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सेना की खुफिया जानकारियां अब नहीं होंगी लीक, 'माया ऑपरेटिंग सिस्टम' से मजबूत की जाएगी साइबर सिक्योरिटी

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: August 9, 2023 13:53 IST

रक्षा मंत्रालय के कंप्यूटर्स में अब माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम काी जगह 'माया ऑपरेटिंग सिस्टम' का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका परीक्षण शुरू हो गया है और मंत्रालय के कुछ कंप्यूटरों में 15 अगस्त तक माया ओएस स्थापित हो जाएगा।

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ठळक मुद्देमिसाइल और तोप से ज्यादा खतरा दुश्मन की तरफ से किए जाने वाले साइबर हमलों से हैभारत के रक्षा मंत्रालय ने एक अहम निर्णय लिया हैमाइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम काी जगह 'माया ऑपरेटिंग सिस्टम' का इस्तेमाल किया जाएगा

नई दिल्ली: मौजूदा दौर में युद्ध के तौर तरीके बदल रहे हैं। अब दुश्मन देश की मिसाइल और तोप से ज्यादा खतरा उसकी तरफ से किए जाने वाले साइबर हमलों से है। इसे देखते हुए भारत के रक्षा मंत्रालय ने एक अहम निर्णय लिया है। अब रक्षा मंत्रालय के कंप्यूटर सिस्टम को हैक करना किसी भी हैकर के लिए समुद्र तैर कर पार करने के बराबर होगा। दरअसल रक्षा मंत्रालय के कंप्यूटर्स में अब माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम काी जगह 'माया ऑपरेटिंग सिस्टम' का इस्तेमाल किया जाएगा। 

'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के रक्षा मंत्रालय ने माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम को हटाने और माया ऑपरेटिंग सिस्टम नाम से एक स्थानीय ऑपरेटिंग सिस्टम अपनाने का फैसला किया है। इसका परीक्षण शुरू हो गया है और मंत्रालय के कुछ कंप्यूटरों में 15 अगस्त तक माया ओएस स्थापित हो जाएगा।

मंत्रालय का मानना ​​है कि ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म पर आधारित नया ऑपरेटिंग सिस्टम साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देगा। माया ओएस को एक सरकारी एजेंसी द्वारा छह महीने में विकसित किया गया था। इसमें 'एंडपॉइंट डिटेक्शन और सुरक्षा' के लिए अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएं हैं। मंत्रालय सभी सिस्टमों पर माया को स्थापित करना चाहता है। 

बता दें कि भारतीय नौसेना ने भी अपने सिस्टम में माया ओएस स्थापित करने का निर्णय लिया है जबकि सेना और वायु सेना इसका मूल्यांकन कर रही हैं। साइबर युद्ध की क्षमता और साइबर हमलों, जासूसी और डेटा चोरी की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सेना ने अप्रैल में सभी छह परिचालन कमांडों में समर्पित इंटरनेट नेटवर्क बढ़ाने के लिए कदम उठाए।

बता दें कि सिर्फ 'ऑपरेटिंग सिस्टम' ही नहीं बल्कि भारतीय सेना दुनिया भर में तेजी से बदल रहे परिदृश्य और युद्ध के नए तौर-तरीकों को देखते हुए अपनी साइबर और अंतरिक्ष युद्ध क्षमताओं को और अधिक विस्तारित और उन्नत करने पर भी विचार कर रही है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने साइबर और अंतरिक्ष युद्ध के खतरों से निपटने के साथ-साथ इस क्षेत्र में भारत की आक्रामक क्षमताओं को तैयार करने के लिए पांच साल पहले रक्षा साइबर एजेंसी और स्पेस साइबर एजेंसी सहित दो एजेंसियों के निर्माण को मंजूरी दी थी। 

इसी साल मई में रक्षा साइबर एजेंसी ने साइबर सुरक्षा अभ्यास आयोजित किया था जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा की विभिन्न शाखाओं की भागीदारी शामिल थी। इसका फोकस देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए सेवा में फ़ायरवॉल की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना था।

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