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Women’s Reservation Bill: नारी वंदन बिल... एक अधूरी उम्मीद

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 23, 2026 05:35 IST

Women’s Reservation Bill: पीएम ने कहा था कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के अपने सपने को साकार करने के लिए महिलाओं को इस यात्रा में शामिल करने का मौका दिया जाना चाहिए.

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ठळक मुद्देWomen’s Reservation Bill: महिलाओं के आत्मसम्मान, अधिकार, पहचान की बात थी.Women’s Reservation Bill: नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करने के लिए सब एक हो जाएं.Women’s Reservation Bill: भारत महिलाओं को बराबरी देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

किरण चोपड़ा

नारी वंदन बिल, जिसकी चर्चा दो दिन टीवी पर सुनी. एक-एक के विचार सुने, समझे. इस बिल के निगेटिव-पॉजिटिव प्वाइंट सुने, क्योंकि यह बिल करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों से जुड़ा हुआ है लेकिन दुर्भाग्यवश यह बिल पास नहीं हो पाया. इसी कारण यह आज एक अधूरी उम्मीद बनकर हमारे सामने खड़ा है. नारी वंदन बिल का उद्देश्य बहुत स्पष्ट था. महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देना, ताकि वे देश के निर्णयों में अपनी मजबूत भागीदारी निभा सकें. यह केवल एक कानून नहीं था, यह महिलाओं के आत्मसम्मान, अधिकार, पहचान की बात थी.

जब यह बिल पास नहीं हो पाया तो सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम रुक गया. देश की लाखों बेटियों को जो प्रेरणा मिलनी थी वह अधूरी रह गई और सबसे बड़ी बात, हम एक मजबूत संदेश देने से चूक गए कि भारत महिलाओं को बराबरी देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रधानमंत्री मोदी खुद बहुत उत्साहित थे और उन्होंने देश की महिला शक्ति को सम्मान दिए जाने की जरूरत पर बल दिया था. इतना ही नहीं, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने नेताओं से आग्रह किया था कि महिलाओं को प्रगति करने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करने के लिए सब एक हो जाएं.

पीएम ने कहा था कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के अपने सपने को साकार करने के लिए महिलाओं को इस यात्रा में शामिल करने का मौका दिया जाना चाहिए. नारी वंदन बिल भले ही पास नहीं हो पाया, लेकिन नारी सशक्तिकरण का यह सपना कभी असफल नहीं होगा. यह एक शुरुआत है, एक संदेश है, एक चेतावनी है, यह एक क्रांति है, केवल बिल पास करने की नहीं, सोच बदलने की,

क्योंकि अब नारी अबला नहीं, सबला है. आज हमें केवल अफसोस नहीं करना है, हमें अपने सिस्टम से भी सवाल करने हैं. हमें बिना बिल के भी महिलाओं को आगे बढ़ाना है. राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्र में आगे लेकर जाना है. हां इस बिल की चर्चा में एक बात अच्छी दिखी कि प्रियंका गांधी और अमित शाह जी ने एक-दूसरे की तारीफ की और एक सम्मानित सदस्य की तरह एक-दूसरे को सम्बोधित किया, अन्यथा पार्लियामेंट में सदस्य हदें पार कर देते हैं. यह भी अच्छी शुरुआत है.

अंत में मैं यही कहूंगी कि अगर नारी शक्ति है तो उसे सत्ता में हिस्सा क्यों नहीं. अगर नारी देवी है तो उसे निर्णय लेने का अधिकार क्यों नहीं. हम नारी की पूजा तो करते हैं लेकिन उसे बराबरी का मौका देने में  हिचकिचाते हैं. क्यों नहीं हम समझते कि जब नारी, महिला, बेटी का सम्मान होगा, उसे अधिकार मिलेगा तभी भारत महान बन सकेगा!

टॅग्स :महिला आरक्षणसंसदBJPकांग्रेसमल्लिकार्जुन खड़गेनरेंद्र मोदी
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