लाइव न्यूज़ :

कभी किसी के विचारों पर आत्मावलोकन भी तो हो!

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: May 18, 2026 05:15 IST

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने यदि कुछ कड़वे वचन समाज के प्रहरियों के लिए कहे हैं तो उन पर चर्चा होनी चाहिए.

Open in App
ठळक मुद्देऐसे विचारों के पीछे के कारण खोजे जा सकते हैं. कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.टिप्पणियों को अशोभनीय और चिंताजनक माना जाने लगा.

यह बड़ी ही अजीब स्थिति है कि नेता, समाजसेवी, पत्रकार, आरटीआई कार्यकर्ता, सोशल मीडिया पर प्रभावशाली लोग अपनी आलोचना के लिए कभी तैयार ही नहीं रहते हैं. उनमें से एक वर्ग अपने खिलाफ बोलने वालों के खिलाफ तलवार लेकर खड़ा हो जाता है. भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने यदि कुछ कड़वे वचन समाज के प्रहरियों के लिए कहे हैं तो उन पर चर्चा होनी चाहिए.

ऐसे विचारों के पीछे के कारण खोजे जा सकते हैं. मगर उससे परे संघर्ष का मार्ग अपना लिया जाता है. प्रधान न्यायाधीश ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा था कि समाज में ऐसे परजीवी मौजूद हैं, जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोजगार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.

उनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं, कुछ दूसरे तरह के ‘एक्टिविस्ट’ बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला शुरू कर देते हैं. यह बात देश के सभी युवाओं से जुड़ी बताई जाने लगी. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के मुख से इस तरह की टिप्पणियों को अशोभनीय और चिंताजनक माना जाने लगा.

देखते-देखते ही एक वर्ग न्यायमूर्ति के खिलाफ मोर्चा साधने के लिए तैयार हो गया. जिसके बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत को अपनी टिप्पणी पर सफाई देनी पड़ी और कहना पड़ा कि उनकी टिप्पणियां केवल उन लोगों के खिलाफ थीं, जिन्होंने फर्जी या नकली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशों में प्रवेश किया है. उन्होंने कहा कि यह कहना पूरी तरह निराधार है कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की.

उन्होंने कहा कि वह वर्तमान और भविष्य के मानव संसाधन की क्षमता पर गर्व करते हैं और भारतीय युवाओं के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान है और वह भी उन्हें विकसित भारत के स्तंभ के रूप में देखते हैं. इस स्थिति में साफ हो जाता है कि प्रधान न्यायाधीश की टिप्पणी किसके खिलाफ थी. अब साबित किया जाना चाहिए कि क्या न्यायमूर्ति सूर्यकांत के बताए लोग समाज में नहीं हैं?

यदि हैं तो न्यायमूर्ति की आलोचना करने वाले विघ्नसंतोषियों के खिलाफ कब बात करेंगे? देश में एक बड़ा वर्ग लोकतंत्र का दुरुपयोग करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझता है. वह संविधान, कानून की आड़ में कई ऐसे काम करता है, जो देशहित में नहीं होते हैं. व्यवस्था में कमी और कमजोरियां हर स्थान पर मिल सकती हैं. किंतु उनकी आलोचना, समीक्षा और सुधार विधिवत रूप से ही किया जा सकता है.

केवल डर-भ्रम फैला कर स्थितियों को बेहतर नहीं बनाया जा सकता है. इसलिए देश में बदलाव के स्वप्नदर्शियों को पहले न्यायमूर्ति जैसे व्यक्तियों की कड़ी टिप्पणियों को स्वीकार करने की क्षमता विकसित कर आत्मावलोकन करना होगा और उसके बाद परिवर्तन की दिशा में ईमानदार प्रयास करने होंगे. केवल शोर मचाने और निजी हमलों से समस्याओं का हल नहीं मिल सकता है. इसके लिए द्वेष भाव से परे स्वस्थ नीयत के साथ चलना होगा.

टॅग्स :CJIसुप्रीम कोर्टsupreme court
Open in App

संबंधित खबरें

भारतCJI सूर्यकांत ने अपने बेरोज़गार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' से करने वाले बयान पर दी सफाई

क्राइम अलर्ट3,700 करोड़ रुपये घोटाला, 250 से अधिक मामले दर्ज, सुप्रीम कोर्ट ने ‘मुख्य साजिशकर्ता’ की पत्नी को दी जमानत

भारतधार भोजशाला फैसला: राजा भोज ने वर्ष 1034 में स्थापित की थी सरस्वती मंदिर, 1305 में अलाउद्दीन खिलजी की फौज ने ढहाया, हिंदू पक्ष ने कहा-2026 में जीत की खुशी?

क्राइम अलर्टUnnao Rape Case: कुलदीप सेंगर को नहीं मिलेगी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को किया रद्द

भारतक्या ममता बनर्जी ने कानूनी तौर पर वकालत की? बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 48 घंटों के भीतर जवाब मांगा

भारत अधिक खबरें

भारतओडिशा भीषण गर्मीः बौध शहर में 42.9 डिग्री सेल्सियस?, 11 स्थानों पर अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज

भारतNEET exam cancelled 2026: नीट परीक्षा में अत्यंत शर्मनाक बर्ताव!

भारतसीएम-निर्वाचित सतीशन ने केरल कैबिनेट की घोषणा की, आज 21 मंत्री शपथ लेंगे

भारतमुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 350 टन वजनी कटरहेड को मुंबई के विक्रोली शाफ्ट में उतारा गया

भारतManali Municipal Council Poll Results 2026: 7 में से 7 सीट पर जीत?, बीजेपी ने मनाली नगर परिषद में सत्ताधारी कांग्रेस का सूपड़ा किया साफ?