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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: भारत के लिए दो अपूर्व वैश्विक अवसर

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: November 15, 2022 13:39 IST

जी-20 इस वर्ष यदि पर्यावरण शुद्धि, परमाणु निरस्त्रीकरण, आर्थिक पुनरोदय आदि विश्वव्यापी मुद्दों पर कुछ ठोस फैसले कर सके तो भारत की अध्यक्षता ऐतिहासिक सिद्ध हो जाएगी।

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ठळक मुद्देअमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इंडोनेशिया पहुंच चुके हैं और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलनेवाले भी हैं। वे पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिका की चीन से कोई दुश्मनी नहीं है।उसके साथ वे सार्थक संवाद जारी रखेंगे।

यह सप्ताह दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के नाम है। एक कंबोडिया के नोम पेन्ह में हो चुका है और दूसरा इंडोनेशिया के शहर बाली में होने वाला है। पहले सम्मेलन में 'आसियान' संगठन के सदस्य-राष्ट्रों का 17वां शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ और अब बाली में 20 राष्ट्रों के 'ग्रुप-20' संगठन का शिखर सम्मेलन हो रहा है। पहले सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया और अब बाली के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद जा रहे हैं। दोनों सम्मेलनों में विदेश मंत्री जयशंकर की भी भागीदारी है और वे शिखर-वार्ता के लिए जमीनी तैयारी कर रहे हैं। 

पहले सम्मेलन में अमेरिका से प्रभावित पूर्व एशियाई राष्ट्रों ने चीनी विस्तारवाद के विरुद्ध अपनी चिंता पर सबसे ज्यादा जोर दिया। लेकिन अब जो सम्मेलन बाली में हो रहा है, उसका स्वर न तो चीन-विरोधी हो सकता है और न ही रूस-विरोधी! क्योंकि ये दोनों राष्ट्र जी-20 के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इंडोनेशिया पहुंच चुके हैं और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलनेवाले भी हैं। 

वे पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिका की चीन से कोई दुश्मनी नहीं है। उसके साथ वे सार्थक संवाद जारी रखेंगे। लेकिन यूक्रेन के मसले पर अमेरिका और उसके कई साथी राष्ट्र रूस की भर्त्सना किए बिना नहीं रहेंगे। इस शिखर सम्मेलन के संयुक्त वक्तव्य को लेकर कई देशों के कूटनीतिज्ञ अपना दिमाग भिड़ाए हुए हैं। 

इस मुद्दे पर भारत को अपने कदम फूंक-फूंककर रखने होंगे, क्योंकि इस नए वर्ष में भारत ही इस विशाल संगठन का अध्यक्ष रहनेवाला है। उसकी विदेश नीति अभी तक बहुत ही संतुलित और व्यावहारिक रही है। जी-20 इस वर्ष यदि पर्यावरण शुद्धि, परमाणु निरस्त्रीकरण, आर्थिक पुनरोदय आदि विश्वव्यापी मुद्दों पर कुछ ठोस फैसले कर सके तो भारत की अध्यक्षता ऐतिहासिक सिद्ध हो जाएगी।

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