पटनाः बिहार सरकार ने वित्तीय संकट और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक से जून तक 12,000 करोड़ रुपये का ऋण की मांग की है। इस राशि में से करीब 4 हजार करोड़ रुपये इसी महीने के अंत तक मिलने की संभावना है। सरकार इस धनराशि का उपयोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, लंबित भुगतान और विकास कार्यों को गति देने के लिए करना चाहती है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद राजधानी दिल्ली का दौरा किया और वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दरअसल, बिहार में वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले महीने में ही सरकारी कर्मचारियों को वेतन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के लगभग 10 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों को मार्च महीने का वेतन नहीं मिला है।
इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत एक करोड़ से ज्यादा लोगों की पेंशन भी बकाया है। उन्हें मार्च महीने की पेंशन राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। अधिकारियों की मानें तो जल्द ही भीतर पेंशन का भुगतान होने की संभावना है। वित्त विभाग के सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े विकास कार्यो से संबंधित बड़े भुगतानों में देरी हो रही है।
विभाग द्वारा ऐसे सभी बड़े वित्तीय भुगतान के दावों की जांच कर ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। वहीं, समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के माध्यम से राज्य के 1.15 करोड़ से अधिक सामाजिक सुरक्षा लोगों को मार्च, 2026 की पेंशन का भुगतान नहीं हो पाया है।
इस योजना के तहत सरकार विधवा महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांगों को हर महीने पेंशन उनके खाते में ट्रांसफर करती है। विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा पेंशन धारकों को पेंशन भुगतान में देरी हुई है। सूत्रों के अनुसार सरकार इस समय संकट प्रबंधन की स्थिति में काम कर रही है। प्रस्तावित ऋण का बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में खर्च किया जाएगा।
मार्च और अप्रैल महीने की पेंशन अब तक लंबित है और सरकार की योजना है कि मई में एक करोड़ से अधिक बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवाओं को दो महीने की पेंशन एक साथ दी जाए। इसके अलावा, वित्तीय संकट के कारण रुकी हुई विकास योजनाओं को भी इस ऋण के माध्यम से गति देने की तैयारी है।
लगभग 58 हजार छात्रों के छात्र ऋण कार्ड के तहत भुगतान भी अटका हुआ है, जिसे मई से जारी करने की योजना बनाई जा रही है। वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण कई निर्माण कार्य भी प्रभावित हुए हैं, जिन्हें ऋण मिलने के बाद पुनः शुरू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया था।
जिससे सरकार पर हर महीने करीब 1150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही महिला रोजगार योजना पर लगभग 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होने से राज्य के खजाने पर दबाव और बढ़ गया है। वर्तमान में राज्य की कुल देनदारी 3.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है और वर्ष 2026 के अंत तक इसके 4 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने की आशंका है।
सरकार को इस वर्ष लगभग 40 हजार करोड़ रुपये केवल ब्याज के रूप में चुकाने हैं, जो प्रतिदिन 100 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है। हालांकि वित्त विभाग का कहना है कि यह स्थिति राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम की सीमा के भीतर है। उल्लेखनीय है कि बीते कुछ दिनों से विपक्षी दलों के नेता आरोप लगा रहे हैं कि राज्य सरकार का खजाना खाली हो चुका है।
इस कारण वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं हो पा रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि राज्य में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अराजकता है। डबल इंजन की सरकार पूरी तरह विफल है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी ने कहा कि सरकार का खजाना खाली है। कर्मचारियों की बात छोड़िए, सरकार के मंत्रियों और यहां तक कि मुझे भी वेतन नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारी सेवकों के पेंशन का भुगतान नहीं हो रहा है। सरकार के पास कर्मचारियों को सैलरी और पेंशन देने का पैसा नहीं है। मंत्रियों और विधायकों को भी अभी तक सैलरी नहीं मिल पाई है।वहीं, जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी लगातार आरोप लगा रहे हैं कि सरकार के पास फंड की कमी हो गई है।
इसलिए कर्मचारियों को वेतन-पेंशन बकाया होने के साथ ही ठेकेदारों को पैसा भी नहीं मिल रहा है। हालांकि, इन आरोपों को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने खारिज करते हुए कहा कि सरकार का खजाना खाली नहीं है। तेजस्वी यादव के आरोपों का पलटवार करते हुए कहा गया कि सभी विधायकों और मंत्रियों एवं नेता प्रतिपक्ष को मार्च महीने की सैलरी का भुगतान किया जा चुका है।