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कौन हैं ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा?, अखिल भारतीय पंचायत परिषद के राष्ट्रीय सचिव बने

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 22, 2026 18:13 IST

छोटे से गांव से निकलकर भारत के मानचेस्टर कहे जाने वाले अहमदाबाद शहर में अहम पहचान बनाने वाले ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा को अखिल भारतीय पंचायत परिषद ने बनाया राष्ट्रीय सचिव।

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ठळक मुद्देआर.के. सिन्हा के आदेश पर राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ अशोक चौहान ने की।पावन दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से यहां स्नान करने और पुण्य लाभ प्राप्त करने आते हैं।

आजमगढ़ः आजमगढ़ जिले के मुहम्मदपुर ब्लॉक और निजामाबाद तहशील निजामाबाद के अंतर्गत आने वाले अवंतिकापुरी गावं के निवासी ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा को अखिल भारती पंचायत परिषद का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है | उनकी नियुक्ति दिल्ली के मयूर विहार में स्थित अखिल भारतीय पंचायत परिषद के केंद्रीय कार्यालय “पंचायत धाम” में पूर्व केंद्रीय मंत्री सह राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय व पूर्व राज्य सभा सांसद, भारतीय जनता पार्टी  के संस्थापक सदस्य सह राष्ट्रीय संरक्षक आर.के. सिन्हा के आदेश पर राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ अशोक चौहान ने की।

आपको बता दें कि दयाननंद विश्वकर्मा सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक रह चुके हैं साथ ही इलाके में इनकी पहचान  एक नाम चीन लेखक के रूप में हैं। आजमगढ़ के अवंतिकापुरी में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भक्तों का भारी मेला उमड़ता है। इस पावन दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से यहां स्नान करने और पुण्य लाभ प्राप्त करने आते हैं।

अवंतिकापुरी का यज्ञ  कुंड विश्ववापी पहचान रखता है | इसका हवन कुंड आज भी वहां है यह  84 बीघे में फैला हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान राजा जनमेजय की यज्ञस्थली है। उन्होंने यहां सर्प यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें सभी सर्पों का नाश हो गया था, केवल एक सर्प भगवान शिव के पास बचा था।

सर्प यज्ञ के बाद से ही यह पावन कुटिया तैयार हुई, जिसे राजा परीक्षित की कुटिया भी कहा जाता है। तभी से यहां कार्तिक पूर्णिमा का मेला लगता है और दूर-दूर से बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। अवंतिकापुरी का वर्णन महाभारत काल में भी मिलता है, जो इसके विशेष पौराणिक महत्व को दर्शाता है।इस तपोस्थली के बारे में यह भी कहा जाता है कि पहले यहां घना जंगल था।

संदीपन ऋषि का आश्रम था, जहां भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने शिक्षा ग्रहण की थी। अवंतिकापुरी धाम के बारे में एक और मान्यता है कि सर्प यज्ञ के बाद से आज तक यहां सर्पदंश से किसी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है। मंदिर के आसपास दिखने वाले सर्प भी केंचुए की तरह रेंगते हुए नजर आते हैं और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

पिछले 12  सालों  से , ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा ने अपने प्रतिभा के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर एक अहम् पहचान बनाई है। अग्रणी कार्यों ने प्रेस की वकालत और जमीनी स्तर की सामाजिक सेवा को अनूठा रूप से जोड़ा है , जिससे उन्हें राष्ट्रव्यापी पहचान और सम्मान प्राप्त हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना, उन्हें गरीबी से बाहर निकलने और अवसरों की ओर बढ़ने का मार्ग प्रदान करना।

गरीब, विधवा और तलाकशुदा व्यक्तियों के लिए सामूहिक विवाह आयोजित करना , जिससे कई लोगों को गरिमापूर्ण और बिना किसी वित्तीय बोझ के नए सिरे से जीवन शुरू करने में मदद मिलती है। विश्वकर्मा के प्रयास केवल वकालत और मान्यता तक ही सीमित नहीं हैं। परिषद ने भारत के कई राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

समान विचारधारा वाले पेशेवरों और स्वयंसेवकों का एक मजबूत जमीनी नेटवर्क बनाया है। परिषद की आगामी प्रमुख परियोजनाओं में से एक कैंसर अस्पताल की स्थापना है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सेवा करना है - यह उनकी दूरदर्शी सोच और गहरी करुणा का एक और प्रमाण है।

इनकी नियुक्ति पर अखिल भारतीय पंचायत परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ अशोक चौहान कहा कि ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा जी  एक छोटे से पंचायत से पढ़-लिख कर अहमदाबाद में अपना नाम स्थापित किया है साथ ही एन डी ए गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के गुजरात प्रदेश के अध्यक्ष हैं | 3 बार विधान सभा का चुनाव लड़कर हार का सामना किये पर जनसेवा और जमीन से इनका लगाव बरकरार है।

अपने गावं के संस्कार आज में इनके दिल में हैं ये पंचायती राज में में कार्य करने का जो अनुभव रखते हैं हम ऐसा उम्मीद करते हैं कि उससे अखिलe भारतीय पंचायत परिषद के अभियानों में काफी मदद मिलेगी | इनकी नियुक्ति पर अखिल भारतीय पंचायत परिषद के मीडिया सलाहकार बद्री नाथ ने बधाई देते हुए कहा कि, जब मीडिया लगातार जांच के दायरे में है और सामाजिक असमानताएं गंभीर बनी हुई हैं।

ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा का योगदान नैतिक नेतृत्व, समावेशी विकास और अथक जनसेवा का एक आदर्श उदाहरण है । उनका आदर्श न केवल अनुकरणीय है बल्कि हमारे वर्तमान समय के लिए अत्यंत आवश्यक भी है। इस दौरान महामंत्री ध्यान पाल जादौन, रामवृक्ष प्रसाद, नितिन अग्रवाल, मोहन राठौर, सुमित आर्या, रमाकांत शुक्ला, दिवाकर दूबे  तथा देश के कोने कोने से आये पंचायात परिषद के पदाधिकारीगण ने ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा को इस अहम् जिम्मेदारी के लिए  को  ढेरो शुभकामनाएं एवं बधाइयाँ दी।

 

 

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