लाइव न्यूज़ :

समन्वय की राजनीति की जागती उम्मीद

By विश्वनाथ सचदेव | Updated: May 15, 2026 07:31 IST

उन्होंने सही कहा कि अब वह सारे राज्य के, सभी बंगाल निवासियों के मुख्यमंत्री हैं. इसका सीधा-सा अर्थ यह है कि अब उनके सब काम बंगाल के सब नागरिकों के काम होंगे.

Open in App

देश में पांच राज्यों के चुनाव संपन्न हो गए. सरकारें भी बन ही गईं. नए मुख्यमंत्रियों ने अपनी प्राथमिकताएं भी घोषित कर दी हैं.  इन घोषणाओं पर ध्यान जाना स्वाभाविक है, और जरूरी भी. यूं तो चुनाव कहीं भी हों, महत्वपूर्ण होते हैं, पर इन चुनावों में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दो ऐसे राज्य हैं जहां के परिणाम ने चुनावी पंडितों को भी चौंका दिया है.   दोनों राज्यों के नए मुख्यमंत्रियों ने जीत के बाद अपने पहले वक्तव्य में जो कहा वह ध्यान आकर्षित करता है.

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री ने अपने मतदाताओं से ‘कुछ समय’ मांगते हुए जिस पहले आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं,  वह राज्य की जनता को दौ सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने का है. वैसे यह उनके चुनावी वादों का हिस्सा था, फिर भी जिस तेजी से यह घोषणा की गई है उससे यह स्पष्ट है कि वे अपने मतदाताओं का विश्वास बनाए रखने को प्राथमिकता देने वाले नेता हैं. आज सभी राजनीतिक दल और राजनेता रेवड़ियां बांटने वाली इस राजनीति को अपना चुके हैं. देखा जाए तो यह एक तरह से वोट के बदले रिश्वत दिया जाना ही है, पर राजनीति की यह ‘रेवड़ी संस्कृति’ आज हमारी राजनीति का एक स्वीकृत हिस्सा बन चुकी है.  

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से किए गए वादे को पूरा करने का एक उदाहरण तो प्रस्तुत किया है, पर यह ‘मुफ्तिया राजनीति’ राजनीतिक भ्रष्टाचार का भी एक उदाहरण है. लोकप्रियता बटोरने का यह तरीका वस्तुतः बहुत महंगा सौदा है. ऐसे सौदे में घाटे में देश रहता है.

और देश को घाटा तब भी होता है जब धर्म के नाम पर वोट दिए और लिए जाते हैं. इस संदर्भ में एक अच्छी बात बंगाल के नए मुख्यमंत्री ने कही है. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जब वह एक कार्यक्रम में भाग लेने गए तो वहां उपस्थित लोगों ने ‘जय श्रीराम’ के नारों के साथ उनका स्वागत-अभिनंदन किया. यह जानना एक सुखद आश्चर्य ही है कि मुख्यमंत्री ने ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने वाले अपने प्रशंसकों को यह नारा लगाने से रोक दिया. उन्होंने कहा, अब वह सब के मुख्यमंत्री हैं.

जय श्रीराम का नारा लगाना कतई गलत नहीं है,  हजारों साल से हिंदू ‘जय श्रीराम’, ‘जय सियाराम’ कह कर एक-दूसरे का अभिवादन करते रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ दशकों में यह अभिवादन जैसे एक युद्ध-घोष बन गया. जिन्होंने रामानंद सागर का सीरियल ‘रामायण’ देखा है, उन्हें भगवान राम की भूमिका निभाने वाले पात्र की मोहक मुस्कान भी याद होगी. यह मुस्कान राम की पहचान है- अभय का आश्वासन देती हुई मुस्कान! पता नहीं कैसे सबको अभय का संदेश देने वाली मुस्कान एक युद्ध घोष के क्रोध में बदल गई! अब, जबकि शुभेंदु राज्य के मुख्यमंत्री बन गए हैं,  यह जानकर अच्छा लगा कि उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वह यह जयघोष न लगाएं.  उन्होंने सही कहा कि अब वह सारे राज्य के, सभी बंगाल निवासियों के मुख्यमंत्री हैं. इसका सीधा-सा अर्थ यह है कि अब उनके सब काम बंगाल के सब नागरिकों के काम होंगे.

यही होना चाहिए. मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री सारे देशवासियों के लिए होते हैं. उनकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो, सारे प्रदेश या देश का हित ही उनका हित होता है. तमिलनाडु और बंगाल के नए मुख्यमंत्री ने जिस तरह शुरुआत की है वह आश्वस्त करने वाली है. उम्मीद की जानी चाहिए कि इन दोनों राज्यों में समन्वय की राजनीति दिखेगी.

टॅग्स :विधानसभा चुनावतमिलनाडु विधानसभा चुनावअसम विधानसभा चुनाव
Open in App

संबंधित खबरें

भारततमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार की पूरी जिम्मेदारी मेरी, द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने कहा- समिति का गठन, 20 दिन में रिपोर्ट दीजिए?

भारतधनबल और बाहुबल चुनाव जीतनाः सरकारों पर संगठन की सख्त नकेल जरूरी

भारतजब अपने दुश्मन बनते हैं तो दुश्मन से भी अधिक भयानक होते हैं!

भारततमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को विधानसभा के कार्यवाहक अध्यक्ष एमवी करुपैया ने पद की शपथ दिलाई

भारतTamil Nadu government formation: आखिर विजय की जय संवैधानिक रास्ते से ही होगी

भारत अधिक खबरें

भारतसरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठते प्रश्न

भारतशिक्षा और परीक्षा: साख बहाल करने का सवाल

भारतSummer Special Trains 2026: छुट्टियों में घर जाने की टेंशन खत्म, बिहार के लिए रेलवे का बड़ा तोहफा, शुरू की 3 नई स्पेशल ट्रेनें, यहाँ चेक करें पूरी लिस्ट

भारतखराब मौसम, तूफान, बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने के कारण 26 जिलों से 111 लोगों की मौत, 72 घायल, 170 पशु मरे और 227 घरों को नुकसान

भारतआखिर क्यों सीएम योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव और विष्णु देव साय से मिले अमित शाह, यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ में क्या हो सकता?, इन राज्य में 2027-28 में चुनाव