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‘हाथ से मैला ढोने’ पर रोक के बावजूद मनपा की हरकत?, नागपुर में मजदूर को मेनहोल में उतारकर मैनुअल सफाई, बवाल?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 22, 2026 19:29 IST

मजदूर बाल्टी की मदद से गंदगी निकाल रहा था. इस घटना ने अमल, प्रशिक्षण और जमीनी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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ठळक मुद्देखतरनाक है और मजदूरों की जान जोखिम में डालने वाला कृत्य है.घटना की कड़ी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की.सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस तरह मानव श्रम का उपयोग पूरी तरह अवैध है.

नागपुर: नागपुर महानगरपालिका क्षेत्र में मेनहोल सफाई के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है, जबकि शहर में गटर साफ करने के लिए कई वर्षों से करोड़ों रुपए की मशीनें खरीदी जाती रही हैं. शहर के शिवाजीनगर बास्केटबॉल ग्राउंड के पास मंगलवार की सुबह 8:15 बजे एक सफाई मजदूर को बिना सुरक्षा उपकरण, गैस जांच व्यवस्था, ऑक्सीजन सपोर्ट के मेनहोल में उतार दिया गया, जो अत्यंत खतरनाक है और मजदूरों की जान जोखिम में डालने वाला कृत्य है.

इस संबंध में पार्षद अभिजीत झा ने महापौर नीता ठाकरे को पत्र लिखकर घटना की कड़ी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की. मेनहोल लगभग 8 फुट गहरा था. मजदूर बाल्टी की मदद से गंदगी निकाल रहा था. इस घटना ने अमल, प्रशिक्षण और जमीनी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

महापौर के बयान ने सवाल और गहरा कर दिया है कि क्या पर्याप्त मशीनरी की कमी के कारण कर्मचारियों को खतरनाक परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. पार्षद झा ने कहा कि यह घटना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाथ से मैला उठाने पर राेक और पुनर्वास अधिनियम 2013 तथा सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस तरह मानव श्रम का उपयोग पूरी तरह अवैध है.

पत्र में यह भी मांग की गई है कि इस मामले की तत्काल विस्तृत जांच की जाए और संबंधित के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सभी जोनों में केवल मशीनों के माध्यम से ही सीवर और गटर सफाई कराने के सख्त निर्देश जारी किए जाएं.

मैनुअल स्कैवेंजिंग पर सख्त प्रतिबंध

देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला साफ करने) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने और इस कार्य में लगे लोगों के पुनर्वास के लिए लागू ‘हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’के तहत सख्त कानूनी प्रावधान किए गए हैं. इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय भी समय-समय पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी कर चुका है,

विशेष रूप से ऐसे मामलों में होने वाली मौतों पर भारी मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्ति द्वारा मानव मल को हाथ से उठाने, ढोने या निस्तारित करने पर पूर्ण प्रतिबंध है. इसमें सूखे शौचालय, सेप्टिक टैंक, सीवर और रेलवे ट्रैक जैसे सभी स्थान शामिल हैं.

दो साल ही सजा का प्रावधान

इस अधिनियम के तहत मैनुअल स्कैवेंजिंग के लिए किसी को नियुक्त करना या इस कार्य में लगाना एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना गया है. पहली बार उल्लंघन करने पर दोषी को दो साल तक की सजा या दो लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

कानून में यह भी प्रावधान है कि इस कार्य में लगे लोगों की पहचान कर उन्हें वित्तीय सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका पुनर्वास सुनिश्चित हो सके.

इसके अलावा, सीवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई भी इस अधिनियम के दायरे में आती है, यदि वह बिना आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के कराई जाती है.

सख्त कार्रवाई की जाएगी: भगत

मनपा उपायुक्त राजेश भगत ने कहा कि जवाबदार अधिकारी के खिलाफ उचित कदम उठाया जाएगा. दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी.

कारण बताओ नोटिस

मनपा प्रशासन ने प्रभारी कंजरवेंसी जमादार धनपाल भिमटे और सफाई कर्मचारी सुरेश वानखेड़े को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. महापौर नीता ठाकरे ने बुधवार को आमसभा के दौरान उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया था.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कर्मचारी और निगरानी कर्मचारियों दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और सभी संबंधितों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. यदि कर्मचारी ने खुद निर्णय लिया हो, तब भी जवाबदेही तय होगी. अगर उसे निर्देश दिए गए थे, तो जिम्मेदारी ऊपर तक जाएगी.

महापौर का स्पष्टीकरण

महापौर नीता ठाकरे ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए माना कि कई मेनहोल मशीनों से साफ नहीं किए जा सकते, जिससे शहर की सीवर व्यवस्था में खामियां उजागर हुई हैं. मानव हस्तक्षेप कम करने के लिए उन्नत मशीनें, जैसे रोबोटिक और स्पाइडर उपकरण लगाए जाएंगे. मामले में उचित कार्रवाई होगी.

मशीनों की कमी का असर

इस घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी सदस्यों में रोष फैल गया है। जिन्होंने इसे मैनुअल स्कैवेंजिंग पर प्रतिबंध लगाने वाले कानूनों का खुला उल्लंघन बताया. पुरानी सीवर संरचना, बार-बार होने वाले जाम और कामकाजी मशीनों की कमी के कारण कर्मचारियों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है. एक सिविक इंजीनियर ने कहा कि जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, ऐसे हादसे होते रहेंगे.

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