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बिहार में हर साल कैंसर से 80000 मौत?, प्रतिवर्ष 1.20 लाख नए रोगी, देश में चौथे स्थान पर बिहार, आईजीआईएमएस रिपोर्ट में खुलासा?

By एस पी सिन्हा | Updated: May 18, 2026 14:30 IST

बिहार में सबसे आम प्रकार के कैंसर पुरुषों में मुंह का कैंसर, जीभ का कैंसर, प्रोस्टेट और फेफड़ों का कैंसर पाया जाता है.

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ठळक मुद्देमहिलाओं में स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा और पित्ताशय का कैंसर पाया जाता है.गर्भाशय के मुंह के कैंसर के 3,44,447 नमूनों की जांच की गई है.आईजीआईएमएस के रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष कुल 78,210 कैंसर मरीजों की पहचान की गई.

पटनाः बिहार में कैंसर रोगियों की संख्या से बढ़ रही है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 1.20 लाख नए कैंसर रोगी सामने आ रहे हैं और लगभग 1.15 लाख मरीज पंजीकृत हैं. बिहार कैंसर के मामलों में देश में चौथे स्थान पर है और राज्य में हर वर्ष कैंसर से करीब 70 से 80 हजार लोगों की मौत हो रही है. हाल यह है कि बिहार के कई गांव कैंसर हॉटस्पॉट की तरह बनते जा रहे हैं. मधेपुरा में कैंसर के मरीजों में ज्यादा इजाफा देखा जा रहा है. इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (आईजीआईएमएस) के रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष कुल 78,210 कैंसर मरीजों की पहचान की गई.

इसमें बिहार के सभी जिलों का औसत करीब 2058 मरीज के आसपास रहा, जबकि मधेपुरा जिले में यह संख्या औसत से लगभग 700 अधिक दर्ज की गई. जिसमें महिला 3.09 प्रतिशत और 4.19 प्रतिशत पुरुष शामिल है. बिहार स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर मुंह के कैंसर के 16,32,254, स्तन कैंसर के 7,44,955 और गर्भाशय के मुंह के कैंसर के 3,44,447 नमूनों की जांच की गई है.

टेस्ट में 23,462 मुंह के कैंसर के अलावा स्तन कैंसर के 15,285 और 40,324 गर्भाशय के मुंह के कैंसर के संदिग्ध मरीजों को रेफर किया गया है. आईजीआईएमएस पटना की रिपोर्ट के अनुसार, साल भर में कैंसर विभागों में कुल 78,210 मरीजों का इलाज एवं पंजीकरण दर्ज किया गया.

वहीं इस रिपोर्ट के अनुसार, मधेपुरा जिले से कुल 2,740 कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जो बिहार के जिला औसत से काफी अधिक माना जा रहा है. यह आंकड़ा केवल आईजीएमएस पटना का है, जबकि पटना में एम्स, पीएमसीएच, एनएमसीच समेत कई बड़े सरकारी एवं निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं.

ऐसे में यदि सभी अस्पतालों के आंकड़ों को एक साथ जोड़ा जाए तो कैंसर मरीजों की वास्तविक संख्या और भी अधिक चौंकाने वाली हो सकती है. राज्य में होने वाले कैंसर के मामलों (विशेषकर मुंह और गले का कैंसर) का प्रमुख कारण तंबाकू और गुटखे का सेवन है. इसके अलावे गंगा के किनारे बसे गांवों में भूमिगत जल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने के कारण कैंसर का जोखिम बढ़ा है.

जबकि खराब खान-पान, व्यायाम की कमी और मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन भी इसका बड़ा कारण है. जानकारों की मानें तो जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मामलों की पहचान अंतिम (एडवांस) स्टेज पर होती है, जिससे मृत्यु दर बढ़ जाती है। बिहार में सबसे आम प्रकार के कैंसर पुरुषों में मुंह का कैंसर, जीभ का कैंसर, प्रोस्टेट और फेफड़ों का कैंसर पाया जाता है.

जबकि महिलाओं में स्तन कैंसर (ब्रेस्ट कैंसर), गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) का कैंसर और पित्ताशय (गॉलब्लैडर) का कैंसर पाया जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तेजी से बढ़ते कैंसर मामलों के पीछे दूषित खानपान, तंबाकू सेवन, रासायनिक खाद का अत्यधिक प्रयोग, खराब जीवनशैली और पानी की गुणवत्ता बड़ी वजह बनती जा रही है. 

आईजीआईएमएस के अधीक्षक डा. मनीष मंडल ने इस संबंध में बताया कि कैंसर के मामले पहले भी काफी मिलते थे लेकिन जानकारी नहीं मिल पाती थी. लेकिन अब टेक्नोलॉजी के एडवांसमेंट के साथ-साथ लोगों में कैंसर को लेकर अवेयरनेस भी बढ़ा है.

सरकार की ओर से स्क्रीनिंग प्रोग्राम भी चल रहे हैं जिसका परिणाम है कि कैंसर के मामले बढ़े हैं. प्रदेश में बीते 4 वर्षों में लगभग 8 फीसदी प्रदेश में कैंसर के मामले में इजाफा हुआ है. इसमें 20 फीसदी से अधिक ओरल कैंसर के मामले होते हैं जिसका प्रमुख कारण तंबाकू उत्पादों का सेवन है.

उन्होंने बताया कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की प्रमुख वजह न्यूट्रिशन युक्त भोजन की कमी है. ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर महिलाएं पोषण युक्त भोजन पर ध्यान नहीं देती. इसके अलावा अन हाइजीन भी ब्रेस्ट कैंसर का प्रमुख वजह है.

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