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पशु को मारने से पहले स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र अनिवार्य?, बंगाल सरकार ने कहा- खुले-सार्वजनिक स्थान पर पशु वध पर सख्ती से रोक?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 14, 2026 17:17 IST

पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के अनुपालन में हैं और कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा 2018 और 2022 में पारित आदेशों की एक शृंखला के आलोक में जारी किए गए हैं।

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ठळक मुद्देसंबंध में यह प्रमाण पत्र प्राप्त न कर लिया हो कि जानवर वध के लिए उपयुक्त है।किसी भी उल्लंघन की सूचना मिलने पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।ऐसे सभी अपराधों को संज्ञेय अपराध माना जाएगा।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने अधिकारियों को आदेश जारी किया है कि वे बिना ‘स्वस्थ प्रमाण पत्र’ वाले पशुओं के वध पर रोक लगाए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करे। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि खुले और सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं के वध पर ‘सख्ती से रोक’ रहेगी। सरकार ने कहा कि ये दिशानिर्देश पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के अनुपालन में हैं और कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा 2018 और 2022 में पारित आदेशों की एक शृंखला के आलोक में जारी किए गए हैं।

राज्य की भाजपा सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया, ‘‘ कोई भी व्यक्ति किसी भी जानवर का वध नहीं करेगा, अर्थात् (बैल, गाय, बछड़े, नर और मादा भैंस, भैंस के बच्चे और बधिया किए गए बैल) जब तक कि उसने इस संबंध में यह प्रमाण पत्र प्राप्त न कर लिया हो कि जानवर वध के लिए उपयुक्त है।’’

दिशा-निर्देशों के अनुसार, नगरपालिका अध्यक्ष या संबंधित पंचायत के सभापति को सरकारी पशुचिकित्सक के साथ संयुक्त रूप से ऐसा प्रमाण पत्र जारी करना होगा। आदेश में कहा गया कि संबंधित अधिकारी अनुमति देने से पहले पशु की आयु और शारीरिक स्थिति का आकलन करेंगे। यदि प्रमाण पत्र देने से इनकार किया जाता है,

तो पीड़ित पक्ष इनकार की सूचना मिलने के 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के समक्ष अपील कर सकता है। आदेश के मुताबिक केवल 14 वर्ष से अधिक आयु के जानवर या चोट, विकृति, उम्र या लाइलाज बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम जानवरों का ही वध किया जा सकेगा। इस संबंध में जारी अधिसूचना में कहा गया, ‘‘जिस जानवर के संबंध में प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

उसका वध केवल नगरपालिका के बूचड़खाने या स्थानीय प्रशासन द्वारा नामित किसी अन्य बूचड़खाने में ही किया जाएगा।’’ इसमें चेतावनी दी गई है कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को छह महीने तक की कैद या 1,000 रुपये का जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे सभी अपराधों को संज्ञेय अपराध माना जाएगा।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस निर्देश का उद्देश्य मौजूदा कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना है। कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘इस निर्देश का उद्देश्य कानून का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना और अनधिकृत या अमानवीय प्रथाओं को रोकना है। किसी भी उल्लंघन की सूचना मिलने पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।’’

टॅग्स :शुभेंदु अधिकारीपश्चिम बंगालBJPकोलकाता
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