लाइव न्यूज़ :

कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यानः हथिनी ने स्वस्थ जुड़वां शावकों को जन्म दिया?, बेहद दुर्लभ घटना मान रहे वन्यजीव विशेषज्ञ, वीडियो

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 17, 2026 17:27 IST

अधिकारियों के मुताबिक, उत्तराखंड में सबसे ज्यादा हाथी कॉर्बेट क्षेत्र में हैं और यहां हाथियों की आबादी 1,200 से अधिक दर्ज है।

Open in App
ठळक मुद्देजुड़वां शावकों के जन्म के बाद वन विभाग ने निगरानी तेज कर दी है।छिमवाल ने मंगलवार को पहली बार दोनों शावकों को देखा।हाथी अभयारण्य हाथी संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

नैनीताल: उत्तराखंड के कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में एक हथिनी ने स्वस्थ जुड़वां शावकों को जन्म दिया है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे बेहद दुर्लभ घटना मान रहे हैं, जबकि इस खबर से पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह है। कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के गर्जिया पर्यटन क्षेत्र में जुड़वां शावकों के जन्म के बाद वन विभाग ने निगरानी तेज कर दी है।

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि हथिनी और उसके नवजात शावकों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इसकी जानकारी तब मिली जब वन्यजीव प्रेमी संजय छिमवाल ने जंगल सफारी के दौरान कैमरे से हथिनी के परिवार की तस्वीरें लीं। छिमवाल ने मंगलवार को पहली बार दोनों शावकों को देखा।

उन्होंने कहा, ‘‘दोनों शावक अपनी मां के साथ सुरक्षित थे और दूध पीते नजर आए। यह नजारा बेहद अनोखा और रोमांचक था।’’ अधिकारियों के मुताबिक, उत्तराखंड में सबसे ज्यादा हाथी कॉर्बेट क्षेत्र में हैं और यहां हाथियों की आबादी 1,200 से अधिक दर्ज है। राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक साकेत बडोला ने कहा कि कॉर्बेट बाघ अभयारण्य और शिवालिक हाथी अभयारण्य हाथी संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

उन्होंने कहा कि जुड़वां शावकों का जन्म इस क्षेत्र में सकारात्मक, सुरक्षित और स्वस्थ वन्यजीव पर्यावरण का संकेत है। बडोला ने कहा कि हथिनी का गर्भकाल 22 से 24 महीने का होता है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे गर्भकाल के बाद जुड़वां शावकों का जन्म असाधारण घटना है, क्योंकि हाथी आमतौर पर एक ही शावक को जन्म देते हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञ सतप्रीत सिंह शेट्टी ने बताया कि हाथियों में केवल एक फीसदी मामलों में जुड़वां बच्चे होते हैं। उन्होंने कहा कि दो साल के गर्भकाल के बाद एक हथिनी का दो स्वस्थ शावकों को जन्म देना और उनकी देखभाल करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं आश्चर्यजनक है।

अधिकारियों ने कहा कि यह घटना अभयारण्य में जारी संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है, और सुरक्षित वन क्षेत्र, पर्याप्त भोजन तथा अनुकूल वातावरण यहां हाथियों की बढ़ती आबादी में सहायक है। इस खबर के बाद गर्जिया पर्यटन क्षेत्र में पर्यटकों की आमद बढ़ गई है, और वे हाथी परिवार की एक झलक पाने के लिए अभयारण्य आ रहे हैं।

टॅग्स :उत्तराखण्डहाथी
Open in App

संबंधित खबरें

भारतचारधाम यात्राः 38 तीर्थयात्रियों की मृत्यु?, चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, कुल 12.60 लाख से अधिक दर्शन

क्राइम अलर्टपेशाब करने घर से बाहर निकले, 60 वर्षीय बच्चू राम को पटक कर रौंदा, नवादा में हाथी मचा रहे हैं आतंक, अब तक 4 लोगों की गई?

पूजा पाठदो कैलाश, दो अलग अनुभव; क्या आप जानते हैं आदि कैलाश और मानसरोवर के बीच का भूगोल? शिव यात्रा चुनने से पहले जरूर जान लें ये 5 बातें

भारतVIDEO: केदारनाथ में गूंजा कैलाश खेर का 'जय-जय केदारा', भक्ति में डूबे श्रद्धालु

पूजा पाठBadrinath Dham 2026: पोर्टल खुले; बिना पंजीकरण नहीं होंगे दर्शन, रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया यहाँ समझें

ज़रा हटके अधिक खबरें

ज़रा हटके"सर... प्लीज़ मुझे गांजे का एक पैकेट दिलवा दीजिए": आंध्र प्रदेश का एक व्यक्ति मोबाइल टावर पर चढ़ा | VIDEO

ज़रा हटकेप्रेम-प्रसंग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ने की घटनाएं तेजी से बढ़ी?, बिहार मेंकई हाई-वोल्टेज ड्रामे, 10 दिन में 15 केस?

ज़रा हटकेभक्तों ने लाखों रुपये बरसाए, नोटों के ढेर के नीचे दबे गुजराती लोक गायक गोपाल साधु?, वीडियो वायरल

ज़रा हटकेरूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुए जवान, परिवार ने मोक्ष भूमि गया जी के पवित्र फल्गु नदी तट पर किया पिंडदान-तर्पण

ज़रा हटकेलोक सेवक भवन से कार्यालय पैदल पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पीएम मोदी अपील पर अमल?