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ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण से कम कुछ भी स्वीकार नहीं?, ट्रंप ने कहा-‘गोल्डन डोम’ मिसाइल ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’, ग्रीनलैंड वासी बोले- क्षेत्र बिकाऊ नहीं

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 14, 2026 19:44 IST

नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन)को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए’’ अन्यथा रूस या चीन इसे हासिल कर लेंगे और यह नहीं होने जा रहा है।

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ठळक मुद्देग्रीनलैंड के अमेरिका के हाथों में आने से नाटो कहीं अधिक शक्तिशाली और प्रभावी बन जाएगा। ग्रीनलैंड वासियों का कहना है कि यह क्षेत्र बिकाऊ नहीं है।आर्कटिक द्वीप पर कब्जा करने की आशंका से इनकार नहीं किया है।

नुकः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण से कम कुछ भी स्वीकार नहीं है। उन्होंने यह टिप्पणी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों की मेजबानी के लिए आयोजित वार्ता से कुछ घंटे पहले की है। ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट में यह दलील दोहराई कि अमेरिका को ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से ग्रीनलैंड की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसे हासिल करने के लिए नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन)को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए’’ अन्यथा रूस या चीन इसे हासिल कर लेंगे और यह नहीं होने जा रहा है।

ट्रंप ने लिखा, ‘‘ग्रीनलैंड के अमेरिका के हाथों में आने से नाटो कहीं अधिक शक्तिशाली और प्रभावी बन जाएगा। इससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं है।’’ ग्रीनलैंड नाटो सहयोगी डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। यह भू-राजनीतिक उथल-पुथल के केंद्र में है क्योंकि ट्रंप इस पर अमेरिका के नियंत्रण पर अड़े हुए हैं जबकि ग्रीनलैंड वासियों का कहना है कि यह क्षेत्र बिकाऊ नहीं है।

व्हाइट हाउस ने जबरन इस आर्कटिक द्वीप पर कब्जा करने की आशंका से इनकार नहीं किया है। वेंस का बुधवार को वाशिंगटन में डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और उनके ग्रीनलैंड के समकक्ष विवियन मोट्ज़फेल्ड से इस पूरे मुद्दे पर बैठक करने का कार्यक्रम है।

नुक निवासी एवं 22 वर्षीय छात्रा तुता मिकेलसन ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी अधिकारियों को ‘पीछे हटने’ का संदेश मिल जाएगा। ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के लिए ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’ है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस द्वीप को अमेरिका की सुरक्षा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।

ट्रंप ने अपने इस कदम के लिए रूसी और चीनी जहाजों से उत्पन्न खतरे को एक कारण बताया है। हालांकि, ग्रीनलैंड के निवासियों और विशेषज्ञों ने उनके दावों पर सवाल उठाया है। इस बीच, इस संकट को सुलझाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में आर्कटिक कॉकस के सीनेटरों से मुलाकात करने वाले हैं।

अमेरिकी कांग्रेस में न्यू हैम्पशायर की डेमोक्रेट सीनेटर जीन शाहीन और अलास्का की रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने एक द्विदलीय विधेयक पेश किया है। इसमें अमेरिकी रक्षा या विदेश विभागों से प्राप्त धन का उपयोग ग्रीनलैंड या किसी भी नाटो सदस्य राज्य के संप्रभु क्षेत्र पर उस देश या उत्तरी अटलांटिक परिषद की सहमति के बिना कब्जा करने या उसे अपने साथ मिलाने के लिए करने पर रोक का प्रावधान है। दोनों दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भी सप्ताह के अंत में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों से मिलने के लिए कोपेनहेगन जा रहा है।

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