मथुराः मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला को देवी वाग्देवी (मां सरस्वती के रूप में पूजनीय) के मंदिर के रूप में मान्यता दी। फैसले के कुछ घंटों बाद ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में परिसर में एकत्रित हो गए, प्रार्थना की, हनुमान चालीसा का पाठ किया और मिठाई बांटी। कई लोगों ने इसे दशकों लंबे कानूनी और धार्मिक संघर्ष में एक ऐतिहासिक क्षण बताया।
भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर कवि कुमार विश्वास ने कहा कि बहुत ही सौभाग्य का पर्व है। महाराज भोज जो भारतीय संस्कृति, साहित्य और भारतीय कला के प्रतिपादक माने जाते थे, जिनके माध्यम से भारतीय मनीषा पूरे विश्व में गूंजी, जिस भगवती का उन्हें साक्षात साक्षात्कार हुआ, वे सरस्वती जहां भोजशाला में विराजमान थीं, आज भारतीय न्याय संहिता से हिसाब से निर्णय प्राप्त हुआ है।
मन में बड़ी टीस रहती थी कि कभी वाग्देवी वहां विराजमान हों और हम उनके दर्शन उस भाव से कर सकें और आज ये संभव हो पाया है। AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर उन्होंने कहा कि मैं उनसे आशा करता हूं कि वे भारतीय सांस्कृतिक इतिहास भी पढ़ें और अपने कुल वंश का भी इतिहास पढ़ें जिसमें चार पीढ़ी बाद ही उन्हें स्वयं के इसी परंपरा में खड़े रहने का बोध प्राप्त होगा।
यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। धार की कई बार यात्रा करना और उस पवित्र स्थल पर मत्था टेकना मेरा व्यक्तिगत सौभाग्य रहा है। आज मेरा हृदय अपार आनंद से भरा हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर कहा कि यदि उन्होंने जनता से अपील की है, तो उस पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने लोगों से पेट्रोल की खपत कम करने और सोने की खरीद पर रोक लगाने का आग्रह किया है।
बेशक, सत्ताधारी दल के कार्यों में खामियों को उजागर करना और उनके खिलाफ आवाज उठाना विपक्ष का अधिकार है; उन्हें अपना कर्तव्य निभाते रहने दें। श्रद्धालु लड्डू और मिठाई बांटते हुए अपने धार्मिक अधिकारों की बहाली पर खुशी व्यक्त करते दिखे। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि इस फैसले ने उन्हें उम्मीद दी है कि अब इस स्थल पर नियमित पूजा-अर्चना सप्ताह भर जारी रहेगी।