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भारत ने पाकिस्तान सरकार के सामने रखी शर्त, कहा- 'सिंधु जल संधि में अब संशोधन की जरूरत'

By आकाश चौरसिया | Updated: September 18, 2024 13:57 IST

Indus Waters Treaty: बीती अगस्त को सिंधु जल संधि पर भारत सरकार की ओर से नोटिस जारी की गई थी, जिसे लेकर अब भारत सरकार ने पाकिस्तान के रवैया को निराशाजनक करार दिया। इसके साथ ही 3 मांग भी कर दी है।

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ठळक मुद्देIndus Waters Treaty: पाकिस्तान के लचर रवैया से भारत परेशान Indus Waters Treaty: भारत सरकार ने कहा अब निकलना चाहिए समाधानIndus Waters Treaty: क्योंकि अब सिंधु जल संधि में संशोधन की जरूरत

Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत सरकार ने अपनी आपत्ति जाहिर की है। साथ में ये भी कहा गया है कि जिस तरह से इस पर विचार किया जा रहा है वो निराशाजनक है। हालांकि, भारत की ओर से बीती 30 अगस्त, 2024 को इसके रिव्यू और मॉडिफिकेशन को लेकर एक नोटिस जारी की गई थी। अगर इसके प्रावधानों को भी देखेंगे तो पाएंगे कि आर्टिकल 12 के तीसरे पार्ट में कहा गया है कि कमियों को दूर करते हुए और दोनों देशों की साझा सहमति पर इसे समय-समय पर संशोधित करना चाहिए। 

सिंधु जल संधि, 1960 को लेकर कहा कि अब बड़े बदलावों की जरूरत है, जिसे कवर करने के लिए पाकिस्तान को अब अपना रुख साफ करना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, भारत की ओर से आधआरभूत और अप्रत्याशित दिखने वाले बदलावों के बारे में जिक्र किया है। इसके साथ ही इन 3 मांगों को लेकर भी सरकार मुखर हुई और कहा कि इसमें ज्यादा समय नहीं लगने की जरूरत है।

पहली कि बढ़ती जनसंख्या के ग्राफ के साथ खेती के लिए जरूरतें और पानी की भी पूर्ति भी उसी हिसाब से करने को कहा है। दूसरा बिंदु पर साफ किया कि जिस तरह से भारत को क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में प्रगति चाहिए, उस तरह से भारत विकास नहीं कर पा रहा है, इसका भी हल पानी के जरिए ही निकल सकता है। तीसरे को रेखांकित करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में लगातार सीमा पार आतंकवाद के प्रभाव को रेखांकित करता है जिसने संधि के सुचारू संचालन में बाधा डाली है और भारत के अधिकारों के पूर्ण उपयोग को कमजोर कर दिया है।

रतले और किशनगंगा जलविद्युत परियोजनाओं विवाद..ये घटनाक्रम रतले और किशनगंगा जलविद्युत परियोजनाओं के संचालन पर लंबे समय से चल रहे विवाद के मद्देनजर सामने आए हैं। भारतीय अधिकारियों का मानना ​​है कि पाकिस्तान भारतीय पक्ष की सभी परियोजनाओं में अनिवार्य रूप से बाधा डाल रहा है और उसने सिंधु जल संधि के तहत भारत की उदारता का अनुचित लाभ उठाया है। स्थिति और भी जटिल हो गई है क्योंकि विश्व बैंक ने सभी तर्कों को खारिज करते हुए तटस्थ विशेषज्ञ तंत्र और मध्यस्थता न्यायालय दोनों को एक साथ सक्रिय कर दिया है। यह भी पता चला है कि अपने नवीनतम बातचीत में, भारत सरकार ने कहा है कि संधि के विवाद समाधान तंत्र पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

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