बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी से क्यों खफा तेजस्वी यादव?, शैक्षणिक डिग्री को लेकर राजद ने 9 वीडियो किया शेयर, देखिए
By एस पी सिन्हा | Updated: April 15, 2026 16:10 IST2026-04-15T16:09:27+5:302026-04-15T16:10:14+5:30
कुशवाहा (कोइरी) परिवार में 1968 में जन्मे सम्राट महज 10 वर्ष के कार्यकाल में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष, विधान पार्षद, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री बन गए।

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पटनाः सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही उनके अतीत के विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। लालू-राबड़ी सरकार के दौरान कम उम्र में मंत्री बनने का मामला हो या उनकी शैक्षणिक डिग्रियों पर उठते सवाल, राजद ने उनके खिलाफ घेराबंदी तेज कर दी है। कहा जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के पास यह एक ऐसा अस्त्र है जिसे वे सदन से लेकर सड़क तक इस्तेमाल करेंगे।
बिहार के नए मुख्यमंत्री जी शपथ भी सही ढंग से नहीं पढ़ पाए।
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) April 15, 2026
ऐसे लोग जिन्होंने सदा दूसरों के परिवारवाद, अपराध, शिक्षा को लेकर अपनी सहूलियत के हिसाब से मनगढ़ंत आरोप लगाए, आज उन्हें यह सब एक ही पैकेज और एक ही व्यक्ति में मिल गया।
कहाँ है बिहार के तथाकथित प्रगतिशील, शिक्षित, उच्च… pic.twitter.com/3WE0SwZkMI
दरअसल, सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना कई मायनों में खास है। 58 वर्षीय सम्राट चौधरी को घर वाले प्यार से गुल्लू कहते हैं। कुशवाहा (कोइरी) परिवार में 1968 में जन्मे सम्राट महज 10 वर्ष के कार्यकाल में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष, विधान पार्षद, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री बन गए।
श्री सम्राट चौधरी जी द्वारा आज 𝐄𝐥𝐞𝐜𝐭𝐞𝐝 मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी को गद्दी से उतारने की अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करने पर बधाई तथा 𝐒𝐞𝐥𝐞𝐜𝐭𝐞𝐝 मुख्यमंत्री बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं।
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) April 15, 2026
आशा है कि नए माननीय मुख्यमंत्री जी इस कड़वे, अप्रिय एवं कठोर तथ्य से पूर्ण रूप से…
राजनीतिक परिवार से संबंध रखने वाले सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी भी बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री से लेकर सांसद रहे। सम्राट एवं उनके पिता शकुनी चौधरी लालू यादव के नेतृत्व वाली राजद सरकार में मंत्री रहे चुके हैं। इसके उपरांत 2006 में बनी नीतीश सरकार, जीतन राम मांझी सरकार और फिर नीतीश सरकार में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री बनाए गए।
सम्राट के नाम 20 वर्षों के नीतीश सरकार में पहले गृह मंत्री बनने रिकॉर्ड भी है। सम्राट की दिवंगत माता भी से विधायक रही थीं। सम्राट चौधरी ने अपने सियासी कैरियर की शुरुआत राजद से की। वर्ष 1999 में राबड़ी देवी सरकार में उन्हें कृषि राज्य मंत्री बनाया गया, हालांकि उम्र विवाद के कारण राज्यपाल ने उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया था।
सम्राट चौधरी 1995 में 89 दिनों के लिए जेल गए थे। बिहार विधान परिषद की साइट पर इस बात का जिक्र है। इसके बाद वे विधायक बने और नीतीश कुमार की सरकार में 2014 में शहरी विकास मंत्री रहे। जीतन राम मांझी के कार्यकाल में भी उन्होंने मंत्री पद संभाला। 2018 में उन्होंने जदयू छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।
तीन बार नाम बदलने वाले महाठग की असलियत जेडीयू के MLC से सुन लीजिए #Biharpic.twitter.com/UEEGob5h4W
— RJD Gopalganj (@gopalganj_RJD) April 15, 2026
भाजपा में उनका कद लगातार बढ़ता गया। पार्टी ने उन्हें ओबीसी चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया और धीरे-धीरे वह नीतीश कुमार के विकल्प के तौर पर स्थापित होते गए। वे प्रदेश उपाध्यक्ष बने, विधान परिषद सदस्य बने, 2022 में नेता प्रतिपक्ष बने और 2023 में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। उपमुख्यमंत्री बनाए गए और अब वे बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
तो मुरेठा मैन?
