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अलीगढ़ का शेखा झील पक्षी अभयारण्य भारत का 99वां रामसर स्थल बना 

By राजेंद्र कुमार | Updated: April 22, 2026 17:54 IST

2016 में सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शेखा झील को पक्षी विहार (बर्ड सेंचुरी) घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.

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ठळक मुद्देअखिलेश यादव के 2016 में भेजे गए प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने दी अपनी मंजूरी.सीएम योगी बोले केंद्र सरकार के फैसले से पक्षियों के प्राकृतिक आवास को मिली सुरक्षा.शेखा झील में साइबेरिया, यूरोप और मध्य एशिया से हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं.

लखनऊः उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य को रामसर स्थल घोषित किया गया है. इस फैसले के चलते यह उत्तर प्रदेश का 12वां और भारत का 99वां रामसर स्थल बन गया. और अब भारत ऐतिहासिक 100 रामसर स्थलों के करीब पहुंच गया है. 2016 में सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शेखा झील को पक्षी विहार (बर्ड सेंचुरी) घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. दस वर्ष बाद केंद्र सरकार ने यूपी सरकार के इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी.

सीएम योगी का कथन

केंद्र सरकार के इस फैसले से यह झील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के रूप में चर्चित होगी और वैश्विक जैव विविधता तथा जल व जलवायु सुरक्षा को बढ़ावा देगी. अलीगढ़ की शेखा झील को रामसर साइट घोषित किए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे यूपी के पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया है.

उन्होंने कहा है कि शेखा झील का अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर आना प्रदेश की जैव विविधता को संरक्षित करने के हमारे प्रयासों की वैश्विक स्वीकृति है. अब अलीगढ़ में जैव विविधता का संरक्षण होगा और यहां ने केवल प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत करेगा.

सीएम योगी को विश्वास है कि रामसर साइट का दर्जा मिलने से अलीगढ़ में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और जिले की एक नई पहचान बनेगी. जबकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर यह लिखा है कि शेखा झील मध्य एशियाई फ्लाईवे पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.

यह सर्दियों में प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास है. इनमें बार-हेडेड गूज, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न बत्तखें शामिल हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के पारिस्थितिकी तंत्र बहाली मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं. भारत आर्द्रभूमि और पक्षियों सहित जानवरों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. इस प्रतिबद्धता को वैश्विक समुदाय से सराहना मिली है.

बताया जा रहा है कि अलीगढ़ के तमाम विख्यात पर्यावरणविदों और पक्षी प्रेमी इसे संरक्षित करने की मांग लंबे समय से करते रहे हैं. स्थानीय स्तर पर पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा और पूर्व पर्यटन सलाहकार ख्वाजा हलीम जैसे लोगों ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और पक्षी विहार का दर्जा दिलाने के लिए दशकों तक प्रयास किए.

इनके प्रयासों से ही अखिलेश यादव सरकार में इसे औपचारिक रूप से पक्षी विहार घोषित करने का प्रस्ताव फरवरी 2016 में आया. तो तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने इसे बर्ड सेंचुरी घोषित करने पर अपनी सहमति दी. यही नहीं उन्होंने करीब 3.04 करोड़  रुपए की धनराशि से यहाँ बुनियादी ढांचा जैसे चारदीवारी, मुख्य द्वार, कार्यालय और पार्किंग का निर्माण कराने के लिए भी स्वीकृत की थी. 

शेखा झील का इतिहास

अलीगढ़ में स्थित शेखा झील कोई प्राकृतिक झील नहीं थी, बल्कि 1852 में जब अंग्रेजों ने अपर गंग नहर निकाली, तो उसके रिसाव और जलभराव से यह जल निकाय ( वाटर बॉडी) अस्तित्व में आयी थी. तब से यह धीरे-धीरे प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा केंद्र बन गया. ताजे पानी की झील है करीब  70-125 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है.

झील के चारों ओर का शांत वातावरण और जलीय वनस्पति इसे पक्षियों के प्रजनन और भोजन के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है. यह झील मुख्य रूप से शीतकालीन प्रवास के लिए प्रसिद्ध है. सर्दियों के दौरान यहाँ साइबेरिया, यूरोप और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके प्रवासी पक्षी आते हैं. यहाँ पक्षियों की लगभग 170 से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं.

 इनमें प्रमुख रूप से 'गीज़', 'डक्स', 'पिंटेल', 'कॉमन टील' और 'शॉवलर' जैसी प्रजातियां शामिल हैं. अलीगढ़ शहर से लगभग 17-20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के कारण यह झील यह फोटोग्राफी और बर्ड वाचिंग के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन 'वीकेंड गेटवे' है. 

टॅग्स :अलीगढ़उत्तर प्रदेशयोगी आदित्यनाथ
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