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प्रकाश बियाणी का नजरियाः अमेरिका-चीन द्वंद्व में भारत को मौका

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: September 11, 2018 05:43 IST

यह ट्रेड वॉर अमेरिका और चीन से हमारे वाणिज्यिक रिश्ते बदल देगा। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर भारत के लिए मौका है, पर क्या हम तैयार हैं? 

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प्रकाश बियाणी

अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दुनिया के सबसे अक्खड़ राजनेता हैं जिनके लिए अमेरिका फस्र्ट है, शेष सब लास्ट। उनका कहना है कि तेजी से विकसित हो रहे देश अमेरिका से सब्सिडी लेकर अमेरिकन अर्थव्यवस्था में सेंध लगा रहे हैं। चीन और भारत अमेरिका से अरबों डॉलर की रियायत ले रहे हैं पर उनके साथ व्यापार में अमेरिका को घाटा हो रहा है। 2017 में चीन ने अमेरिका को 506 बिलियन डॉलर का सामान बेचा, पर चीन ने अमेरिका से 130 बिलियन डॉलर की ही खरीद की। इसी तरह भारत ने अमेरिका को 48।6 बिलियन डॉलर का सामान बेचा और 25।7 बिलियन डॉलर की खरीद की।

बिजेनस में ट्रेड गैप से खिन्न ट्रम्प ने चीन पर अनुचित व्यापार व्यवहार और बौद्धिक सम्पदा की चोरी का भी आरोप लगाते हुए एल्युमीनियम पर 10 फीसदी और स्टील पर 25 फीसदी ड्यूटी लगा दी। चीन को इससे करीब 100 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। चीन भी चुप नहीं बैठा और उसने 100 से ज्यादा अमेरिकन उत्पादों के अमेरिका से आयात पर 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के बीच शुरू हुए इस ट्रेड वॉर से भारत भी प्रभावित हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपए में ऐतिहासिक गिरावट आई। एक डॉलर का मूल्य 71 रुपए से ज्यादा हो गया है। एल्युमीनियम और स्टील के अमेरिका निर्यात पर भारत को भी ज्यादा ड्यूटी चुकानी पड़ रही है। 30 अमेरिकन उत्पादों पर ड्यूटी बढ़ाकर भारत भी इस ट्रेड वॉर में शामिल हो गया है। ट्रम्प ने कहा है कि हम 19।15 लाख करोड़ रुपए के चायनीज इम्पोर्ट पर टैरिफ लगाएंगे। तेजी से विकसित हो रहे देशों के साथ असंतुलित ट्रेड गैप अमेरिका को मंजूर नहीं है। 

इस ट्रेड वॉर से जो अमेरिकन गुड्स चायनीज मार्केट से बाहर होने जा रहे हैं, उनका मूल्य भारत से चीन को अभी कुल निर्यात से 10 गुना है। यानी भारत के लिए चीन को निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं जन्म ले रही हैं। हम टेक्सटाइल, गारमेंट्स, जेम्स और ज्वेलरी के बड़े निर्यातक हैं तो ल्यूब्रिकेंट्स, ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, फार्मास्युटिकल्स, कॉटन,  ऑर्गेनिक केमिकल्स, इलेक्ट्रिक मशीनरी और कॉपर जैसे कई उत्पाद हैं जिनकी चीन को हम आपूर्ति कर सकते हैं।  

यह ट्रेड वॉर अमेरिका और चीन से हमारे वाणिज्यिक रिश्ते बदल देगा। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर भारत के लिए मौका है, पर क्या हम तैयार हैं? 

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