Samrat Chaudhary Education: बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा आज पटना में की जाएगी। यह घोषणा शाम 4 बजे बिहार विधानसभा के सेंट्रल हॉल में NDA की बैठक होने के बाद होगी। शपथ ग्रहण समारोह संभवतः कल होगा, जबकि मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज इस्तीफ़ा देंगे। नीतीश लगभग कई दशकों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद अब पद छोड़ेंगे।
बिहार में नीतीश के बाद सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की बात कही जा रही है। सबसे ज्यादा सम्राट चौधरी की दावेदारी है, ऐसे में आइए आपको बताते हैं सम्राट चौधरी के बारे में वो सब कुछ जो शायद आप नहीं जानते होंगे।
सम्राट चौधरी की शिक्षा
उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा बिहार में पूरी की और बाद में मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। अपने चुनावी हलफ़नामे में उन्होंने बताया है कि उन्होंने विश्वविद्यालय से 'प्री-फ़ाउंडेशन कोर्स' (PFC) पूरा किया है। इस बात पर बहस होती रही है कि क्या यह कोर्स पारंपरिक डिग्री के बराबर है या नहीं।
उन्होंने 'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' (D.Litt.) की मानद उपाधि का भी जिक्र किया है। यह कोई अकादमिक डिग्री नहीं है जो औपचारिक पढ़ाई के बाद मिलती हो, बल्कि यह एक तरह का सम्मान या पहचान है।
ये योग्यताएँ बिहार की राजनीतिक चर्चाओं का विषय रही हैं। लेकिन चौधरी का मानना है कि उनकी पहचान उनके द्वारा हासिल किए गए शैक्षिक प्रमाणपत्रों से नहीं, बल्कि उनके प्रशासनिक अनुभव और शासन-प्रशासन में बिताए गए वर्षों से बनती है।
राजनीतिक जीवन का शुरुआती दौर
1990 के दशक की शुरुआत में, अपने पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
धीरे-धीरे उन्होंने बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक युवा नेता के तौर पर अपनी मज़बूत पहचान बनाई।
विधायक (MLA) के रूप में चुने गए और राज्य विधानसभा में विभिन्न ज़िम्मेदारियाँ संभालना शुरू किया।
बिहार सरकार में उन्हें कृषि मंत्री का पद सौंपा गया; यह चौधरी का पहला मंत्री पद का अनुभव था।
चौधरी को शहरी विकास, आवास और बाद में पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए। ये विभाग उनके भविष्य में शासन-प्रशासन और नीति-निर्माण में निभाई जाने वाली बड़ी भूमिका का संकेत थे।
उन्हें एक कड़े प्रशासक और दृढ़ निश्चयी नेता के तौर पर देखा जाता है।
BJP पार्टी में बढ़ता कद
पार्टी के भीतर वे एक प्रमुख केंद्रीय संगठनात्मक हस्ती बन गए। जल्द ही उन्हें बिहार BJP का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिससे उनकी राजनीतिक उपस्थिति और बढ़ाने की स्थिति बनी।
बिहार के उपमुख्यमंत्री
2024 में, चौधरी का कद बढ़कर उपमुख्यमंत्री का हो गया, जिससे बिहार राज्य में पार्टी के शीर्ष नेताओं में उनकी जगह पक्की हो गई।