लाइव न्यूज़ :

ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर गाढ़ी कमाई लूटने वाले जाएंगे जेल, योगी सरकार लाने जा रही है नए नियम

By राजेंद्र कुमार | Updated: June 16, 2023 18:58 IST

इस विनियमावली के लागू होने पर कोई भी व्यक्ति, संस्था या एनबीएफसी सक्षम स्तर से अनुमोदन / पंजीकरण के बिना लोगों की रकम जमा नहीं कर सकेगी। सरकार ने अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई के लिए मंडलायुक्त को सक्षम प्राधिकारी के रूप में अधिसूचित किया है। ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वालों को अब यूपी में जेल जाना होगा।

Open in App
ठळक मुद्देज्यादा रिटर्न का झांसा देकर पैसे लूटने वालों पर कसेगी लगामयोगी सरकार उप्र अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी विनियमावली, 2023 लाने जा रही हैइस विनियमावली के प्रारूप को अगली कैबिनेट में पास कराने की तैयारी है

लखनऊ: सूबे के छह मुख्यमंत्री 25 सालों में जनता को लूटने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर अंकुश नहीं लगा सके। इसकी वजह रही एनबीएफसी संचालकों की ऊंची पहुँच। परिणाम स्वरूप कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह, मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव अपने शासन काल में ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर जनता की मेहनत से कमाई गई संपत्ति को लूटने वाली एनबीएफसी पर अंकुश लगाने के लिए कानून नहीं ला सके। लेकिन अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में लोगों को अधिक ब्याज या रिटर्न का लालच देकर उनकी गाढ़ी कमाई लूटने वाले पोंजी स्कीम संचालकों (एनबीएफसी) पर शिकंजा कसने का मन बना लिया है। इसके लिए राज्य सरकार प्रदेश में पोंजी स्कीम संचालित करने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के लिए उप्र अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी विनियमावली, 2023 लाने जा रही है।

इस विनियमावली के प्रारूप को अगली कैबिनेट में पास कराने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सचिवालय के अफसरों का कहना है कि इस विनियमावली के लागू होने पर कोई भी व्यक्ति, संस्था या एनबीएफसी सक्षम स्तर से अनुमोदन/पंजीकरण के बिना लोगों की रकम जमा नहीं कर सकेगी। जनता की मेहनत से कमाई गई धनराशि को लूटने वाले कंपनियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी। हर साल राज्य में होने वाले करोड़ों रुपए के वित्तीय फ़्राड रोके जा सकेंगे। यूपी के बैंकिंग सचिव रहे चुके रिटायर आईएएस सदाकांत कहते हैं जो काम 25 साल पहले उनकी पहल पर हो जाना चाहिए था, वह अब हो रहा है, इसकी उन्हे खुशी है। उप्र अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी विनियमावली के लागू होने से राज्य में ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर गाढ़ी कमाई लूटने वालों पर शिकंजा कसेगा।

सदाकांत वह अधिकारी हैं जिन्होने बैंकिंग सचिव रहते हुए गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को कानून के दायरे में लाने के लिए कानून बनाने संबंधी प्रस्ताव तैयार किया था। परंतु उनके इस प्रयास को गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की लाबी में जमीन पर उतरने ही नहीं दिया और बीते 25 वर्षों से राज्य में हर साल ऐसी कंपनियां लोगों की मेहनत की कमाई लूट कर फरार होती रही।

योगी सरकार में भी बीते वर्षों में शाइन सिटी और बाइक बोट जैसी पोंजी स्कीम के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये के घोटाले हुए। सदाकांत के अनुसार, ये  पोंजी स्कीम संचालक लोगों को उनके निवेश/जमा पर अधिक रिटर्न का झांसा देकर उनकी गाढ़ी कमाई पहले जमा कराते हैं और फिर उसे लेकर चंपत हो जाते हैं। ऐसी संस्थाएं या एनबीएफसी न तो भारतीय रिजर्व बैंक और न ही अन्य किसी रेगुलेशन से नियंत्रित होती हैं। न ही वे लोगों से जमा राशि लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अधिकृत होती हैं। हालांकि ऐसे संचालकों पर कार्रवाई करने के उद्देश्य से ही केंद्र सरकार ने फरवरी 2019 में अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम पारित कराया था। इस अधिनियम को यूपी सरकार ने अक्टूबर 2021 में अंगीकार किया था, लेकिन इसे क्रियान्वित करने के लिए अब तक विनियमावली नहीं बनी थी। जिसका संज्ञान लेते हुए अब राज्य सरकार ने उप्र अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी विनियमावली, 2023 का प्रारूप तैयार कराया है। इसे कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों के अनुसार, इस विनियमावली के लागू होने पर कोई भी व्यक्ति, संस्था या एनबीएफसी सक्षम स्तर से अनुमोदन / पंजीकरण के बिना लोगों की रकम जमा नहीं कर सकेगी। सरकार ने अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई के लिए मंडलायुक्त को सक्षम प्राधिकारी के रूप में अधिसूचित किया है। इसके चलते वित्तीय फ़्राड के प्रकरण की शिकायत मिलने पर सक्षम प्राधिकारी के रूप में मंडलायुक्त ऐसे मामलों की जांच करा सकेंगे और वह आरोपी व्यक्ति/संस्था/कंपनी की संपत्ति अटैच कर सकते हैं। उसके खिलाफ एफआइआर भी दर्ज करा सकते हैं। ऐसे मामलों में मुकदमा दर्ज होने पर अपर जिला जज (प्रथम) की कोर्ट विशेष न्यायालय के तौर पर मामले की सुनवाई करेगी। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वालों को अब यूपी में जेल जाना होगा।

टॅग्स :योगी आदित्यनाथउत्तर प्रदेशबैंकिंगबिजनेसजेल
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टTwisha Sharma Death Case: 10000 रुपये इनाम की घोषणा, फरार वकील-पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया जारी, वीडियो

क्राइम अलर्टमां का कटा हाथ लेकर 3 दिन तक भटकता रहा ITBP जवान, कानपुर की घटना से सनसनी

क्राइम अलर्टTwisha Sharma death case: 60 दिन की गर्भवती और मारिजुआना का सेवन?, ट्विशा शर्मा की सास ने कहा-ग्लैमर की दुनिया में धकेली गई और माता-पिता ने छोड़ दी?

भारतUP: पंचायत चुनाव, ओबीसी आयोग, मेट्रो प्रोजेक्ट एवं अन्य मुद्दों को लेकर योगी मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए अहम फैसले

भारत'नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए...प्यार से मानेंगे ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे': एक कार्यक्रम में बोले यूपी सीएम योगी | VIDEO

उत्तर प्रदेश अधिक खबरें

उत्तर प्रदेशहनीमून मनाने यूपी से सिक्किम गया कपल लापता, हादसे का शिकार हुई बस; पहाड़ी से 1,000 फीट नीचे नदी में गिरा वाहन

उत्तर प्रदेशKaushambi Accident: खुशियों के बीच पसरा मातम, बारात से लौट रही कार की पेड़ से टक्कर, 4 लोगों की मौत

उत्तर प्रदेशBSP Mayawati: पारिवारिक विवाद में उलझी मायावती ने भाई से भी वापस लिया पद, अब आनंद कुमार की जगह रणधीर बेनीवाल बनाए गए नेशनल कोऑर्डिनेटर

उत्तर प्रदेशआज का पंचांग 10 जनवरी 2025: जानें आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय

उत्तर प्रदेशUP Road Accident: लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे पर सड़क हादसा, दो बाइकों की टक्कर, 2 की मौत