लाइव न्यूज़ :

अंतरराष्ट्रीय जंग का नया अखाड़ा बन गया है ईरान

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 15, 2026 07:56 IST

अब जनता ने विद्रोह कर दिया है. लेकिन हम जैसे ही विद्रोहियों के प्रति सद्भावना के बारे में सोचें तो यह खयाल भी आता है कि क्या इस सबके पीछे वाकई अमेरिका का हाथ है?

Open in App

किसी भी विषय पर अमूमन हमारी राय स्पष्ट होती है. या तो हम विरोध में होते हैं या फिर समर्थन में. हालांकि कुछ मामलों में तटस्थ बने रहना भी बेहतर होता है मगर ईरान एक ऐसा मसला है जहां कुछ भी तय कर पाना मुश्किल है. खासकर भारत जैसे देश के लिए! चाहे रजा शाह पहलवी का जमाना हो, खुमैनी की सल्तनत हो या फिर खामनेई की, भारत से रिश्ते अच्छे रहे हैं.

जनता के स्तर पर भी भारत और ईरान के लोग एक-दूसरे से मोहब्बत करते हैं लेकिन मौजूदा दौर में हम भारतीयों के लिए यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि हम किसके साथ हैं. एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक के बतौर हमें आजाद खयाल ईरानियों के साथ होना चाहिए. खामनेई ने वाकई ईरानी जनता के अधिकार छीन रखे हैं और विरोध करने वालों पर बेइंतहा जुल्म ढाए जाते रहे हैं. अब जनता ने विद्रोह कर दिया है. लेकिन हम जैसे ही विद्रोहियों के प्रति सद्भावना के बारे में सोचें तो यह खयाल भी आता है कि क्या इस सबके पीछे वाकई अमेरिका का हाथ है?

खामनेई की सत्ता चली जाएगी और रेजा पहलवी के कब्जे में सत्ता होगी तो नए संदर्भों में क्या वे भारत के साथ वही मधुर रिश्ते रखेंगे जो अभी हैं या फिर भारत-ईरान संबंध भी अमेरिका ही तय करेगा? यदि खामनेई की सत्ता चली जाती है तोे वहां के लोगों के लिए तो वाकई प्रतिबंधों से आजादी का दिन होगा लेकिन ईरान की हालत क्या हो जाएगी?

खामनेई ने हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों का जो पालन पोषण किया है, वे चुपचाप बैठे रहेंगे? ईरान की भौगोलिक संरचना ऐसी है कि अमेरिकी फौज चाह कर भी पूरे देश पर नियंत्रण नहीं कर सकती. अमेरिका भी अफगानिस्तान जैसा हश्र नहीं चाहेगा. अभी ट्रम्प ने ईरानी प्रदर्शनकारियों को संदेश दिया है कि संघर्ष करते रहें, संस्थानों पर कब्जा करें, मदद रास्ते में है.

अब इस मदद का क्या मतलब है? क्या अमेरिकी फौज वहां पहुंचेगी? ऐसा आसान नहीं है क्योंकि चीन ने साफ कह दिया है कि किसी देश के आंतरिक मामले में विदेशी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.

रूस तो ईरान के साथ है. चीन और रूस का ईरान में मौजूद रहना जरूरी है क्योंकि दोनों देशों के हित वहां जुड़े हुए हैं. अमेरिका चाहेगा कि वह पाकिस्तान के माध्यम से वहां हस्तक्षेप करे, इसीलिए उसने मुनीर को अपनी गोद में बिठा रखा है लेकिन यह भी आसान नहीं होगा.

यानी पूरे मसले में इतने पेंच हैं कि यह कहना मुश्किल है कि ईरान में आखिर होने क्या जा रहा है? लेकिन इतना तय है कि ईरान इस वक्त अंतरराष्ट्रीय जंग का अखाड़ा बनता जा रहा है. सत्ता बदल भी जाती है तो चीन और रूस चुपचाप नहीं बैठेंगे. हमें जरूर इस बात पर नजर रखनी होगी कि हमारी भूमिका वहां क्या होती है और हम अपने हितों की रक्षा कैसे करते हैं?

न हम अमेरिका पर भरोसा कर सकते हैं, न चीन पर भरोसा कर सकते हैं. हमारे लिए भरोसे का साथी केवल रूस है लेकिन अभी कहना मुश्किल है कि वह अमेरिका के अश्वमेध के घोड़े को कब और कहां रोकता है! रोकता भी है या नहीं रोकता है! स्थिति वाकई विकट है.

टॅग्स :ईरानअमेरिकाडोनाल्ड ट्रंप
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारअमेरिका को भारत की जरूरत ज्यादा है?

भारतIran Protest: 2570 लोगों की मौत?, ईरान छोड़ दो, अमेरिकी हमले खतरे के बीच भारत ने नागरिक को दी सलाह

विश्वग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण से कम कुछ भी स्वीकार नहीं?, ट्रंप ने कहा-‘गोल्डन डोम’ मिसाइल ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’, ग्रीनलैंड वासी बोले- क्षेत्र बिकाऊ नहीं

क्रिकेटICC U19 Men’s Cricket World Cup: भारत ने 2000, 2008, 2012, 2018 और 2022 में ट्रॉफी जीती, 5 बार विजेता टीम को छठे खिताब की तलाश?, जानें कब और कहां देखें लाइव

विश्वIran Protests: ईरान में हिंसक प्रदर्शन में मौतों का सिलसिला जारी, अब तक 2571 लोगों की मौत

विश्व अधिक खबरें

विश्वलाजरस द्वीप के पास ‘काफी नशे में’ थे जुबिन गर्ग?, लाइफ जैकेट पहनने से कर दिया था मना, सिंगापुर की अदालत को बताया गया

विश्वThailand Train Accident: थाईलैंड में दर्दनाक ट्रेन हादसा, कंस्ट्रक्शन क्रेन के गिरने से कई यात्रियों की मौत; अन्य घायल

विश्वIran Protests: ईरान में मुफ्त इंटरनेट सेवा बंद, पूरी दुनिया से काटे तार

विश्वसरकार के विरोध प्रदर्शनकारियों को फांसी की सजा, ट्रंप की धमकी के बीच ईरान में आज सरेआम दी जा सकती है फांसी

विश्वडरने का नहीं, मजबूत होने का वक्त!