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यूपी में लाखों छात्रों को अब तक नहीं मिले स्वेटर-जूते के पैसे, 1,32,886 से अधिक विद्यालयों में पढ़ते हैं 1.5 करोड़ बच्चे

By राजेंद्र कुमार | Updated: December 13, 2025 18:18 IST

आठ साल बाद फिर दिसंबर में  कोहरे और कड़ाके की ठंड में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के दस लाख से अधिक बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से स्वेटर, जूते-मोजे और बैग नहीं मिल पाया है.

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ठळक मुद्देमाता-पिता के खाते में डीबीटी के जरिए 1200 रुपए की धनराशि का ना भेजा जाना. विभाग की इस लापरवाही से सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह शर्मिंदा हैं.नए जूते-मोजे,स्वेटर और बैग खरीदने के लिए 1200 रुपए पहुंच जाएंगे.

लखनऊः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सत्ता पर काबिज होने के बाद परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को बैग, जूते-मोजे, स्वेटर व स्टेशनरी देने की योजना शुरू की थी. इस योजना के शुरू होने के सात माह बाद भी कड़ाके की ठंड में बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते बच्चों को स्वेटर नहीं दिए जा सके तो तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल यह घोषणा की थी कि जब तक सरकारी स्कूलों के बच्चों को स्वेटर नहीं मिल जाते, तब तक वह भी स्वेटर नहीं पहनेंगी. मंत्री के इस ऐलान की आठ साल बाद फिर दिसंबर में  कोहरे और कड़ाके की ठंड में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के दस लाख से अधिक बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से स्वेटर, जूते-मोजे और बैग नहीं मिल पाया है.

इसकी वजह है परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को स्वेटर, जूते-मोजे और बैग मुहैया कराने के लिए उनके माता-पिता के खाते में डीबीटी के जरिए 1200 रुपए की धनराशि का ना भेजा जाना. विभाग की इस लापरवाही से सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह शर्मिंदा हैं.

उनका कहना है कि इस मामले में लापरवाही बरतने के दोषियों को दंड मिलेगा और जल्द ही दस लाख से अधिक बच्चों के माता-पिता के खातों में बच्चों के लिए नए जूते-मोजे,स्वेटर और बैग खरीदने के लिए 1200 रुपए पहुंच जाएंगे.

इस कारण नहीं मिला योजना का लाभ

अब बात करते हैं, सूबे के दस लाख से अधिक बच्चों के खातों में अभी तक पैसा क्यों नहीं पहुंचा? विभाग के अधिकारी इसकी वजह बच्चों के माता -पिता का आधार कार्ड ना बनाना या फिर आधार कार्ड बैंक खाते से लिंक ना होना बता रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि करीब 3.50 लाख बच्चों के अभिभावकों का आधार कार्ड ही नहीं बना है.

करीब 6.50 लाख अभिभावकों का आधार तो बना है लेकिन उसे बैंक खाते से अभी तक लिंक नहीं किया जा सका है. इस नाते ही दस लाख से अधिक बच्चे अभी भी बिना स्वेटर, जूते-मोजे और बैग के,  ठिठुरते हुए क्लास में बैठने को मजबूर हैं. अब जब इनके माता-पिता के बैंक खाते में 1200 रुपए पहुंचेंगे तो उन्हे नया स्वेटर, जूता-मोजा और बैग मिलेगा.

फिलहाल सूबे के बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को यह निर्देश दिया है कि ब्लॉक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) पर कैंप लगाकर स्वेटर, जूता-मोजा और बैग से वंचित बच्चों के माता-पिता का आधार कार्ड बनवाए जाएं और बैंक खातों को आधार से तुरंत लिंक कराया जाए, ताकि जल्द से जल्द उनके खातों में पैसा पहुंच सके.

ताकि कड़ाके की ठंड में कोई भी बच्चा बिना स्वेटर और जूते-मोजे के स्कूल न आए. बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए यह कहा है कि पेंडिंग डाटा का वेरिफिकेशन कर शत-प्रतिशत डीबीटी पूरा किया जाए. विभागीय मंत्री के इस आदेश पर कई जिलों में कैंप तो लगाकर स्वेटर, जूता-मोजा और बैग से वंचित बच्चों के माता-पिता का आधार कार्ड बनाए जाने और आधार कार्ड को बैंक खातों को लिंक करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन यह कार्य सुस्त गति से हो रहा है.

कहा जा रहा है कि अगले साल जनवरी में ही यह कार्य पूरा हो सकेगा. फिलहाल इस मामले में लापरवाही बरतने वाले उन विभागीय अधिकरियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं ही गई, जिनकी सुस्ती के कारण ही दस लाख से अधिक बच्चे कड़ाके की ठंड में भी सरकार की योजना का लाभ नहीं पा सके और वह अभी भी पुरानी फटी यूनिफॉर्म और चप्पलों में आ रहे हैं.

परिषदीय विद्यालयों का सेटअप

यूपी में  1,32,886 से अधिक परिषदीय विद्यालय हैं, इन विद्यालयों में 1.5 करोड़ से अधिक बच्चे पढ़ते हैं. वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार सूबे के प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 1.05 करोड़ और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 43 लाख से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं. परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए स्वेटर, जूता-मोजा और बैग के लिए प्रदेश सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी ) के तहत अभिभावकों के बैंक खाते में 1200 है. सरकार ने लगभग 1000 करोड़ रुपए का बजट स्वेटर, जूते और बैग के लिए आवंटित किया था.

ताकि बच्चों को स्वेटर, जूता-मोजा और बैग उपलब्ध कराने में विलंब ना हो, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से सभी बच्चों को सरकार की योजना का लाभ मिलने में समय लग रहा है. वर्ष 2017 में ऐसा हुआ था और अब आठ साल बाद फिर ऐसा हुआ है.

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