25 साल से पत्रकारिता में सक्रिय। नियमित स्तंभकार। बाजारवाद के दौर में मीडिया पुस्तक प्रकाशित। मशहूर पत्रिका दिनमान का मोनोग्राफ लेखन। लिखना यानी जिंदगी, पढ़ना यानी डिप्रेशन लेकिन दोनों से अथाह प्यार।Read More
राज्य की सत्ता संभाल चुकी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीपी ने तो बाकायदा अपने चुनाव घोषणा पत्र में इस अनुच्छेद को फिर से बहाल करने का वादा कर रखा है. ...
हिंदी या भारतीय भाषाओं के जरिये न्याय हासिल करने की राह में सबसे बड़ी बाधा संविधान के अनुच्छेद 348 की व्यवस्था है, जिसके तहत अगर संसद कानून नहीं बनाती तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट अंग्रेजी में ही सुनवाई करेंगे। ...
महिलाएं अब पहले की तरह अपने घर के पुरुषों की पसंद वाले दलों और प्रत्याशियों को वोट नहीं दे रहीं, बल्कि अपनी पसंद वाले प्रत्याशी और दल वोट दे रही हैं। ...
लोकतांत्रिक समाज में चुनावी मैदान को पूर्णकालिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए ही सीमित करना संभव नहीं है लेकिन यह सवाल जरूर उठता रहा है कि सियासी मैदान में फिल्मी सितारों का उतरना कितना जायज है? ...
मायावती के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी दलों का मोर्चा बनाने की कोशिशों में जुटी कथित सांप्रदायिकता विरोधी वैचारिकी और राजनीति को बड़ा झटका लगा है। ...
Social media: सोशल मीडिया पर भरोसा इतना बढ़ा कि इसके जरिये दुनिया में उन अंधेरे कोनों में लोकतंत्र की रोशनी नजर आने लगी, जहां अभी तक लोकतंत्र नहीं पहुंच पाया है. ...
अंग्रेजों ने जब चाय के बागानों को विकसित किया तो उसमें काम करने के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और उड़ीसा (ओडिशा) से भारी संख्या में मजदूर लाए गए। ...