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Jammu and Kashmir: पाक गोलाबारी से तबाह हुए सीमावर्ती गांवों में शादियों और उत्सवों के साथ शांति का जश्न

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: October 2, 2025 15:47 IST

सीमावासियों ने बताया कि तब से, जीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है क्योंकि बंदूकें शांत हो गई हैं। लोग क्षतिग्रस्त बस्तियों का पुनर्निर्माण कर रहे हैं।

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जम्मू: बाइस अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाक गोलाबारी में भारी नुकसान झेलने के महीनों बाद, एलओसी और अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगे गांवों में जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है। इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। गौरतलब है कि भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी शिविरों को नष्ट करने के बाद, पड़ोसी देश ने सीमावर्ती इलाकों में नागरिकों पर भारी गोलाबारी की, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ। चार दिनों की झड़पों के बाद, पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक ने भारत में अपने समकक्ष से संपर्क किया और शत्रुता समाप्त करने का अनुरोध किया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच युद्धविराम हुआ।

सीमावासियों ने बताया कि तब से, जीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है क्योंकि बंदूकें शांत हो गई हैं। लोग क्षतिग्रस्त बस्तियों का पुनर्निर्माण कर रहे हैं। सीमावास स्थायी शांति के लिए ईमानदारी से प्रार्थना करते हैं ताकि उनके समुदाय वर्षों के संघर्ष व कठिनाई के बाद विकसित, समृद्ध व बिना किसी भय के रह सकें। उत्तरी कश्मीर के केरन, मच्छेल, बंगस, टंगधार, गुरेज और उड़ी सहित कई गांवों में एक बार फिर स्थानीय घरों में ही विवाह समारोह हो रहे हैं, बजाय इसके कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए, जैसा कि पहले होता था। खेती, स्कूली शिक्षा, विवाह और खेल गतिविधियां सामान्य रूप से और बिना किसी भय के चल रही हैं।

गुरेज निवासी रजिया बेगम, जिनकी हाल ही में शादी हुई है, कहती थीं कि परिवार अब अपने पैतृक गांवों में शादियां आयोजित करने में सक्षम हैं। वे कहती थीं कि एक समय था जब सीमा पार से गोलाबारी के कारण हम कई दिनों तक घर के अंदर रहते थे। अब, लोग बड़ी संख्या में शादियों में शामिल होते हैं। जबकि उड़ी की फराह जान, जिनकी भी हाल ही में शादी हुई है, ने बताया कि पहले लगातार संघर्ष विराम उल्लंघन ने सीमा पर जीवन को अनिश्चित बना दिया था करनाह में, शाहबाज अहमद के बकौल, हाल ही में कई शादियां पूरी सामुदायिक भागीदारी के साथ आयोजित की गई हैं।

उन्होंने बताया कि हम उन लोगों को याद करते हैं जिन्होंने अतीत में अपनी जान गंवाई थी, पर अब माहौल बदल गया है। लोग एक बार फिर एकजुट हो रहे हैं। मच्छेल की मेहरीन अख्तर ने याद करते हुए बताया कि कैसे अतीत में कुछ शादियां गोलाबारी के कारण बाधित हुई थीं या शोक में बदल गई थीं। वे कहती थीं कि अब हम गांवों में उचित व्यवस्था के साथ शादियां देख रहे हैं। मेहमान बिना किसी हिचकिचाहट के शामिल हो रहे हैं।

इसी तरह गुरेज में, जुनैद लोन बताते थे कि लंबे अंतराल के बाद विवाह, सगाई और अन्य सामुदायिक समारोह जैसे सामाजिक समारोह फिर से शुरू हो गए हैं। वे कहते थे कि सामान्य दिनचर्या लौट आई है। लोग उस निरंतर भय के बिना जी रहे हैं जो पहले हमारे जीवन पर हावी रहता था। ठीक इसी प्रकार टंगधार के एक किसान सज्जाद मीर ने बताया कि खेती-बाड़ी का काम बिना किसी रुकावट के चल रहा है। उन्होंने बताया कि हम हमेशा की तरह अपने खेतों में काम कर रहे हैं और यह मौसम खेती के लिए सुचारू रहा है।

गुरेज में, स्थानीय युवाओं के साथ क्रिकेट खेलने वाले 17 वर्षीय आदिल लोन के शब्दों में खेल गतिविधियां उनकी दिनचर्या का एक नियमित हिस्सा बन गई हैं। लोन कहते थे कि हम फिर से स्थानीय मैच और टूर्नामेंट आयोजित कर रहे हैं। हर कोई सक्रिय रूप से भाग ले रहा है, और लोगों का उत्साह वापस लौट आया है। हाल ही में, सरकार ने एक बड़ी राहत पहल की घोषणा की है जिसके तहत इस साल की शुरुआत में पाकिस्तानी गोलाबारी में क्षतिग्रस्त हुए घरों वाले परिवारों को 1,500 मुफ्त स्मार्ट घर दिए जाएंगे। पुंछ के स्थानीय लोगों का कहना था कि इस पहल से पाक गोलाबारी से सबसे ज्यादा प्रभावित परिवारों को काफी फायदा होगा। पुंछ निवासी अब्दुल राशिद खान ने बताया कि हमें उम्मीद है कि निर्माण प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू होगी ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सके और उनके जीवन में स्थिरता लौट सके।

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