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शोभना जैन का ब्लॉगः SCO की पेचीदगियों के बीच चीन से मिलते हाथ

By शोभना जैन | Updated: June 15, 2019 07:40 IST

किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में बहुचर्चित शंघाई सहयोग परिषद एससीओ की 19 वीं शिखर बैठक पर वर्तमान वैश्विक घटनाक्रम को लेकर जहां अमेरिका सहित दुनिया भर की नजरें रहीं

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किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में बहुचर्चित शंघाई सहयोग परिषद एससीओ की 19 वीं शिखर बैठक पर वर्तमान वैश्विक घटनाक्रम को लेकर जहां अमेरिका सहित दुनिया भर की नजरें रहीं, वहीं इस बैठक के इतर प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच चर्चित

द्विपक्षीय मुलाकात पर  भी अमेरिका, रूस सहित सभी बड़े देशों की नजरें लगी थीं. इन दोनों शिखर नेताओं के बीच मुलाकात के द्विपक्षीय पहलू तो अहम थे ही, इसका वैश्विक पक्ष भी बहुत महत्वपूर्ण था.

द्विपक्षीय रूप से देखें तो दोनों शिखर नेताओं के बीच यह मुलाकात काफी गर्मजोशी भरे माहौल में हुई. दोनों नेता पिछले पांच साल में 10 बार से ज्यादा मिल चुके हैं. डिप्लोमेसी में बातचीत से ज्यादा अहम ‘बॉडी लैंग्वेज’ मानी जाती है. दोनों नेता खासी गर्मजोशी से गले मिलते दिखे. इसी क्रम में मोदी ने डिप्लोमेसी की औपचारिकता से हटते हुए चीनी राष्ट्रपति को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और प्रधानमंत्नी चुने जाने पर शी के बधाई संदेश और बैठक में उन्हें पुन: बधाई देने पर आभार जताया. इस बातचीत की  सबसे खास बात यह रही कि आर्थिक रिश्तों सहित सभी क्षेत्नों में रिश्तों को मजबूत करने पर बल देते हुए दोनों ने संबंधों में तनाव का बिंदु रहे सीमा विवाद को जल्द हल करने के लिए सीमा वार्ता  में भी तेजी लाने  की इच्छा जताई ताकि सीमा विवाद का निष्पक्ष, तर्कसंगत और दोनों देशों को स्वीकार्य हल निकाला जा सके.

सीमा विवाद पर दोनों देशों के बीच पिछली वार्ता गत नवंबर में हुई थी. इक्कीसवें दौर की यह वार्ता चीन के चेंगदु शहर में हुई  थी जिसमें इस वार्ता में भारत के प्रतिनिधि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने हिस्सा लिया था. इस शिखर बैठक में भी डोभाल सीमा वार्ता में भारत के विशेष प्रतिनिधि बतौर मौजूद थे.

पीएम मोदी और शी की 2018 में वुहान में हुई मुलाकात को 73 दिन तक चले डोकलाम गतिरोध की वजह से तनावपूर्ण हुए रिश्तों में सहजता लाने का श्रेय दिया जाता है. वुहान वार्ता के बाद दोनों देशों ने सैन्य संबंधों समेत विभिन्न क्षेत्नों में रिश्तों को सुधारने के प्रयास तेज कर दिए थे. पिछले कुछ समय से खास तौर पर वुहान शिखर बैठक के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में  सहजता आई है. मसूद अजहर के मामले में चीन का रुख बदलना भी  संबंधों को सहजता की ओर ले गया.  

सीमा विवाद को हल किए जाने की दिशा में वार्ता किए जाने के साथ ही  दोनों देशों के बीच आर्थिक व्यापारिक रिश्ते द्विपक्षीय रिश्तों का मजबूत आधार बने हैं. मिलते हाथ और बढ़ते कदमों के क्रम में शी ने वुहान के बाद अब अगली अनौपचारिक शिखर बैठक में भारत आने का पीएम मोदी का न्यौता स्वीकार कर लिया है जो रिश्तों में कुछ और सहजता आने का संकेत है. ऐसे संकेत हैं कि यह बैठक इस वर्ष नवंबर में पीएम के संसदीय क्षेत्न वाराणसी में हो सकती है.

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