— RJD Kaimur (@KaimurRjd) April 15, 2026
बालू माफिया, शराब माफिया और भ्रष्टाचार में डूबा “कुर्सी कुमार” अब तुम्हें बहुत अच्छा लगने लगा है?
या फिर सच ये है कि कुर्सी की चमक में उसके सारे काले कारनामे नजर ही नहीं आ रहे? pic.twitter.com/lrbkrAhkBJ
सम्राट चौधरी पहली बार परबत्ता से विधायक, इसके उपरांत विधान पार्षद और फिर तारापुर से विधायक चुने गए। सम्राट चौधरी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी रोचक रही है। सार्वजनिक दस्तावेजों और चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मदुरै कामराज विश्वविद्यालय तमिलनाडु से पूरी की है।
एक पलटू राम से तो जान छूटी ही थी,
— RJD Darbhanga (@darbhanga_rjd) April 15, 2026
लेकिन उससे भी बड़ा दलबदलू राम आकर गद्दी पर बैठ गया!
सही ही कहा था मोदी जी ने "हिपोक्रेसी की भी सीमा होती है"! pic.twitter.com/iegKTvolKj
यह विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए देशभर में विख्यात है। बिहार से निकलकर तमिलनाडु जैसे राज्य से डिग्री हासिल करना उनकी विस्तृत शैक्षणिक यात्रा को दर्शाता है। हालांकि विपक्ष के द्वारा सम्राट चौधरी के शैक्षणिक डिग्रियों पर सवाल उठाए जाने पर खुद सम्राट चौधरी ने कहा था कि "हाफी डिफीट" में सब लिखा गया है।
मतलब सातवीं पास जनाब गर्व से जाली ही नहीं, "जेली" भी हैं? pic.twitter.com/O8zDKbP1gY
— RJD Nalanda (@RjdNalanda) April 15, 2026
आज सम्राट अशोक महान, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर और गुरु गोविंद सिंह जी की धरती धन्य हुई कि बिहार को ऐसा मुख्यमंत्री मिला जिसे गाली गलौज करने पर भी गर्व होता है! pic.twitter.com/nlf5nUU6az
— RJD Arwal (@arwal_rjd) April 15, 2026
बिहार पलटू नीतीश कुमार से बचा,
— RJD East Champaran (@ChamparanEast) April 15, 2026
और फ्रॉड सम्राट चौधरी के जाल में फँसा!
एक तो करेला कड़वा,
ऊपर से नीम चढ़ा! pic.twitter.com/229CxDMwie
उल्लेखनीय सम्राट चौधरी ऐसे नेता हैं जिनका शुरुआती राजनीतिक बैकग्राउंड न तो भाजपा से जुड़ा रहा और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से। हालांकि, सम्राट चौधरी अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें भाजपा ने दूसरे दल से आने के बावजूद मुख्यमंत्री बनाया हो। पार्टी ने समय-समय पर ऐसे कई नेताओं को मौका दिया है।
मोदी जी, भागलपुर में सम्राट चौधरी जी के पिताजी आपकी प्रतीक्षा में बैठे हैं!
— RJD Aurangabad (@aurangabad_rjd) April 15, 2026
अब इस इंतजार को कब खत्म करेंगे?@Rjd_Bhagalpurpic.twitter.com/Lo6tdVOPQy
जिनकी राजनीतिक शुरुआत कांग्रेस या अन्य दलों से हुई, लेकिन भाजपा में आने के बाद उनका कद और प्रभाव बढ़ा। 16 नवंबर 1968 को खगड़िया जिले में जन्मे सम्राट चौधरी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनकी पत्नी ममता कुमारी हैं और उनके एक पुत्र व एक पुत्री हैं।