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भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य, एक्शन में बालेन शाह सरकार, आम लोगों पर बम?

By एस पी सिन्हा | Updated: April 23, 2026 16:43 IST

नेपाली सुरक्षा बल (एनपीएफ) सीमा पर आने-जाने वाले लोगों के बैग और वाहनों की कड़ी तलाशी ले रहे हैं, यहां तक कि छोटे पैकेट भी जब्त किए जा रहे हैं।

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ठळक मुद्देबिहार के रक्सौल, जोगबनी, सीतामढ़ी, और मधुबनी जैसे सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा पसरा है।भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं और इस फैसले से उनके लिए महंगाई बढ़ गई है।भारत-नेपाल के पारंपरिक “रोटी-बेटी” संबंधों पर भी असर पड़ रहा है।

पटनाःनेपाल में बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार के द्वारा भारत-नेपाल सीमा पर भंसार (कस्टम ड्यूटी) के नियमों को बेहद कड़ा करने के फैसले के बाद बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भारी नाराजगी और तनाव देखा जा रहा है। नेपाल सरकार के फैसले का असर अब बिहार के लोगों पर भी देखने को मिलेगा। दरअसल, नेपाल सरकार ने नए कस्टम नियमों ने मधेशी क्षेत्रों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अप्रैल 2026 से लागू इस व्यवस्था के तहत भारत से 100 नेपाली रुपये (करीब 62 भारतीय रुपये) से अधिक का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दी गई है।

पहले हजारों रुपये की घरेलू खरीदारी पर भी टैक्स नहीं देना पड़ता था। इस फैसले का सीधा असर नेपाल के तराई इलाकों के आम लोगों की जेब पर पड़ा है। नेपाली सुरक्षा बल (एनपीएफ) सीमा पर आने-जाने वाले लोगों के बैग और वाहनों की कड़ी तलाशी ले रहे हैं, यहां तक कि छोटे पैकेट भी जब्त किए जा रहे हैं।

इस फैसले के कारण बिहार के रक्सौल, जोगबनी, सीतामढ़ी, और मधुबनी जैसे सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा पसरा है, क्योंकि नेपाली ग्राहक अब कम आ रहे हैं। हालांकि नेपाली निवासियों का कहना है कि वे दैनिक उपयोग की चीजों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं और इस फैसले से उनके लिए महंगाई बढ़ गई है।

उधर, नेपाल की ओर से सीमावर्ती इलाकों में इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। वहीं, भारतीय व्यापारी इस फैसले को सीमा व्यापार के लिए बुरा मान रहे हैं, क्योंकि छोटे फुटकर व्यापारियों से लेकर थोक विक्रेताओं तक का टर्नओवर गिरा है। व्यापारियों के अनुसार, इस फैसले से न सिर्फ कारोबार प्रभावित हुआ है, बल्कि भारत-नेपाल के पारंपरिक “रोटी-बेटी” संबंधों पर भी असर पड़ रहा है।

मधेशी क्षेत्रों में इसको लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। दरअसल वर्षों से एक-दूसरे के देश में सामान लाने-ले जाने के लिए स्वतंत्र थे दैनिक उपयोग की वस्तुओं किराना, तेल, साबुन, कपड़े और दवाइयों पर अब 5 से 80 प्रतिशत तक टैक्स लगने से रसोई का बजट बिगड़ गया है।

बीरगंज, विराटनगर और जनकपुर जैसे सीमावर्ती इलाकों के लोग लंबे समय से भारतीय बाजारों पर निर्भर रहे हैं, जहां सामान अपेक्षाकृत सस्ता मिलता था। स्थानीय नेपाली नागरिकों का कहना है कि अब छोटी-सी खरीदारी पर भी टैक्स देना पड़ रहा है, जिससे आम जीवन महंगा हो गया है। वहीं सीमा पर अब पहले जैसी ढील नहीं दिख रही। कस्टम चेकपोस्ट से लेकर छोटे रास्तों तक निगरानी बढ़ा दी गई है।

सुरक्षाकर्मी हर सामान की जांच कर रहे हैं और 100 रुपये से अधिक कीमत के सामान पर टैक्स लगाया जा रहा है। लाउडस्पीकर के जरिए भी लोगों को नियमों की जानकारी दी जा रही है। हाल ही में सप्तरी जिले के कुनौली बॉर्डर पर एक घटना ने हालात को और स्पष्ट कर दिया। भारत से सामान लेकर लौट रहे लोगों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई।

इस दौरान धक्का-मुक्की और तीखी बहस देखने को मिली, जो स्थानीय लोगों की नाराजगी को दर्शाती है। बता दें कि सीमावर्ती इलाकों में परिवारिक और सांस्कृतिक संबंधों के चलते लोग अक्सर शादी, अंतिम संस्कार और त्योहारों के लिए सामान खरीदने भारत आते हैं। भारत और नेपाल के बाजारों में 20 से 45 प्रतिशत तक कीमत का अंतर होने के कारण लोग सस्ता सामान खरीदना पसंद करते हैं।

नए नियमों ने इस परंपरा को प्रभावित किया है। इस बीच नेपाली अधिकारियों ने भी माना है कि इस फैसले का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है। पहले छोटे स्तर पर जो सामान बिना रोक-टोक आता था, अब वह जांच और टैक्स के दायरे में आ गया है। इससे सीमावर्ती लोगों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है।

जानकारों का मानना है कि सरकार के लिए राजस्व और नियंत्रण जरूरी है, लेकिन सीमावर्ती इलाकों की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा। फिलहाल, सख्ती और लोगों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। जानकारों के अनुसार यदि यह सख्ती लंबे समय तक जारी रही, तो दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

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