Lok Sabha Poll 2029: बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक विजय केवल 75 वर्ष का सपना साकार होना नहीं है. इसमें उत्तर पश्चिम से पूर्वी भारत में अश्वमेध के घोड़ों से जुड़े रथ पर लगी विजय पताका में 2029 के लोकसभा चुनाव में दुगुनी सफलताओं की भाजपा की उम्मीद बंधी है. 2029 की लोकसभा राजनीति का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2024 में अपने दम पर बहुमत से नीचे रह गई भारतीय जनता पार्टी 2029 में फिर से 272 के जादुई आंकड़े से बहुत आगे बढ़ सकती है? 2024 में भाजपा को देशभर में 240 सीटें मिलीं.
सरकार बनी, लेकिन सहयोगी दलों के सहारे मजबूत बनी हुई है. अगर 2029 की राजनीति में किसी एक राज्य को सबसे निर्णायक माना जाए, तो वह पश्चिम बंगाल है. 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को यहां 42 में से 12 सीटें मिली थीं. लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया.
विधानसभा में भाजपा की बड़ी सफलता ने पहली बार यह संकेत दिया कि बंगाल अब केवल प्रतीकात्मक विस्तार का क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सत्ता समीकरण बदलने वाला राज्य बन सकता है. 2026 के विधानसभा रुझान यह बताते हैं कि भाजपा ने राज्य के ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में संगठनात्मक गहराई बढ़ाई है.
यदि यह रुझान कायम रहता है तो 2029 में बंगाल में भाजपा 12 सीटों से बढ़कर 24 से 30 सीटों तक पहुंच सकती है. यह अनुमान केवल अंकगणित नहीं है. बंगाल की राजनीति में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सीटों की संख्या 42 है. किसी एक राज्य से 10-15 अतिरिक्त सीटें मिलना राष्ट्रीय बहुमत की दिशा बदल सकता है.
यही कारण है कि 2029 के संदर्भ में बंगाल को भाजपा का सबसे बड़ा विस्तार-क्षेत्र माना जा रहा है. 2029 की दिशा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भाजपा अब केवल अपने पारंपरिक गढ़ों के सहारे नहीं चल रही. उसकी रणनीति का नया केंद्र पूर्वी भारत बनता दिख रहा है. पश्चिम बंगाल में उभार, ओडिशा में मजबूती और असम में स्थिर पकड़ इस व्यापक बदलाव का संकेत है.
राष्ट्रीय राजनीति में यह परिवर्तन साधारण नहीं है. लंबे समय तक भाजपा की शक्ति मुख्यतः हिंदी पट्टी और पश्चिम भारत रही. यदि बंगाल में उसे निर्णायक बढ़त मिलती है तो भारतीय राजनीति का भौगोलिक संतुलन बदल सकता है. 2029 की लड़ाई सिर्फ सत्ता बचाने की नहीं होगी. वह इस सवाल की लड़ाई होगी कि क्या भाजपा फिर से भारतीय राजनीति में अकेले बहुमत की पार्टी बन सकती है.
भाजपा के पास गुजरात में 26 में से 25 , मध्यप्रदेश में सभी 29 सीट, छत्तीसगढ़ में 11 में से 10, ओडिशा में 21 में से 20, दिल्ली में सभी 7 लोकसभा सीट हैं. अब इन्हें बनाए रखने का हर संभव प्रयास मोदी, शाह के निर्देशों से होगा. राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक में पार्टी की पहले से दुगुनी सीट लाने की कोशिश रहेगी.
झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, आंध्र, केरल, कर्नाटक, गोवा, त्रिपुरा, केरल, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, अरुणाचल, मिजोरम जैसे राज्यों में पहले से मिली सीटें बढ़ाने के लिए काम चल रहा है. मतलब 2024 की तरह दावा भले ही न किया जाए, लेकिन 2029 में सही अर्थों में 400 पार का संकल्प भाजपा के हर नेता द्वारा कार्यकर्ताओं से बंद कमरों में करवाने के तेवर बंगाल विजय से बनते दिख रहे हैं.