लाइव न्यूज़ :

वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: कोरोना से जंग में भारत आखिर क्यों चूक गया?

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: April 29, 2021 13:01 IST

भारत कोरोना की पहली लहर से बहुत हद तक सुरक्षित बच निकला था लेकिन दूसरी लहर में सबकुछ बिखर गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस महामारी से जंग में कहां गलती हो गई।

Open in App

यह संतोष का विषय है कि भारत में कोरोना मरीजों के लिए नए-नए तात्कालिक अस्पताल दनादन खुल रहे हैं, ऑक्सीजन एक्सप्रेस रेलें चल पड़ी हैं, कई राज्यों ने मुफ्त टीके की घोषणा कर दी है. कुछ राज्यों में कोरोना का प्रकोप घटा भी है. 

ज्यादातर शहरों और गांवों में कुछ उदार सज्जनों ने जन-सेवा के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है. कोरोना का डर इतना फैल गया है कि लोगों ने अपने घरों से निकलना बंद कर दिया है. जहां-जहां तालाबंदी और कर्फ्यू नहीं लगा हुआ है, वहां भी बाजार और सड़कें सुनसान दिखाई दे रही हैं. 

लोगों के दिल में डर बैठ गया है. कुछ लोगों का कहना है कि मरनेवालों की संख्या जितनी है, उसे घटाकर लगभग एक-चौथाई ही बताया जा रहा है ताकि लोगों में हड़कंप न मच जाए. यह आशंका कितनी सच है, पता नहीं लेकिन श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों के दृश्य देख-देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

असलियत तो यह है कि देश के कोने-कोने में इतने लोग संक्रमित हो रहे हैं और मर रहे हैं कि बहुत कम ऐसे लोग बचे होंगे जिनके मित्र और रिश्तेदार इस विभीषिका का शिकार नहीं हुए होंगे. मौत का डर लगभग हर इंसान को सता रहा है. 

नेताओं की भी सिट्टी-पिट्टी गुम है, क्योंकि वे अपने चहेतों के लिए चिकित्सा और पलंगों का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं और डर के मारे घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं. जो विपक्ष में हैं, वे सत्तारूढ़ नेताओं की टांग-खिंचाई से बिल्कुल नहीं चूक रहे. 

उनसे आप पूछें कि इस संकट के दौर में आपने जनता के भले के लिए क्या किया तो वे बगलें झांकने लगते हैं. देश के बड़े-बड़े सेठ लोग अपने खजानों पर अब भी कुंडली मारे बैठे हुए हैं. वे देख रहे हैं कि मरनेवालों को चिता या कब्र में खाली हाथ लिटा दिया जाता है लेकिन अभी भी सांसारिकता से उनका मोह-भंग नहीं हुआ है. 

कई घरों के बुजुर्ग कोरोना-पीड़ित हैं, लेकिन उनके जवान बेटे, बेटियां और बहू भी उनके नजदीक तक जाने में डर रहे हैं. कई अस्पताल मरीजों को चूसने से बाज नहीं आ रहे हैं. नकली इंजेक्शन और नुस्खे पकड़े जा रहे हैं. कई नेताओं ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए हैं या बदल लिए हैं ताकि लोग उन्हें मदद के लिए मजबूर न करें. 

अभी तक ऐसे किसी आदमी को दंडित नहीं किया गया है, जो कोरोना की दवाइयों, इंजेक्शनों और ऑक्सीजन यंत्रों की कालाबाजारी कर रहा हो. इस महामारी ने सिद्ध किया है कि भारत के नेता और जनता, दोनों ही जरूरत से ज्यादा भोले हैं. 

दोनों अपनी लापरवाही की सजा भुगत रहे हैं. दुनिया के हर प्रमुख राष्ट्र ने महामारी के दूसरे दौर से मुकाबले की तैयारी की है लेकिन भारत पता नहीं क्यों चूक गया?

टॅग्स :कोरोना वायरसकोविड-19 इंडियाकोरोना वायरस इंडिया
Open in App

संबंधित खबरें

स्वास्थ्यकौन हैं डॉ. आरती किनिकर?, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में खास उपलब्धि के लिए लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026 पुरस्कार

स्वास्थ्यLMOTY 2026: हजारों मरीजों के लिए आशा की किरण?, डॉ. गौतम भंसाली को 'लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026' पुरस्कार

स्वास्थ्यCOVID-19 infection: रक्त वाहिकाओं 5 साल तक बूढ़ी हो सकती हैं?, रिसर्च में खुलासा, 16 देशों के 2400 लोगों पर अध्ययन

भारत'बादल बम' के बाद अब 'वाटर बम': लेह में बादल फटने से लेकर कोविड वायरस तक चीन पर शंका, अब ब्रह्मपुत्र पर बांध क्या नया हथियार?

स्वास्थ्यसीएम सिद्धरमैया बोले-हृदयाघात से मौतें कोविड टीकाकरण, कर्नाटक विशेषज्ञ पैनल ने कहा-कोई संबंध नहीं, बकवास बात

भारत अधिक खबरें

भारतपेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का दावा फर्जी? सरकार ने दिया जवाब, जानें क्या कहा

भारतWest Bengal Assembly Elections 2026: जब तक लोग शांतिपूर्वक मतदान नहीं कर लेते, हम नहीं जाएंगे?, टीएमसी-हुमायूं कबीर के बीच झड़प, कई गाड़ी के शीशे टूटे, वीडियो

भारतTamil Nadu Assembly Eelection 2026: सीएम स्टालिन, एक्टर विजय समेत कई नेताओं और अभिनेताओं ने डाला वोट, देखें तस्वीरें

भारतBaramati Assembly bye-elections 2026: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने डाला अपना वोट, बारामती की जनता से की वोटिंग की अपील, देखें तस्वीरें

भारतAssembly Elections 2026: तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आज वोटिंग, पीएम मोदी ने जनता से की मतदान की अपील