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कौन हैं विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव?, क्यों नीतीश कुमार करते हैं सबसे अधिक भरोसा?, वीडियो

By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 15, 2026 17:58 IST

बिहार के मॉडल में नीतीश कुमार भी हैं, भाजपा भी है और अन्य तीन दल भी हैं, नीतीश कुमार कोई दूसरा नहीं हो सकता।

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ठळक मुद्देविश्वास का नतीजा है कि मुझे ये जिम्मेदारी मिली है।मैं नीतीश कुमार के प्रति आभार प्रकट करता हूं।कार्यशैली है उसी पर चलने का काम हम करेंगे। 

पटनाः सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद वे बिहार के पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्यमंत्री बन गए हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बिहार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जनता दल (यूनाइटेड) नेता विजय कुमार चौधरी ने बिहार के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर कहा कि मैंने जो आज शपथ ली है, इसके लिए मैं नीतीश कुमार के प्रति आभार प्रकट करता हूं। ये उन्हीं के विश्वास का नतीजा है कि मुझे ये जिम्मेदारी मिली है।

जो उनके(नीतीश कुमार) रास्ते हैं, उनकी नीतियां हैं, उनके तरीके हैं, उनके कार्यक्रम है, उनके तरीके हैं, उनकी कार्यशैली है उसी पर चलने का काम हम करेंगे। उन्होंने आगे कहा, "अब तक नीतीश कुमार का जो मॉडल था उसमें भाजपा भी थी। अभी तुलना वाली कोई बात नहीं है। बिहार के मॉडल में नीतीश कुमार भी हैं, भाजपा भी है और अन्य तीन दल भी हैं, नीतीश कुमार कोई दूसरा नहीं हो सकता।

नीतीश कुमार की जो सोच है, उनके काम करने का तरीका अद्भुत है। हमने उनके साथ बहुत कुछ सीखा है और उसी आधार पर हम आगे बढ़ रहे हैं। यही बात हमारे नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कही है कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए जो रास्ता, जो नीतियां व कार्यक्रम बनाए हैं, हम उसी को आगे बढ़ाएंगे इसलिए न कहीं कोई कंफ्यूज़न है और न समझदारी का भाव है।"

बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार के विकास में नीतीश कुमार जी का जो मॉडल है, प्रधानमंत्री का जो संरक्षण है उसके आधार पर आगे बढ़ेंगे। सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह में JDU नेता निशांत कुमार की अनुपस्थिति पर कहा कि उनको खुद निर्णय लेना है कि राजनीति में आएंगे या नहीं। तेजस्वी यादव के बयान पर उन्होंने कहा कि वे खुद किसकी पाठशाला से निकले हैं?, पहले तो जनता दल ही था।

विजय चौधरी बिहार की राजनीति का वह चेहरा हैं जिन्हें उनकी विद्वता और संतुलित व्यवहार के लिए जाना जाता है। 8 जनवरी 1957 को समस्तीपुर में जन्मे विजय चौधरी को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता जगदीश प्रसाद चौधरी अपने समय के दिग्गज नेता थे। विजय चौधरी ने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर किया और राजनीति में आने से पहले भारतीय स्टेट बैंक में पीओ के रूप में कार्य किया।

पिता के निधन के बाद उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वे दलसिंहसराय से तीन बार विधायक रहे। 2005 में कांग्रेस छोड़ जदयू में शामिल होना उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ रहा। भूमिहार समाज से आने वाले विजय चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद साथियों में गिने जाते हैं। वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री भी रह चुके हैं।

उनकी साफ-सुथरी छवि और विधायी कार्यों के गहरे ज्ञान के कारण उन्हें अब उपमुख्यमंत्री की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। बिजेंद्र प्रसाद यादव 79 वर्ष की आयु में भी राजनीतिक ऊर्जा युवाओं को मात देती है। उन्हें कोसी क्षेत्र की राजनीति का ‘चाणक्य’ माना जाता है। विजेंद्र यादव का प्रभाव ऐसा है कि वे साल 1990 से लगातार सुपौल विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं।

क्षेत्र की जनता के बीच उनकी पकड़ और प्रशासनिक अनुभव बेमिसाल है। कोसी क्षेत्र (सुपौल, सहरसा, मधेपुरा) की तस्वीर बदलने का श्रेय उन्हें जाता है। बिजली मंत्री के रूप में उन्होंने ग्रिड नेटवर्क का विस्तार किया और उप-केंद्रों का जाल बिछाया, जिससे बाढ़ प्रभावित यह इलाका ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना। नीतीश कुमार के कोर ग्रुप के सदस्य होने के साथ-साथ वे पार्टी के वरिष्ठतम रणनीतिकारों में से एक हैं।

यादव समाज में उनकी गहरी पैठ और कोसी क्षेत्र में उनके दबदबे को देखते हुए उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इस बीच नई सरकार के गठन पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा कि “आज बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने पर सम्राट चौधरी जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में बिहार और तेजी से विकसित होगा और देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा”। बता दें कि 14 अप्रैल को नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा सौंप दिया था। बिहार मे अब तक 10 उपमुख्यमंत्री मिले हैं। अनुग्रह नारायण सिन्हा 11 साल उपमुख्यमंत्री रहे, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।

कर्पूरी ठाकुर के बाद जगदेव प्रसाद, राम जयपाल सिंह यादव, सुशील मोदी, तेजस्वी यादव, तार किशोर प्रसाद, रेणु देवी, और विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री बने। इतिहास के पन्ने पलटे तो आखिरी बार कर्पूरी ठाकुर ने यह कारनामा किया था। 1967 में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद 1970 में वह पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे।

उनके बाद दशकों तक यह कुर्सी उपमुख्यमंत्री के लिए जैसे मना हो गई थी। कई बड़े नाम इस सियासी बदकिस्मती के शिकार रहे। सुशील मोदी, जो कई बार उपमुख्यमंत्री बने, मगर मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे दूर ही रही। वहीं तेजस्वी प्रसाद यादव भी दो बार उपमुख्यमंत्री बनने के बावजूद अभी तक उस ताज को हासिल नहीं कर पाए।

सम्राट चौधरी ने दो बार उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभाने के बाद आखिरकार सत्ता के शिखर पर छलांग लगा दी। यह सिर्फ एक शपथ नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नया ‘पावर शिफ्ट’ माना जा रहा है जहां पुरानी मान्यताएं टूट रही हैं और नई सियासी इबारत लिखी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट अपने इस नए शासनकाल में बिहार की राजनीति और विकास को किस दिशा में ले जाते हैं।

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