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बांग्लादेश से रिश्तों में हसीना फैक्टर की बाधा

By शशिधर खान | Updated: April 15, 2026 05:16 IST

शेख हसीना ने अपनी प्रबल प्रतिद्वंद्वी बेगम खालिदा के खिलाफ सारे कानूनी हथकंडे अपनाए थे ताकि वो कभी-भी उनके लिए चुनौती न बन सकें.

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ठळक मुद्देखालिदा जिया की पार्टी को प्रतिबंधित करना और उनके खिलाफ मुकदमे चलाकर जेल में डालना उसका हिस्सा था.भारत के हित में सबसे अच्छी बात यह रही कि शेख हसीना ने चीन, पाकिस्तान से दूरी और भारत से नजदीकी बनाए रखी.जुलाई, 2024 में भड़के विद्रोह का तेवर समझने के बजाय अवामी लीग सरकार ने उसे कुचलने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

बांग्लादेश की नई सरकार के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान दिल्ली से विदा होते-होते शेख हसीना को बांग्लादेश भेजने की भारत सरकार से गुजारिश करके द्विपक्षीय रिश्ते में तल्खी छोड़ गए. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन के खिलाफ भड़के व्यापक जनता-छात्र विद्रोह को कुचलने में विफल होने के बाद शेख हसीना को जुलाई-अगस्त, 2024 में सत्ता के साथ-साथ देश भी छोड़ना पड़ा था. उन्होंने भागकर भारत में पनाह ली और यहीं निर्वासन में रह रही हैं. शेख हसीना ने अपनी प्रबल प्रतिद्वंद्वी बेगम खालिदा के खिलाफ सारे कानूनी हथकंडे अपनाए थे ताकि वो कभी-भी उनके लिए चुनौती न बन सकें.

खालिदा जिया की पार्टी को प्रतिबंधित करना और उनके खिलाफ मुकदमे चलाकर जेल में डालना उसका हिस्सा था. शेख हसीना के लगातार सत्ता में बने रहने के पीछे भारत के कथित अप्रत्यक्ष सहयोग की भी बात आसपड़ोस और अंतरराष्ट्रीय हलकों में होती थी.  लेकिन भारत के हित में सबसे अच्छी बात यह रही कि शेख हसीना ने चीन, पाकिस्तान से दूरी और भारत से नजदीकी बनाए रखी.

इतना ही नहीं, कट्टरपंथियों को शेख हसीना ने सिर उठाने नहीं दिया और भारत की पूर्वोत्तर सीमा में उग्रवादियों की गतिविधियों पर रोक लगाई. भारत से नजदीकी जरूर बढ़ी, मगर अपने देश में विरोधियों की आवाज दबाने के कारण शेख हसीना की लोकप्रियता कम होती गई. यहां तक कि जुलाई, 2024 में भड़के विद्रोह का तेवर समझने के बजाय अवामी लीग सरकार ने उसे कुचलने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

उसके जवाब में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्ववाली अंतरिम सरकार ने अवामी लीग समर्थकों को निशाना बनाया. फरवरी, 2026 के आम चुनाव में बांग्लादेश की जनता ने बीएनपी के प्रति भरोसा जताया और उसके नेता तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने. नई सरकार ने सभी को साथ लेकर चलने के साथ-साथ भारत से संपर्क बढ़ाने पर बल दिया.

बीएनपी सरकार के किसी राजनयिक की यह पहली विदेश यात्रा थी, जब उसके विदेश मंत्री खलीलुर रहमान गत हफ्ते भारत आए. इस नई सरकार को अंतरिम सरकार की तरह चीन, पाक से नजदीकी रखनी है या नहीं, यह तो अभी स्पष्ट नहीं है, मगर भारत से अच्छे रिश्ते बनाने पर खलीलुर रहमान ने जोर दिया है.

लेकिन साथ-साथ शेख हसीना को ढाका को सौंपने पर भी जोर दिया है. भारत-बांग्लादेश रिश्ते में आज भी हसीना महत्वपूर्ण फैक्टर हैं. पहली बार ऐसा हुआ, जब तारिक रहमान के नेतृत्ववाली नई सरकार के किसी मंत्री ने भारत आकर आधिकारिक रूप से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका को सौंपे जाने का मामला उठाया.  

टॅग्स :बांग्लादेशतारिक रहमानशेख हसीना
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