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चीन के साथ व्यापार घाटा कम होना सुकूनदेह

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: April 20, 2019 20:52 IST

हाल ही में प्रकाशित भारत-चीन व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक 2018-19 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 88 अरब डॉलर रहा.

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हाल ही में प्रकाशित भारत-चीन व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक 2018-19  में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 88 अरब डॉलर रहा. यह बात महत्वपूर्ण है कि पहली बार भारत, चीन के साथ व्यापार घाटा 10 अरब डॉलर तक कम करने में सफल रहा है. भारत का व्यापार घाटा करीब 52 अरब डॉलर रहा. पिछले कई वर्षो से चीन के साथ लगातार छलांगें लगाकर बढ़ता हुआ व्यापार घाटा भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था.

चीन के बाजार तक भारत की अधिक पहुंच और अमेरिका व चीन के बीच चल रहे मौजूदा व्यापार युद्ध के कारण पिछले वर्ष भारत से चीन को निर्यात बढ़कर 18 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2017-18 में 13 अरब डॉलर था. इतना ही नहीं चीन से भारत का आयात भी 76 अरब डॉलर से कम होकर 70 अरब डॉलर रह गया. 

गौरतलब है कि वर्तमान में चीन भारतीय उत्पादों का तीसरा बड़ा निर्यात बाजार है. वहीं चीन से भारत सबसे ज्यादा आयात करता है. दोनों देशों के बीच 2001-02 में आपसी व्यापार महज तीन अरब डॉलर था जो 2018-19 में बढ़कर करीब 88 अरब डॉलर पर पहुंच गया. चीन से भारत मुख्यत: इलेक्ट्रिक उपकरण, मैकेनिकल सामान, कार्बनिक रसायनों आदि का आयात करता है. वहीं भारत से चीन को मुख्य रूप से खनिज ईंधन और कपास आदि का निर्यात किया जाता है. पिछले एक दशक के दौरान चीन ने भारतीय बाजार में तेजी से अपनी पैठ बढ़ाई और भारतीय बाजार में अपने सामान का प्रवाह लगातार बढ़ाया लेकिन 2018-19 में पहली बार चीन से होने वाले आयात में कमी आई.

यह भारत-चीन व्यापार का रेखांकित किया जाने वाला नया तथ्य दिखाई दे रहा है. अब अप्रैल 2019 में चीन के साथ द्विपक्षीय कारोबार में व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत ने 380 उत्पादों की सूची चीन को भेजी है, जिनका चीन को निर्यात बढ़ाया जा सकता है. इनमें मुख्य रूप से बागवानी, वस्त्र, रसायन और औषधि क्षेत्र के उत्पाद शामिल हैं.

देश और दुनिया के अर्थ विशेषज्ञों का मत है कि वर्ष 2018 की शुरुआत से ही जहां भारत व चीन के बीच अधिक कारोबार की संभावनाएं बढ़ती गईं, वहीं भारत से चीन को निर्यात बढ़े और भारत का चीन के साथ व्यापार असंतुलन कम होने का नया परिदृश्य भी दिखाई दिया है. वर्ष 2018 में भारत-चीन के बीच ऐसी महत्वपूर्ण वार्ताएं हुईं जिसने भारत से चीन को निर्यात बढ़ाने तथा भारत-चीन के बीच व्यापार असंतुलन कम करने में प्रभावी भूमिका निभाई है.

पिछले वर्ष 27-28 अप्रैल को चीन के वुहान शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय अनौपचारिक बैठक के बाद भारत-चीन के बीच आर्थिक और कारोबार संबंधों के नए दौर की संभावना आगे बढ़ी थी. द्विपक्षीय अनौपचारिक बैठक में कई आर्थिक और कारोबार से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी. इस अनौपचारिक मुलाकात से भारत एवं चीन के बीच दशकों से कायम अविश्वास के माहौल को बदलने और कारोबार बढ़ाने की जोरदार कोशिशें आगे बढ़ी थीं. इसी तरह 27 मई 2018 को भारत ने चीन के सॉफ्टवेयर बाजार का लाभ उठाने के लिए वहां दूसरे सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) गलियारे की शुरुआत की.  

चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे को और कम करने के लिए भारत से निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार के द्वारा निर्यातकों को हरसंभव प्रोत्साहन देना होगा. चीन से व्यापार में मुकाबला करने के लिए भारत को कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने वाले देश के रूप में बाजार पहचान बनानी होगी. हमें अपनी बुनियादी संरचना में व्याप्त अकुशलता एवं भ्रष्टाचार पर नियंत्रण कर अपने प्रॉडक्ट की उत्पादन लागत कम करनी होगी. चीन की तरह भारत को भी गुड गवर्नेस की स्थिति बनानी होगी.

प्रतिस्पर्धा में सतत सुधार तथा वित्तीय मानदंडों के प्रति जवाबदेही पर ध्यान देना होगा. चीन से प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में भारत की एक कमजोर तस्वीर को बदलना होगा. भारत में बुनियादी ढांचे और महंगे ऋण के अलावा कारोबारी माहौल, श्रम की बढ़ती लागत और लॉजिस्टिक के मोर्चे पर जो दिक्कतें दिखाई दे रही हैं उन्हें दूर करना होगा. इसके साथ-साथ भारतीय उद्योगों को चीन के मुकाबले में खड़ा करने के लिए उद्योगों को नए अनुसंधान खोज से परिचित कराने के मद्देनजर डीआरडीओ और इसरो जैसे शीर्ष अनुबंधित संस्थानों को महत्वपूर्ण बनाना होगा. 

हम आशा करें कि वर्ष 2018-19 में चीन को भारत के निर्यात बढ़ने और भारत में चीन से आयात घटने का जो सुकूनभरा परिदृश्य उभरकर सामने आया है, वह आगामी वर्षो में भी निरंतर जारी रहेगा. चीन के साथ विदेश व्यापार का ऐसा परिदृश्य भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ बनते हुए दिखाई दे रहा है. 

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