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जब भविष्य बता सकता है एआई तो हम क्यों नहीं रोक पाते तबाही ?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 15, 2026 07:25 IST

यह सच है कि एआई भविष्य नहीं देख सकता, लेकिन डाटा आधारित पैटर्न का इस्तेमाल करके यह भविष्य का काफी हद तक सटीक अनुमान लगा सकता है.

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हेमधर शर्मा

हाल ही में एक खबर सामने आई कि पार्किंसन रोग होने का समय रहते अनुमान लगाने के लिए अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित क्लिनिकल अध्ययन की शुरुआत की गई है, जिससे लाइलाज होने से पहले ही इस बीमारी की पहचान कर, उसका इलाज संभव हो सकेगा.

पार्किंसन ही नहीं, एआई ने सैकड़ों बीमारियों की, उनके लक्षण दिखाई देने के पहले ही पहचान करके उनके समय रहते इलाज को संभव बनाया है. दरअसल हर बीमारी दिखाई देने के बहुत पहले से ही अपनी आहट देना शुरू कर देती है और एल्गोरिद्‌म के जरिये एआई पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सटीक रूप से अनुमान लगा सकता है कि किसी व्यक्ति को भविष्य में किस बीमारी का कितना खतरा है.

स्वास्थ्य ही नहीं, अपराध रोकने के क्षेत्र में भी एआई बहुत मददगार साबित हो रहा है. ब्रिटेन की सरकार तो एक ऐसे एआई टूल पर काम कर रही है जो हत्या की घटना से पहले ही हत्यारे के बारे में भविष्यवाणी कर सकेगा. ‘मर्डर प्रिडिक्शन प्रोग्राम’ नाम का यह एआई पुलिस रिकाॅर्ड्‌स और सरकारी डाटा का इस्तेमाल करके अपराध होने के पहले ही उसकी संभावना के बारे में जानकारी दे देगा, जिससे वारदात रोकने में मदद मिल सकेगी.

यह सच है कि एआई भविष्य नहीं देख सकता, लेकिन डाटा आधारित पैटर्न का इस्तेमाल करके यह भविष्य का काफी हद तक सटीक अनुमान लगा सकता है. दरअसल भविष्य कोई अतीत और वर्तमान से कटी हुई या आसमान से टपकी चीज नहीं होता. अतीत की गणना के आधार पर हम जान लेते हैं कि भविष्य में कौन से ग्रह कब किस स्थान पर होंगे. कहते हैं पहले मनुष्यों का भविष्य जानने की कला में भी कुछ लोग प्रवीण होते थे.

दुर्भाग्य से भौतिक उन्नति के बीच, अपना भविष्य जानने का अलौकिक ज्ञान हम खो बैठे हैं. लेकिन सौभाग्य से एआई को हमने इतना उन्नत कर लिया है कि अतीत के डाटा के सहारे यह हमारे भविष्य के बारे में हमें काफी सटीकता से बता सकता है. जिस तरह एक हत्यारे के पिछले कुछ वर्षों या दशकों के क्रियाकलापों का विश्लेषण करके एआई जान सकता है कि वह भविष्य में अगली हत्या कब करने वाला है और हत्या होने से रोका जा सकता है, उसी तरह शायद अन्य अपराधों-बुराइयों पर भी अंकुश लगाया जा सकता है.

लेकिन एआई जब इतनी क्षमता हासिल कर चुका है तो उससे हम यह क्यों नहीं पूछते कि मानव जाति के सुनहरे भविष्य के लिए हमें क्या करना चाहिए? मिसाइलों को अचूक निशाने पर दागने के लिए तो हम एआई की मदद लेते हैं लेकिन मिसाइलें गिरने के क्या-क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं, एआई से यह क्यों नहीं पूछते? जिस व्यक्ति को हम अपने देश की कमान सौंपते हैं, उसके बारे में पहले ही एआई से यह पता क्यों नहीं कर लेते कि भविष्य में वह कैसा शासक साबित होगा?

आखिर डोनाल्ड ट्रम्प जैसे सनकी लोग हवा में तो प्रगट हो नहीं जाते, फिर बाद में पछताने की बजाय लोगों को पहले यह क्यों नहीं पता होना चाहिए कि वे किस तरह का भविष्य चुन रहे हैं? अगर रूस को पता होता कि यूक्रेन के साथ जो युद्ध उसने चार दिनों में ही जीत लेने की उम्मीद में छेड़ा था वह चार साल से भी अधिक लम्बा खिंच जाएगा तो क्या वह हमला करने से पहले सौ बार नहीं सोचता? ट्रम्प को यदि जरा भी भनक होती कि ईरान इतनी दिलेरी दिखाएगा कि सवा महीने लम्बे युद्ध के बाद भी अमेरिका पर ही मुंह की खाने की नौबत आएगी तो क्या वे अपने सारे सनकीपन के बावजूद ईरान पर हमला करने का दुस्साहस दिखा पाते?

कहते हैं 1947 में देश के बंटवारे के समय महात्मा गांधी को छोड़कर, कांग्रेस या मुस्लिम लीग के किसी भी नेता ने सपने में भी नहीं सोचा था कि आबादी की अदला-बदली के दौरान दसियों लाख लोगों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ेगा, वरना वे बंटवारे पर इतना जोर न डालते. विश्व इतिहास में इस तरह की न जाने कितनी घटनाएं हो चुकी हैं, जब सही अनुमान नहीं लगा पाने का भारी खामियाजा मानव जाति को भुगतना पड़ा है.

प्रकृति ने दुनिया के लगभग सारे जीव-जंतुओं को आसन्न खतरा भांप लेने की सहज बुद्धि दी है(भूकम्प आने के पहले कई जीवों में देखी जाने वाली बेचैनी इसका प्रमाण है). कथित विकास के चक्कर में मनुष्य ने अपना वह सहज ज्ञान तो खो दिया है लेकिन आज एआई जैसा सटीक भविष्यवक्ता हमारे पास होने के बावजूद अगर हम अपनी मूर्खताओं के चलते होने वाली तबाहियों को रोक नहीं पा रहे हैं तो ऐसे अत्याधुनिक विकास का क्या अर्थ रह जाता है?

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