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Bihar: सम्राट चौधरी को 24वें मुख्यमंत्री के रूप में राज्यपाल ने दिलाई शपथ, मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी सबकी नजरें

By एस पी सिन्हा | Updated: April 15, 2026 13:20 IST

Bihar: वहीं तेजस्वी प्रसाद यादव भी दो बार उपमुख्यमंत्री बनने के बावजूद अभी तक उस ताज को हासिल नहीं कर पाए।

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Bihar: बिहार की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब सम्राट चौधरी ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। पटना के लोक भवन में स्थित जर्मन हैंगर में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया, जहां राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री के तौर पर पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उसके साथ ही जदयू के नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी ने कैबिनेट मंत्री(उपमुख्यमंत्री) पद की शपथ ली।

वहीं बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब सबकी नजरें मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हुई है। मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के शपथ लेने के बाद सहयोगी दलों के बीच अगले कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 

इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अहम संकेत दिए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि गठबंधन के भीतर इस पर जल्द ही बैठक कर निर्णय लिया जाएगा। चिराग पासवान ने संकेत दिया कि पांच राज्यों में चल रहे चुनाव और उनके परिणाम आने के बाद इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। यानी मंत्रिमंडल विस्तार में मई के पहले हफ्ते में होने की संभावना है। हालांकि सूत्रों के अनुसार जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार में अधिकांश तौर पर पुराने चेहरों को जगह मिलेगी। 

उधर, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले सम्राट चौधरी पटना के राजवंशी नगर स्थित पंचरूपी हनुमान मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने पूजा की और आशीर्वाद लिया। सुबह से ही उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार, जेपी नड्डा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और चिराग पासवान समेत एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद थे। 

विजय चौधरी बिहार की राजनीति का वह चेहरा हैं जिन्हें उनकी विद्वता और संतुलित व्यवहार के लिए जाना जाता है। 8 जनवरी 1957 को समस्तीपुर में जन्मे विजय चौधरी को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता जगदीश प्रसाद चौधरी अपने समय के दिग्गज नेता थे।

विजय चौधरी ने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर किया और राजनीति में आने से पहले भारतीय स्टेट बैंक में पीओ के रूप में कार्य किया। पिता के निधन के बाद उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वे दलसिंहसराय से तीन बार विधायक रहे। 2005 में कांग्रेस छोड़ जदयू में शामिल होना उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ रहा। भूमिहार समाज से आने वाले विजय चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद साथियों में गिने जाते हैं। वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी साफ-सुथरी छवि और विधायी कार्यों के गहरे ज्ञान के कारण उन्हें अब उपमुख्यमंत्री की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

विजेंद्र यादव 79 वर्ष की आयु में भी राजनीतिक ऊर्जा युवाओं को मात देती है। उन्हें कोसी क्षेत्र की राजनीति का ‘चाणक्य’ माना जाता है। विजेंद्र यादव का प्रभाव ऐसा है कि वे साल 1990 से लगातार सुपौल विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। क्षेत्र की जनता के बीच उनकी पकड़ और प्रशासनिक अनुभव बेमिसाल है। कोसी क्षेत्र (सुपौल, सहरसा, मधेपुरा) की तस्वीर बदलने का श्रेय उन्हें जाता है। बिजली मंत्री के रूप में उन्होंने ग्रिड नेटवर्क का विस्तार किया और उप-केंद्रों का जाल बिछाया, जिससे बाढ़ प्रभावित यह इलाका ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना।

नीतीश कुमार के कोर ग्रुप के सदस्य होने के साथ-साथ वे पार्टी के वरिष्ठतम रणनीतिकारों में से एक हैं। यादव समाज में उनकी गहरी पैठ और कोसी क्षेत्र में उनके दबदबे को देखते हुए उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।

इस बीच नई सरकार के गठन पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा कि “आज बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने पर श्री सम्राट चौधरी जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में बिहार और तेजी से विकसित होगा और देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा”। बता दें कि 14 अप्रैल को नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा सौंप दिया था। 

बिहार मे अब तक 10 उपमुख्यमंत्री मिले हैं। अनुग्रह नारायण सिन्हा 11 साल उपमुख्यमंत्री रहे, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। कर्पूरी ठाकुर के बाद जगदेव प्रसाद, राम जयपाल सिंह यादव, सुशील मोदी, तेजस्वी यादव, तार किशोर प्रसाद, रेणु देवी, और विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री बने। इतिहास के पन्ने पलटे तो आखिरी बार कर्पूरी ठाकुर ने यह कारनामा किया था।

1967 में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद 1970 में वह पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे। उनके बाद दशकों तक यह कुर्सी उपमुख्यमंत्री के लिए जैसे मना हो गई थी। कई बड़े नाम इस सियासी बदकिस्मती के शिकार रहे। सुशील मोदी, जो कई बार उपमुख्यमंत्री बने, मगर मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे दूर ही रही। वहीं तेजस्वी प्रसाद यादव भी दो बार उपमुख्यमंत्री बनने के बावजूद अभी तक उस ताज को हासिल नहीं कर पाए।

सम्राट चौधरी ने दो बार उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभाने के बाद आखिरकार सत्ता के शिखर पर छलांग लगा दी। यह सिर्फ एक शपथ नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नया ‘पावर शिफ्ट’ माना जा रहा है जहां पुरानी मान्यताएं टूट रही हैं और नई सियासी इबारत लिखी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट अपने इस नए शासनकाल में बिहार की राजनीति और विकास को किस दिशा में ले जाते हैं।

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