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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: श्रीलंका से सबक लेने की जरूरत

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: May 12, 2022 15:35 IST

श्रीलंका के विपक्षी नेताओं की यह मांग ऊपरी तौर पर स्वाभाविक लगती है लेकिन समझ नहीं आता कि नए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की नियुक्ति क्या चुटकी बजाते ही हो जाएगी? उनका चुनाव होते-होते श्रीलंका की हालत और बदतर हो जाएगी. नए राष्ट्रपति और नई सरकार खाली हुए राजकोष को तुरंत कैसे भर सकेगी?

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ठळक मुद्देराष्ट्रपति गोटबाया ने सारे विपक्षी दलों से निवेदन किया कि वे आएं और मिलकर नई संयुक्त सरकार बनाएं लेकिन विपक्ष ने इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया.लोगों के दिलों में यह प्रभाव जमाया गया कि राजपक्षे परिवार को कोई पद-लिप्सा नहीं है. 

श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ गया. उनके छोटे भाई गोटबाया राजपक्षे अभी भी श्रीलंका के राष्ट्रपति पद पर डटे हुए हैं. श्रीलंका में आम जनता के बीच इतना भयंकर असंतोष फैल गया है कि इस राजपक्षे सरकार को कई बार कर्फ्यू लगाना पड़ा है. इस राजपक्षे सरकार के मंत्रिमंडल में राजपक्षे-परिवार के लगभग आधा दर्जन सदस्य कुर्सी पर जमे हुए थे. जब आम जनता का गुस्सा बेकाबू हो गया तो मंत्रिमंडल को भंग कर दिया गया. लोगों के दिलों में यह प्रभाव जमाया गया कि राजपक्षे परिवार को कोई पद-लिप्सा नहीं है. 

राष्ट्रपति गोटबाया ने सारे विपक्षी दलों से निवेदन किया कि वे आएं और मिलकर नई संयुक्त सरकार बनाएं लेकिन विपक्ष ने इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया. अभी भी राष्ट्रपति का कहना है कि विपक्ष अपना प्रधानमंत्री खुद चुन ले और श्रीलंका को इस भयंकर संकट से बचाने के लिए मिली-जुली सरकार बनाए लेकिन विपक्ष के नेता इस प्रस्ताव पर अमल के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं. वे सारे श्रीलंकाइयों से एक ही नारा लगवा रहे हैं- ‘गोटा गो’ यानी राष्ट्रपति भी इस्तीफा दें. 

श्रीलंका के विपक्षी नेताओं की यह मांग ऊपरी तौर पर स्वाभाविक लगती है लेकिन समझ नहीं आता कि नए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की नियुक्ति क्या चुटकी बजाते ही हो जाएगी? उनका चुनाव होते-होते श्रीलंका की हालत और बदतर हो जाएगी. नए राष्ट्रपति और नई सरकार खाली हुए राजकोष को तुरंत कैसे भर सकेगी? श्रीलंका का विपक्ष भी एकजुट नहीं है. 

स्पष्ट बहुमत के अभाव में वह सरकार कैसे बनाएगा? यदि श्रीलंका का विपक्ष देशभक्त है तो उसका पहला लक्ष्य यह होना चाहिए कि वह महंगाई, बेरोजगारी और अराजकता पर काबू पाए. गोटबाया सरकार जैसी भी है, फिलहाल उसके साथ सहयोग कर देश को चौपट होने से बचाए. अभी तो लोग दंगों और हमलों से मर रहे हैं लेकिन जब वे भुखमरी से मरेंगे तो वे किसी भी नेता को नहीं बख्शेंगे, वह चाहे पक्ष का हो या विपक्ष का.

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