बढ़ती महंगाई, घटती विकास दर की चुनौती

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: May 16, 2026 07:50 IST2026-05-16T07:48:47+5:302026-05-16T07:50:31+5:30

इसी परिप्रेक्ष्य में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली के दौरान वैश्विक ऊर्जा संकट के मद्देनजर देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और गैस के संयम से इस्तेमाल की अपील की है.  

Rising inflation and declining growth challenges | बढ़ती महंगाई, घटती विकास दर की चुनौती

बढ़ती महंगाई, घटती विकास दर की चुनौती

जयंतीलाल भंडारी

इन दिनों पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक भूराजनीतिक चुनौतियों के बीच देश में महंगाई बढ़ने और विकास दर में कमी आने की चुनौती उभरकर दिखाई दे रही है. 15 मई को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपए की वृद्धि की गई है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में अप्रैल 2026 में थोक महंगाई बढ़कर 8.3 प्रतिशत और खुदरा महंगाई बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई है.

इसी तरह महंगाई से संबंधित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी भारत में महंगाई बढ़ने के विश्लेषण प्रस्तुत किए जा रहे हैं. इस बढ़ती हुई महंगाई से जहां आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन में मुश्किलें बढ़ रही हैं, वहीं अर्थव्यवस्था के विकास की गति धीमी हुई है. इसी परिप्रेक्ष्य में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली के दौरान वैश्विक ऊर्जा संकट के मद्देनजर देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और गैस के संयम से इस्तेमाल की अपील की है.  

यह बात महत्वपूर्ण है कि घटती हुई विकास दर के बीच भी भारत की कई आर्थिक अनुकूलताएं दिखाई दे रही हैं. भारत लगातार व्यापार समझौतों के माध्यम से निर्यात बढ़ाने के प्रयास कर रहा है. भारत में राजनीतिक स्थिरता के परिदृश्य से भारत पर दुनिया का आर्थिक भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में अब भारत में देशी-विदेशी निवेश बढ़ने के साथ विदेश व्यापार और सेवा निर्यात का ग्राफ भी बढ़ते हुए दिखाई दे सकेगा.

इस समय भारत के द्वारा विकास दर घटने की चुनौती का सामना करने के लिए एफटीए और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों का अधिकतम लाभ उठाने की जरूरत है. इसके मद्देनजर निर्यातकों को कम या शून्य लाभ देने के साथ प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण जैसी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा. इससे निर्यात के नए बाजारों में दस्तक देने की संभावनाएं भी तेज होंगी.

निश्चित रूप से पश्चिम एशिया संकट के बीच इस समय जब भारत की विकास दर घटते हुए दिखाई दे रही है, तब अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए हमें बहुआयामी दृष्टिकोण के साथ कई बातों पर ध्यान देना होगा. अब अल्पकालिक वृद्धि के पीछे भागने के बजाय, भारत को मध्यम अवधि की राजकोषीय और बाह्य स्थिरता को सुरक्षित रखना होगा. लंबे समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाना होगा.

अब भारत का ध्यान सेवाओं की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर होना चाहिए. एआई जैसे उच्च-स्तरीय क्षेत्रों में निवेश, मजबूत डिजिटल अधोसंरचना, और नियामक बाधाओं को बहुपक्षीय प्रयासों के माध्यम से आसान बनाना होगा, जो सीमाओं के पार सेवा निर्यात को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकें.

इस बात की ओर भी ध्यान देना होगा कि भारत का जो निर्यात कुछ ही बाजारों और कुछ ही देशों तक सीमित है, उसे अधिक वस्तुओं और विभिन्न अधिक देशों तक विस्तारित किया जाए. इन सबके साथ-साथ बुनियादी ढांचा, निवेश अनुकूल वातावरण, नवीकरणीय ऊर्जा आदि को ध्यान में रखकर भारत दुनिया का और अधिक आर्थिक भरोसा बढ़ा सकेगा.

Web Title: Rising inflation and declining growth challenges

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