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'आदिवासी महिला पैतृक संपत्ति में समान हिस्सेदारी की हकदार' : सुप्रीम कोर्ट

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 17, 2025 21:02 IST

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि महिला उत्तराधिकारी को संपत्ति में अधिकार देने से इनकार करने से लैंगिक विभाजन और भेदभाव बढ़ता है, जिसे कानून द्वारा समाप्त किया जाना चाहिए।

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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि आदिवासी महिला या उसके कानूनी उत्तराधिकारी पैतृक संपत्ति में समान हिस्सेदारी के हकदार होंगे। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि महिला उत्तराधिकारी को संपत्ति में अधिकार देने से इनकार करने से लैंगिक विभाजन और भेदभाव बढ़ता है, जिसे कानून द्वारा समाप्त किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘न्याय और समानता के सिद्धांत को लागू करते समय न्यायालयों को उपरोक्त बातों का ध्यान रखना होगा और इस खुले सिद्धांत को प्रासंगिक रूप से लागू करना होगा।’’ 

शीर्ष अदालत ने वर्तमान मामले में कहा कि यदि अधीनस्थ अदालत के विचारों को बरकरार रखा जाता है, तो महिला और उसके उत्तराधिकारी परंपरागत रूप से ऐसी विरासत के लिए सकारात्मक दावे के अभाव के आधार पर संपत्ति के अधिकार से वंचित रह जाएंगे। यह फैसला एक आदिवासी महिला के कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा दायर अपील पर आया। उन्होंने अपने नाना की संपत्ति के बंटवारे की मांग की थी। 

निचली अदालत और प्रथम अपीलीय अदालत ने कानूनी उत्तराधिकारियों की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि उनकी मां का अपने पिता की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं है। निचली अदालत ने फैसले में कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं पेश किया गया जिससे यह साबित हो सके कि महिला उत्तराधिकारी के बच्चे भी संपत्ति के हकदार हैं। 

इनपुट - PTI भाषा

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