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वीबी-जीरामजी को लेकर यूपी में सपा-भाजपा में बढ़ेगी तल्खी?, मनरेगा में 11 लाख करोड़ खर्च

By राजेंद्र कुमार | Updated: January 13, 2026 19:30 IST

मनरेगा योजना रोजगार नहीं, लूट की गारंटी थी. इसलिए विकसित भारत के लिए वीबी जीरामजी को लाया गया है.

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ठळक मुद्देलखनऊ में वीबी-जीरामजी के कार्यक्रम के बाद भाजपा और सपा के तेवर हुए  तीखे.यूपी में भाजपा के सांसद, मंत्री, विधायक वीबी-जीरामजी के फायदे जनता को बताएंगे.सपा के सांसद, विधायक भी गांवों में वीबी-जीरामजी की खामियों और मनरेगा के फायदे बताने जाएंगे.

लखनऊः केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू मंगलवार को लखनऊ में थे. यहां वह मनरेगा में फेरबदल कर बनी योजना वीबी-जीरामजी (विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) की जानकारी देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे. इस कार्यक्रम में उन्होने दावा किया किया कि मनरेगा में 11 लाख करोड़ खर्च होने के बाद भी ग्रामीण इलाकों में विकास नहीं हुआ. मनरेगा योजना रोजगार नहीं, लूट की गारंटी थी. इसलिए विकसित भारत के लिए वीबी जीरामजी को लाया गया है.

लोगों तक योजना का लाभ बताने के लिए सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जनता के बीच जाएगी. मंत्री के इस ऐलान के कुछ देर बाद ही समाजवादी पार्टी (सपा) उदयवीर सिंह ने यह दावा किया, सपा भी अब जनता के बीच गावों के विकास को लेकर योगी और केंद्र सरकार के झूठ का पर्दाफाश करेगी. लोगों को बताएंगी कि सूबे की सरकार ने गांवों के विकास योजनाओं का 22.27 प्रतिशत बजट अभी तक खर्च नहीं किया है और ग्रामीणों के हितैषी बनाने ठोंग किया जा रहा है.

सपा का सवाल, बजट खर्च करने में सुस्ती क्यों

उदयवीर सिंह और पार्टी के प्रधान प्रवक्ता राजेन्द्र सिंह ने मीडिया को गांवों के विकास की योजनाओं में अभी तक खर्च नहीं किए जा सके बजट को लेकर आंकड़े भी बताए. सपा के इन दोनों नेताओं के अनुसार, प्रदेश में गांवों के विकास को लेकर योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्राम्य विकास विभाग के लिए कुल 24304.31 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया था.

इसमें से योजनाओं के लिए 22759.99 करोड़ रुपए का प्रावधान था. गत 15 दिसंबर तक विभाग ने योजनाओं के लिए प्रावधानित बजट के मुकाबले केवल 35.98 प्रतिशत यानी 8189.27 करोड़ रुपए की ही स्वीकृति जारी की. इसमें से भी 5069.60 करोड़ रुपए ही खर्च किए जा सके, जो कि योजनाओं के लिए प्राविधानित कुल बजट का केवल 22.27 प्रतिशत ही बैठता है.

सरकार के गांवों के विकास का प्रेम इससे जाहिर होता है. यह भी साबित होता है कि प्रदेश सरकार महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए भी बजट खर्च के मामले में कितनी सुस्ती बरती है. इन नेताओं के यह बताया कि प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में तो एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया.

इसी प्रकार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में 0.4 प्रतिशत और मुख्यमंत्री आवास योजना में 15.8 प्रतिशत बजट खर्च किया गया. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा में खर्च सबसे अधिक 35.09 प्रतिशत धनराशि खर्च की गई. गांवों के विकास के लिए ये योजनाएं बेहद ही महत्वपूर्ण हैं, फिर भी इनमें धन खर्च करने में सुस्ती बरती गई.

अब यहीं बात सपा जनता को बताएगी. यही बताया जाएगा कि मनरेगा योजना किस तरह से वीबी-जीरामजी से बेहतर है और किस तरह से वीबी-जीरामजी बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुँचने के लिए लायी गई है. यह दावा करने वाले उदयवीर कहते हैं प्रदेश सरकार को  यह बताना चाहिए कि वह गांवों के विकास को लेकर ग्राम्य विकास विभाग के बजट को खर्च करने में सुस्ती क्यों दिखा रही है.

यूपी में सपा और भाजपा का सियासी संघर्ष होगा तेज

सपा के इस ऐलान के बाद अब यह साफ हो गया है कि यूपी के गांवों में मनरेगा और वीबी-जीरामजी योजना को लेकर योगी सरकार और सपा के बीच सियासी संघर्ष तेज होगा. क्योंकि एक तरह जहां योगी सरकार के मंत्री और एनडीए के सांसद तथा विधायक जनता को यह बताएंगे कि मनरेगा में भ्रष्टाचार होता था. जबकि वीबी-जीरामजी में भ्रष्टाचार के सभी रास्तों को बंद किया गया है.

इसमें सब कुछ डिजिटल कर दिया है. इस योजना के हर प्रोजेक्ट की डिजिटल मॉनिटरिंग होगी और इस योजना से यूपी में जो बदलाव आने वाला है वह सबसे बड़ा है. वही सपा का हर नेता जनता को यह बताएगा कि इस योजना की गति भी वही होगी जो प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की हो रही है.

इन योजनाओं में समय से पैसा नहीं पहुंचता. इस कारण से इसका लाभ समय से ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है. ऐसा ही कुछ वीबी-जीरामजी योजना के साथ भी होगा. इसलिए भाजपा की इस योजना से ग्रामीण सावधान हो जाए, यह योजना भी उन्हे नुकसान पहुंचाएगी. जाहिर है कि सपा का यह प्रचार भाजपा के साथ उनके सियासी संघर्ष में तेजी लाएगी. राजनीति के जानकारों का यह कहना है. 

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