शिक्षा और परीक्षा: साख बहाल करने का सवाल
By गिरीश्वर मिश्र | Updated: May 15, 2026 05:21 IST2026-05-15T05:21:26+5:302026-05-15T05:21:26+5:30
NEET exam cancelled 2026: धनलोलुप आपराधिक तत्वों की करतूत ने युवा वर्ग को बहुत निराश किया. वे अब कुंठा और अनिश्चय के दौर में पहुंच रहे हैं.

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NEET exam cancelled 2026: मेडिकल प्रवेश परीक्षा यानी ‘नीट’ में पेपर लीक की ताजा घटना ने एक बार फिर पूरे देश को, खास तौर पर युवा और किशोर वर्ग को झकझोर दिया है. देश भर के लाखों परीक्षार्थियों के वर्षों के परिश्रम और आशाओं-आकांक्षाओं पर पानी फिर गया. बड़े परिश्रम और अच्छे-खासे पैसे लगा कर कोचिंग आदि से तैयारी कर परीक्षा की दहलीज पर वे पहुंचे थे, लेकिन कुछ थोड़े से धनलोलुप आपराधिक तत्वों की करतूत ने युवा वर्ग को बहुत निराश किया. वे अब कुंठा और अनिश्चय के दौर में पहुंच रहे हैं.
पर यह घटना किसी भी तरह आकस्मिक तो नहीं ही कही जा सकती क्योंकि पिछली परीक्षा में हुई नीट पेपर लीक की सीबीआई जांच अभी खत्म नहीं हुई है. वह कब पूरी होगी और उसका क्या हश्र होगा, किसी को नहीं मालूम. अर्थात् यह तो नहीं कहा जा सकता कि सरकारी तंत्र को इस तरह की संभावना का कोई अंदेशा नहीं रहा होगा.
तब भी परीक्षा की एजेंसी सजग नहीं हुई और जरूरी एहतियात बरतने में कोताही हुई, जिसका परिणाम सामने है. गौरतलब है कि प्रवेश-परीक्षा की पहले से चली आ रही पुरानी व्यवस्था को सुधारने के लिए एनडीए की सरकार द्वारा वर्ष 2017 में राष्ट्रीय स्तर की एक स्वायत्त व्यवस्था ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (एनटीए) को स्थापित करने का निर्णय लिया गया.
परीक्षाओं के प्रकार और परीक्षार्थियों की निरंतर बढ़ती संख्या के चलते यह सुधार बहुत जरूरी था. एनटीए का उद्देश्य रखा गया था कि उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली एक मानक व्यवस्था को भारत में प्रतिष्ठित किया जाए. विकसित भारत के लिए योग्य मानव संसाधन तैयार करने में इस एजेंसी की बड़ी भूमिका के मद्देनजर एनटीए के संचालन के लिए एक आईएएस स्तर के डीजी, अध्यक्ष, डायरेक्टर, ज्वाइंट डायरेक्टर आदि के साथ एक उच्चस्तरीय प्रबंधकीय अमला तैयार हुआ.
सारी व्यवस्था की देखरेख के लिए एनटीए की अपनी प्रबंध समिति का भी प्रावधान किया गया जिसे पूरी तरह से अधिकारसंपन्न बनाया गया. सरकार और आम जनता, सबको यह आशा थी कि प्रोफेशनल दृष्टि से काम करने वाली एनटीए परीक्षा की व्यवस्था में जमीनी परिवर्तन ला सकेगी.
यानी अखिल भारतीय स्वरूप वाली यह संस्था प्रवेश परीक्षाओं का काम राष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष, विश्वसनीय, त्वरित या समय पर और स्तरीय ढंग से संपादित करेगी. लेकिन अब जिस तरह से परीक्षा के संचालन में लगातार चूक हो रही है उससे कई सवाल पैदा हो रहे हैं. परीक्षा की शुचिता और मानकों को बनाए रखने की जिम्मेदारी से एनटीए किसी भी तरह नहीं मुकर सकता.
पेपर लीक की बार-बार की घटनाओं के चलते एनटीए का यह प्रयोग और उसकी कार्य प्रणाली अब संदेह के घेरे में आ रहे हैं. परीक्षा के पेपर लीक की घटनाएं कई तरह की परीक्षाओं में पिछले दशकों में पहले भी सामने आ चुकी हैं. यदि इस घटना को अपराध के रूप में देखें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि इनसे जुड़े अपराधियों पर मामलों में कानूनी झमेले ऐसे चलते हैं कि समय पर कोई ठोस कार्रवाई ही नहीं हो पाती.
इस तरह के ज्यादातर मामलों में सबूत के अभाव में अपराधियों को दंडित करना लगभग असंभव होता रहा है. शैक्षिक परिसर की साख घट रही है. इंटर, बीए/ बीएससी और एमए/ एमएससी की औपचारिक पढ़ाई और उसकी डिग्री पर अब किसी का भरोसा नहीं रहा . अगली कक्षा में स्वाभाविक प्रवेश संभव नहीं होता है.
उसके लिए भी परीक्षा देनी होती है. इंटर के बाद स्नातक परीक्षा में प्रवेश के लिए एनटीए की राष्ट्रीय परीक्षा के नंबर निर्णायक होते हैं. पढ़ाई और ज्ञान की जगह परीक्षा में पाए जाने वाले अंक ही काम आते हैं. लगातार बढ़ती बेरोजगारी के वर्तमान दौर में अवसरों की कमी के चलते प्रतिस्पर्धी छात्रों पर सफलता पाने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.
परीक्षाओं में सफलता पाना कठिन हो रहा है और हमारी शिक्षा परीक्षणमुखी होती जा रही है, इतनी कि ज्ञानार्जन हाशिये पर जा रहा है. सुभीते के लिए बहुउत्तरीय प्रश्न (एमसीक्यू) के सहारे यांत्रिक परीक्षा का बोलबाला हो रहा है. इसका दुखद पक्ष यह भी है कि यह पद्धति सोच-विचार की जगह रटंत शिक्षा को और मजबूत कर रही है.
इसके चलते उत्सुकता और खोजबीन की जगह दुहराव और गैरसर्जनात्मक रुचि को प्रश्रय मिल रहा है. शिक्षा और परीक्षा दोनों की साख जोखिम में है. नई शिक्षा नीति की आंख इस पर है, पर जरूरी परिवर्तन दूर की कौड़ी लगती है. युवा वर्ग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जरूरी सुधार हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए.