मध्यप्रदेश के खरगोन जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने ये कहावत याद दिला दी है कि कानून के हाथ वाकई बहुत लंबे होते हैं. मामला कुछ ऐसा है कि 45 साल पहले बालसमुंद के काकड़ इलाके में सलीम नाम के व्यक्ति पर आरोप लगा कि उसने एक खेत से करीब 100 रुपए मूल्य के गेहूं चुरा लिए. उस समय 100 रुपए की कीमत आज जैसी नहीं थी. वह बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी. इस घटना के बाद सलीम वहां से भाग निकला और धार जिले के बाग कस्बे में उसने किराने की दुकान खोल ली.
वर्षों तक सलीम की तलाश हुई लेकिन वह नहीं मिला. अब करीब 45 साल बाद पुलिस को जानकारी मिली कि सलीम तो बाग कस्बे में है. सलीम भी बेफिक्र रहने लगा था क्योंकि लंबा वक्त गुजर चुका था और उसे लगा कि पुलिस सब कुछ भूल चुकी होगी. मगर यह उसकी भूल थी. सलीम अब पकड़ में है और जेल की हवा खा रहा है. जिस तरह सलीम को लगा कि मामला रफा-दफा हो चुका होगा उसी तरह हर अपराधी को लगता है कि पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहेगा लेकिन ऐसा होता नहीं है.
किसी भी गुनाह को कानून कभी नहीं भूलता. इससे पहले भी कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जब दशकों बाद अपराधी पुलिस की गिरफ्त में आए और कानून ने उन्हें सजा दी. इसीलिए ये कहावत बनी कि कानून के हाथ लंबे होते हैं. अपराधी कोई न कोई ऐसी चूक जरूर करता है जिससे पुलिस उस तक पहुंच जाती है. इसीलिए यह भी कहा जाता है कि कानून का उल्लंघन कभी नहीं करना चाहिए.
गलती करने वाला व्यक्ति कभी न कभी कानून के शिकंजे में जरूर आता है. इसका तात्पर्य यह है कि यदि गलती करेंगे तो सजा जरूर मिलेगी. बेहतर है कि कोई गलती की ही न जाए. यह बात केवल चोरी या मारपीट के मामले में ही नहीं है बल्कि किसी व्यक्ति को ट्रैफिक कानून का भी उल्लंघन नहीं करना चाहिए. यदि हम सब कानून का सम्मान करने वाले नागरिक बन जाएं तो सच मानिए कि हमारी बहुत सी समस्याएं स्वत: ही हल हो जाएंगी. बेहरतीन ईमानदारी के बहुत से उदाहरण अपने देश में ही मौजूद हैं. आप नगालैंड के ग्रामीण क्षेत्रो में जाएंगे तो सड़क किनारे बिकने के लिए सामान रखा नजर आएगा.
वहां कोई दुकानदार नहीं होता. सामान के पास उसकी कीमत लिखी होती है. पैसा रखिए और सामान लेकर जाइए! क्या ऐसी ईमानदारी देश के दूसरे हिस्सों में नहीं बरती जा सकती? बरती जा सकती है लेकिन पहल सबसे पहले हमें खुद से करनी होगी. कानून का पालन करना हमें सीखना होगा.