लाइव न्यूज़ :

ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण की पहल

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: September 12, 2023 12:13 IST

अभी तो हालत यह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के एक्सपायर होने के बाद लोग या तो उसे यूं ही फेंक देते हैं या कबाड़ी वाले खरीद कर अव्यवस्थित ढंग से उसका निस्तारण करते हैं, जिससे उसका पूरी तरह से निस्तारण भी नहीं हो पाता और पर्यावरण भी प्रदूषित होता है।

Open in App

अत्याधुनिक तकनीकी विकास के साथ ही हमारे दैनंदिन जीवन में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की संख्या बढ़ती गई है, जिसने हमारे जीवन को काफी सुविधाजनक बनाया है। लेकिन जैसे-जैसे इन उपकरणों की संख्या बढ़ती जा रही है, एक्सपायर होने के बाद इनके निस्तारण की समस्या भी बढ़ने लगी है। ऐसे में केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय ने 134 इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की जो एक्सपायरी अवधि तय की है, उसे एक अच्छा कदम माना जा सकता है, क्योंकि यह अवधि खत्म हो जाने के बाद इन वस्तुओं को ई-वेस्ट घोषित कर नष्ट करने के निर्देश जारी किए गए हैं। 

अभी तो हालत यह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के एक्सपायर होने के बाद लोग या तो उसे यूं ही फेंक देते हैं या कबाड़ी वाले खरीद कर अव्यवस्थित ढंग से उसका निस्तारण करते हैं, जिससे उसका पूरी तरह से निस्तारण भी नहीं हो पाता और पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। ई-वेस्ट में मर्करी, आर्सेनिक, लेड, केडमियम, सेलेनियम और हेक्सावेलेंट क्रोमियम जैसे विषैले रसायन होते हैं जिससे इनका अगर सुरक्षित निस्तारण नहीं किया गया तो इससे सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों के होने का खतरा होता है। सरकार देश में ई-वेस्ट को ठिकाने लगाने के लिए 1 अप्रैल 2023 को ही कानूनी प्रावधान कर चुकी है कि ई-वेस्ट का जो निर्माण करेगा, उसी को उसे ठिकाने लगाना होगा। अब कम्प्यूटर, मॉनिटर, माउस, की-बोर्ड, लैपटॉप, कंडेंसर, माइक्रो चिप, टेलीविजन, वॉशिंग मशीन आदि को ई-वेस्ट घोषित करने के बाद उन पर प्रक्रिया करने के लिए पहला प्रोजेक्ट भोपाल में स्थापित किया गया है। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं भोपाल के स्थानीय प्रशासन की ओर से यह परियोजना संचालित की जा रही है। चूंकि विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की एक्सपायरी अवधि के बारे में स्पष्टता नहीं थी, इसलिए अब उसकी अवधि तय कर दी गई है जैसे सीलिंग फैन, फ्रिज, वाशिंग मशीन की एक्सपायरी अवधि दस वर्ष तय की गई है तो टैबलेट, आईपैड, स्मार्टफोन, लैपटॉप की पांच साल। रेडियो सेट की आठ साल तो स्कैनर की पांच साल। महत्वपूर्ण बात यह है कि एक्सपायरी हो जाने के बाद संबंधित वस्तु को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी को उठानी होगी और उचित प्रकार से इसे अंजाम देने के बाद कंपनी पुरानी वस्तुएं बदल सकती है या नए ब्रांड को लांच कर सकती है। आशा की जानी चाहिए कि इस व्यवस्था के बाद अब ई-कचरे की बढ़ती समस्या पर काबू पाया जा सकेगा और उसका समुचित तरीके से निस्तारण होगा।

टॅग्स :हिंदी समाचारलोकमत हिंदी समाचार
Open in App

संबंधित खबरें

भारतक्रांति की भाषा: भगत सिंह और हिंदी का अद्भुत संबंध

भारतRam Rasayan Book: 'राम रसायन' पुस्तक के बारे में बोले डॉ. विजय दर्डा, कहा- "यह किताब राम के चरित्र को अनुभव करने का जरिया"

भारत'Ram Rasayan' Book: रामकथा पर आधारित पुस्तक 'राम रसायन' का मुरारी बापू ने किया विमोचन

भारतदुनिया में हिंदी का विस्तृत हो रहा आकाश 

भारतLokmat Parliamentary Awards 2025: डॉ. विजय दर्डा ने कहा- लोकमत लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है

भारत अधिक खबरें

भारतकेंद्र ने लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव दिया, बिल 16 अप्रैल को संसद में किया जाएगा

भारतनोएडा में श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन को मुख्यमंत्री योगी ने गंभीरता से लिया, सरकार बढ़ाएगी 4 लाख आउटसोर्स कर्मियों का मानदेय

भारत'जो लोग मुख्यमंत्री बन रहे हैं, उनके सर्टिफिकेट की भी जांच होनी चाहिए': बिहार के भावी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शैक्षणिक योग्यता और डिग्री पर तेजस्वी यादव ने उठाया सवाल

भारतSamrat Chaudhary oath ceremony: सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल में कौन होंगे शामिल?, देखिए संभावित मंत्री की पूरी सूची?

भारत'PM मोदी देशद्रोही हैं, US व्यापार सौदे में भारत को बेच दिया': राहुल गांधी ने दोहराया अपना दावा