नई दिल्लीः कांग्रेस सहित विपक्ष के कई प्रमुख दलों ने लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयक को पेश किए जाने से एक दिन पहले बुधवार को कहा कि वे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के पक्ष में हैं, लेकिन इस विधेयक के परिसीमन के प्रावधानों का पुरजोर विरोध करेंगे क्योंकि ये ‘खतरनाक’ हैं।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन संबंधी विधेयक पर विस्तार से चर्चा की गई तथा ‘‘सर्वसम्मति से’’ यह फैसला किया गया कि वे परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ एकजुट होकर वोट करेंगे।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का स्पष्ट रूप से समर्थन करती है। संसद ने 2023 में सर्वसम्मति से विधेयक पारित किया था, यह पहले से ही हमारे संविधान का हिस्सा है। सरकार अब जो प्रस्ताव पेश कर रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है।
यह संशोधन परिसीमन और हेरफेर के ज़रिए सत्ता हथियाने का प्रयास है। हम जाति जनगणना के आंकड़ों को नज़रअंदाज़ करके ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों की 'हिस्सा चोरी' बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम दक्षिणी, उत्तर पूर्वी, उत्तर पश्चिमी और छोटे राज्यों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
INDIA ब्लॉक की बैठक पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम सब महिला आरक्षण बिल के पक्ष में हैं। लेकिन जिस तरह से वे इसे लाए हैं, हमें उस पर एतराज़ है। यह पॉलिटिक्स से मोटिवेटेड है। सिर्फ़ विपक्षी दल को दबाने के लिए सरकार ऐसा कर रही है। हालाँकि हमने लगातार महिला आरक्षण बिल का सपोर्ट किया है, हम ज़ोर देते हैं कि पहले के अमेंडमेंट लागू किए जाएं।
वे डिलिमिटेशन को लेकर कुछ चालें चल रहे हैं। हम सभी पार्टियों को पार्लियामेंट में एक साथ लड़ना चाहिए। हम इस बिल का विरोध करेंगे, लेकिन हम (महिलाओं के लिए) रिज़र्वेशन के ख़िलाफ़ नहीं हैं। जिस तरह से उन्होंने बिल में डाला है, चाहे वह डिलिमिटेशन हो, उन्होंने जनगणना भी पास नहीं किया है।
संविधान की सभी शक्तियां कार्यपालिका के पास हैं ज़्यादातर, जो पावर इंस्टीट्यूशन्स, पार्लियामेंट को दी गई है, वह इसलिए है ताकि वे कभी भी डिलिमिटेशन बदल सकें...... वे असम और जम्मू-कशमीर में हमें पहले ही धोखा दे चुके हैं।
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि PDP जैसी पार्टी कैसे इस बिल का समर्थन इस तरह कर सकती है क्योंकि पहले PDP ने इसपर चिंता जताई थी। मुझे लगता है कि उनके लिए इस बिल का इस तरह समर्थन करना बहुत मुश्किल है। शिवसेना(UBT) सांसद संजय राउत ने परिसीमन के मुद्दे पर INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद कहा कि जिस तरह से ये जल्दबाजी में ये बिल ला रहे हैं।
5 राज्यों का चुनाव चल रहा है तो उन्हें (BJP) लग रहा है कि उन राज्यों के सांसद वोटिंग के लिए नहीं आएंगे लेकिन सब वोटिंग के लिए आ रहे हैं। हम एक साथ निर्णय लेंगे और बिल को गिराएंगे। महिला आरक्षण बिल को हमारा समर्थन रहेगा लेकिन उसकी आड़ में जो परिसीमन का खेल चल रहा है वह बहुत खतरनाक है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, "इस चुनाव प्रचार के बीच ये बिल लाया जाता है और बड़े गलत तरीके से महिला आरक्षण और परिसीमन को जोड़ा जाता है और एक ही संविधान संशोधन बिल है जिसमें परिसीमन का प्रावधान है और महिला आरक्षण का प्रावधान हैं ये परिसीमन बड़ा खतरनाक है।
जो बार-बार सरकार की ओर से कहा जा रहा है गृह मंत्री ने कहा है अनेक मंत्रियों ने कहा है कि लोकसभा सीटे 50% ज्यादा बढ़ाया जाएगा और उसके साथ-साथ समानुपातिक तरीके से सभी राज्यों की सीटे लोकसभा में बढ़ाई जाएगी। ये कही इस विधेयक में शामिल नहीं है। सिर्फ लोकसभा का जिक्र किया गया है जो हर एक राज्य की ताकत होती है जो अनुपात है वो इस बिल के आधार पर घटेगा।
कई राज्यों का अनुपात घटेगा...इस परिसीमन में अनुपात नहीं दिखाई दे रहा है जिस तरह परिसीमन आयोग ने असम और जम्मू-कश्मीर में अपना काम किया है ये बिल्कुल साफ हो गया है कि परिसीमन आयोग बीजेपी के हाथ में बहुमत पाने के लिए एक हथियार है...हमारी पार्टियां चाहती है कि एक तिहाई आरक्षण महिलाओं को दिया जाए और 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जाए।
लेकिन हम परिसीमन प्रावधानों के बिल्कुल खिलाफ है हम इसका समर्थन नहीं कर सकते हैं हम चाहते हैं कि महिला आरक्षण लागू हो। हिमाचल प्रदेश के मंत्री चंद्र कुमार ने परिसीमन के मुद्दे पर कहा कि यह जो बिल आने वाला है इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि इस बिल का प्रारूप अभी हमारे पास आया ही नहीं है, तो अब हम इसपर क्या टिप्पणी कर सकते हैं।
पहले सोच यह थी कि कोई भी आरक्षण हम देंगे तो वह OBC, SC, ST की महिलाओं को भी मिलना चाहिए, यह बहुत पहले की मांग है। जब लालू यादव केंद्र में मंत्री थे तब से यह मांग चली आ रही है... जब राज्यों में चुनाव हो रहे हैं तब इस बिल को इस वक्त लाने का कोई औचित्य नहीं था। जनगणना पूरी होने के बाद इसे लाया जाना चाहिए।
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने परिसीमन के मुद्दे पर कहा, "...मुझे लगता है कि केंद्र सरकार को दक्षिण भारतीय राज्यों के नेताओं द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देना चाहिए। हमें अच्छे शासन के लिए दंडित नहीं किया जा सकता, हमें नौकरियां पैदा करने के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।
हमें देश का आर्थिक विकास इंजन होने के लिए दंडित नहीं किया जा सकता... महिला आरक्षण बिल को संसद ने सर्वसम्मति से पारित किया था। सभी पार्टियां इसका समर्थन कर रही हैं लेकिव वे इसे लागू कैसे कर रहे हैं यह कोई नहीं जानता... जनगणना खत्म करें और इसे लागू करें, इससे ज्यादा महिलाओं को लाभ होगा।