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28 दिन में 3.42 लाख पहुंचे?, खाड़ी युद्ध की छाया टयूलिप गार्डन पर भी, वर्ष 2023 का रिकार्ड भी नहीं टूटा?

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: April 14, 2026 14:57 IST

वर्ष 2023 के आंकड़े से भी कम है जब 30 दिनों में 3.65 लाख पर्यटक आए थे। इतना जरूर था कि वर्ष 2023 के उपरांत टयूलिप गार्डन के दीदार को आने वालों की भीड़ सभी रिकार्ड तोड़ने लगी थी।

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ठळक मुद्देदरअसल यह मौसम के चक्र के कारण हुआ है।26 मार्च से 26 अप्रैल तक खोला जाता रहा है।28 दिनों में आने वालों का आंकड़ा 3.42 लाख तक ही पहुंच पाया है।

जम्मूः खाड़ी युद्ध की छाया इस बार एशिया के सबसे बड़े टयूलिप गार्डन पर भी पड़ गई है। इसके दीदार को आने वाले इस बार अभी तक वर्ष 2023 के रिकार्ड को भी नहीं तोड़ पाए हैं। जबकि यह परसों यानि 16 अप्रैल को बंद होने जा रहा है। इस बार यह गार्डन मौसम की आंख मिचौनी के कारण 16 मार्च को ही खोल दिया गया था और इसे परसों बंद कर दिया जाएगा।

अतीत में यह 26 मार्च से 26 अप्रैल तक खोला जाता रहा है। दरअसल यह मौसम के चक्र के कारण हुआ है। बात मौसम की नहीं बल्कि इरान-अमेरिका की लड़ाई के कारण खराब हुए माहौल की है जिसने इस बार टयूलिप गार्डन पर भी अपनी छाप छोड़ दी। नतीजा सामने है। पिछले 28 दिनों में आने वालों का आंकड़ा 3.42 लाख तक ही पहुंच पाया है।

यह वर्ष 2023 के आंकड़े से भी कम है जब 30 दिनों में 3.65 लाख पर्यटक आए थे। इतना जरूर था कि वर्ष 2023 के उपरांत टयूलिप गार्डन के दीदार को आने वालों की भीड़ सभी रिकार्ड तोड़ने लगी थी। यह इसी से स्पष्ट था कि यहां वर्ष 2024 में 4.65 लाख पर्यटकों ने गार्डन का दौरा किया था तो पिछले साल एक नया रिकार्ड 8.85 लाख का बना था।

यही नहीं पिछले साल तो 15 दिनों में ही वर्ष 2024 का रिकार्ड टूट गया था। जानकारी के लिए ट्यूलिप गार्डन का मात्र 19 साल पुराना। मात्र 19 साल में ही यह उद्यान अपनी पहचान को कश्मीर के साथ यूं जोड़ लेगा कोई सोच भी नहीं सकता था। डल झील के सामने के इलाके में सिराजबाग में बने ट्यूलिप गार्डन में ट्यूलिप की 75 से अधिक किस्में आने-जाने वालों को अपनी ओर आकर्षित किए बिना नहीं रहती हैं।

यह आकर्षण ही तो है कि लोग बाग की सैर को रखी गई फीस देने में भी आनाकानी नहीं करते। पिछले साल जयपुर से आई सुनिता कहती थीं कि किसी बाग को देखने का यह चार्ज ज्यादा है पर भीतर एक बार घूमने के बाद लगता है यह तो कुछ भी नहीं है। सिराजबाग हरवान-शालीमार और निशात चश्माशाही के बीच की जमीन पर करीब 700 कनाल एरिया में फैला हुआ है।

यह तीन चरणों का प्रोजेक्ट है जिसके तहत अगले चरण में इसे 1360 और 460 कनाल भूमि और साथ में जोड़ी जानी है।  शुरू-शुरू में इसे शिराजी बाग के नाम से पुकारा जाता था। असल में महाराजा के समय उद्यान विभाग के मुखिया के नाम पर ही इसका नामकरण कर दिया गया था।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरउमर अब्दुल्लाईरान
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