लोकसभा-विधानसभा में महिला आरक्षणः 50 प्रतिशत नहीं तो 33 प्रतिशत ही सही, बसपा प्रमुख मायावती ने कहा-हम बीजेपी के साथ?
By राजेंद्र कुमार | Updated: April 15, 2026 16:46 IST2026-04-15T16:45:18+5:302026-04-15T16:46:33+5:30
Women's reservation in Lok Sabha and Vidhan Sabha: सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से लगातार हाशिए पर धकेली जा रही हैं, तो यह उचित और ऐतिहासिक दोनों होगा.

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लखनऊः बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव का समर्थन किया है. मायावती का कहना है कि यह कम से कम महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में एक शुरुआत है. हालांकि इसमें काफी देरी हुई है, लेकिन इस देरी के बावजूद बसपा इसका स्वागत करती है.
यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने यह भी कहा कि भले ही यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से कम है, लेकिन यह महिलाओं को उनका हक दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है. महिलाओं के लिए आरक्षण अगर 50 प्रतिशत नहीं, तो 33 प्रतिशत ही सही, यह भी एक अच्छी शुरुआत है.
महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत
महिलाओं के पक्ष में बोलते हुए मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी बसपा पहले भी लगातार महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करती रही है. लेकिन कोई भी अन्य पार्टी इस पर सहमत नहीं हुई, और न ही अब ऐसा लगता है कि वे सहमत होंगी. हमने वर्ष 2023 में पहली बार पारित कानून को लागू करने में देरी के बावजूद, इसका स्वागत किया था.
हमारा मानना है कि ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़ी महिलाओं को आरक्षण देने की बहुत आवश्यकता है.हालांकि इसमें काफी देरी हुई है, लेकिन देरी के बावजूद हमारी पार्टी इसका स्वागत करती है. अगर वास्तव में शोषित और हाशिए पर पड़ी महिलाओं, विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान किया जाता है, जो सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से लगातार हाशिए पर धकेली जा रही हैं, तो यह उचित और ऐतिहासिक दोनों होगा.
मायावती ने महिलाओं के लिए आरक्षण में देरी करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की और कहा कि कांग्रेस ने इस मामले में देरी ना की होती तो महिलाओं के लिए आरक्षण में देरी ना होती. मायावती के अनुसार, जाति एक ऐसा कारक है जिसने स्वतंत्रता के बाद पार्टी की नीति को प्रभावित किया है.
मायावती ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर जताई
यह दावा करते हुए मायावती के महिला सशक्तिकरण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के दावे पर भी सवाल उठाया. मायावती ने कहा कि देश और प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को लेकर केवल बयानबाजी हो रही हैं. महिला सशक्तिकरण के को लेकर ठोस नीति और मजबूत इच्छाशक्ति की कमी के कारण महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिल पाया है. यह दावा करते हुए मायावती ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और हिंसा पर भी चिंता जताई.