लखनऊः उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव भले ही तय समय पर न हो लेकिन अब जब भी पंचायत चुनाव होंगे तो बूथ स्तर पर फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) को लागू किया जाएगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से फेस रिकग्निशन सिस्टम हर वोटर का वेरिफिकेशन कर कुछ सेकेंड में पूरा कर दोबारा वोट देने और डुप्लीकेट वोटिंग जैसी शिकायतों को खत्म करेगा.
प्रदेश के निर्वाचन आयुक्त आरपी सिंह के अनुसार, पंचायत चुनाव में सूबे के सभी 2.20 लाख बूथों पर प्रदेश सरकार ने फेस रिकग्निशन सिस्टम लगाए जाने को लेकर अपनी सहमति प्रदान कर दी है. जिसके चलते पंचायत चुनावों में अगर कोई व्यक्ति दोबारा वोट डालने का प्रयास करेगा वह तुरंत पकड़ में आ जाएगा.
कैसे काम करेगा एफआरएस
उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयुक्त आरपी सिंह के मुताबिक, निकाय और पंचायत चुनावों की मतदाता सूची में मतदाताओं की फोटो नहीं होती. अब फेस रिकग्निशन सिस्टम के चलते आयोग के पास भी हर वोटर का फोटोयुक्त विवरण होगा. इसके अलावा हर बूथ पर कितने वोट पड़े, पुरुष और महिला वोटर का अलग-अलग प्रतिशत कितना है, कितने वोट रिजेक्ट हुए और क्यों हुए?
यह सब भी एक सेकेंड में पता चल जाएगा. इस तरह से चुनाव में गड़बड़ी की आशंका खत्म होगी और वोटरों से लेकर प्रत्याशियों तक के दावों एवं शिकायतों का निस्तारण में आनन फानन में हो सकेगा. यह दावा करते हुए आरपी सिंह बताते हैं कि उक्त सिस्टम किस तरह से काम करेगा. बूथ पर जब कोई वोटर पहुंचेगा तो सबसे पहले उसकी फोटो आईडी और तस्वीर ली जाएगी.
इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए सिस्टम से वोटर की आईडी और तस्वीर की मैचिंग कराई जाएगी. मैचिंग के लिए एक लिमिट तय होगी. तय लिमिट तक मैचिंग नहीं होती तो पीठासीन अधिकारी तय करेंगे कि वोटर से अतिरिक्त दस्तावेज़ मांगे जाएं.
मैचिंग के बाद वोटर के स्टेट वोटर नंबर के जरिए यह देता सर्वर पर अपलोड किया जाएगा. अब अगर वोट डाल चुका कोई व्यक्ति दूसरी जगह वोट देने पहुंचेगा तो उसकी फोटो अपलोड होते ही पीठासीन अधिकारी को पता चल जाएगा कि वह व्यक्ति पहले कहां मतदान कर चुका है.
डुप्लीकेट वोटिंग पर लगेगा अंकुश
आरपी सिंह के अनुसार, इस व्यवस्था के बाद भी यदि कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि उसका वोट किसी और ने डाल दिया है तो उसका तत्काल सत्यापन हो जाएगा और दावा सही होने पर टेंडर वोट का मौका दिया जाएगा. आरपी सिंह का यह भी कहना है कि फेसियल रिकग्निशन सिस्टम की पूरी प्रक्रिया में वोटर का निजी डेटा की सुरक्षा से जुड़े सभी मानको का पालन होगा.
हर पीठासीन अधिकारी का सिम कार्ड आयोग के सॉफ्टवेयर से बाइंड होगा. मतदान शुरू होने से लेकर खत्म होने तक मोबाइल से कोई कॉल या मैसेज नहीं हो सकेगा. मोबाइल से फोटो खीचने के बाद जैसे ही यह सॉफ्टवेयर पर अपलोड होगी, फोन से फोटो डिलीट हो जाएगा. शाहजहांपुर और कुशीनगर की नगर पंचायत में इस सिस्टम की चेकिंग की गई है.
इन दोनों जगहों पर 50 हजार से अधिक वोटरों की जांच इस सिस्टम के जरिए की गई और एक भी व्यक्ति दोबारा वोट डालने में सफल नहीं हुआ. इस सिस्टम को लेकर मिले फीडबैक के आधार पर सरकार ने आगामी पंचायत चुनावों में हर बूथ पर इसके जरिए मतदान करने का फैसला किया है. हर बूथ पर इस सिस्टम को स्थापित करने में कितना खर्च आएगा. इसकी जानकारी देने को आरपी सिंह ने तैयार नहीं हुए. उनका दावा है कि इस सिस्टम के लागू होने से डुप्लीकेट वोटिंग पर अंकुश लगेगा