में क्रांति आएगी और वह वाणिज्यिक रूप लेगा।’’ 

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