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NEET exam cancelled 2026: नीट परीक्षा में अत्यंत शर्मनाक बर्ताव!

By विजय दर्डा | Updated: May 18, 2026 05:12 IST

NEET exam cancelled 2026:  प्रश्नपत्र लीक होने की घटना ने न केवल उन 22 लाख 5 हजार से ज्यादा बच्चों को मानसिक दर्द दिया है जो परीक्षा में शामिल हुए थे बल्कि भविष्य में परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मानसिक आघात पहुंचाया है.

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ठळक मुद्देअपमानजनक और असंवेदनशील व्यवहार हम कैसे कर सकते हैं? सपनों को रौंदते हुए हम कैसे आगे जा सकते हैं.सफल कहीं वो न हो जाएं जिनके पास प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले पहुंच जाए!

NEET exam cancelled 2026: नीट परीक्षा प्रश्नपत्रों का लीक होना केवल शर्मनाक खबर ही नहीं है बल्कि यह लाखों विद्यार्थियों के साथ मानसिक बलात्कार है. इससे केवल विद्यार्थी ही नहीं हिले बल्कि उनके माता-पिता और परिवारजन भी हिल गए हैं. मुझे कठोर शब्दों का प्रयोग करते हुए यह लेख लिखना पड़ रहा है तो इसका कारण यह है कि मैं हिला हुआ हूं. मेरे मन में यह गंभीर सवाल है कि हम तकनीकी रूप से इतने सक्षम हैं कि बिना हस्तक्षेप के देश के हर हिस्से में निष्पक्ष चुनाव करा सकते हैं तो फिर ईमानदारी से कोई परीक्षा क्यों नहीं करा सकते? जो विद्यार्थी हमारे भविष्य हैं, उनके सपनों को चूर-चूर करने वाला, इस तरह का घृणित, अपमानजनक और असंवेदनशील व्यवहार हम कैसे कर सकते हैं? उनके सपनों को रौंदते हुए हम कैसे आगे जा सकते हैं.

प्रश्नपत्र लीक होने की घटना ने न केवल उन 22 लाख 5 हजार से ज्यादा बच्चों को मानसिक दर्द दिया है जो परीक्षा में शामिल हुए थे बल्कि भविष्य में परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मानसिक आघात पहुंचाया है. उनके विश्वास को ठेस लगी है. उनके भीतर यह आशंका पैदा की है कि मेहनत हम करें मगर  सफल कहीं वो न हो जाएं जिनके पास प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले पहुंच जाए!

विद्यार्थी पूरी लगन से मेहनत करते हैं, सुख-चैन को ताक पर रख कर सपना पालते हैं कि नीट पास करने के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलेगा. अच्छे डॉक्टर बनेंगे और देश की सेवा करेंगे लेकिन देश के गुनहगारों ने उनके सपनों को तोड़ दिया है. यह अलग बात है कि फिर से परीक्षा देंगे लेकिन पहली बार का जो उत्साह होता है, जो मेहनत होती है, उसकी बात ही अलग है. जो गति टूट गई, उसका क्या?

उनके माता-पिता, भाई-बहन और परिवार के दूसरे लोगों को जो मानसिक झटका लगा है, उसका क्या? प्रश्नपत्र लीक होने की इस ताजा वारदात की चूंकि व्यापक चर्चा हो गई इसलिए परीक्षा को रद्द कर दिया गया मगर प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़झाले का क्या यह कोई पहला मामला है? जी नहीं! इतिहास खंगालेंगे तो आपको दर्जनों उदाहरण मिल जाएंगे लेकिन यह ढूंढ़ने की कोशिश करेंगे कि पुराने मामलों में कितने मगरमच्छों को सजा मिली तो आप शायद एक उदाहरण भी नहीं ढूंढ़ पाएंगे! मध्यप्रदेश का  व्यापम घोटाला याद है न आपको!

कहने को सैकड़ों गिरफ्तारियां हुईं, कुछ लोगों को सजा भी मिली लेकिन इस घोटाले की जांच के दौरान कम से कम 48 ऐसे लोगों की मौत हो गई जो इस मामले से किसी न किसी रूप से जुड़े हुए थे. कई बड़े लोगों के नाम भी आए लेकिन यह कभी पता नहीं चल पाया कि असली साजिशकर्ता कौन था? क्या यह संभव है कि कोई सरकार चाहे और जानकारी सामने नहीं आए?

ऐसा हो ही नहीं सकता. निश्चय ही कुछ तो अनदेखा किया गया होगा ताकि मगरमच्छ न फंसें! दरअसल मगरमच्छ कभी नहीं पकड़े जाते. जांच एजेंसियों के हाथ कुछ छोटी मछलियां ही लगती हैं. बड़ी मछलियां भी बगैर व्यवधान के तैरती रहती हैं और मगरमच्छों की तो खैर बल्ले-बल्ले रहती है. और मैं आपको यह कोई नई बात नहीं बता रहा हूं.

शिक्षा जगत पर मगरमच्छों की पकड़ की कहानियां इतनी व्यापक हैं कि जहां ढूंढ़ें, वहीं एक कहानी मिल जाएगी! अब नीट प्रश्नपत्र लीक होने के ताजा मामले को गहराई से परखने का काम सीबीआई को दे दिया गया है लेकिन कुछ बातें बड़े सामान्य नजरिये से भी समझ में आ रही हैं. प्रश्नपत्र लीक मामले में राजस्थान के सीकर जिले की खंडेला तहसील के समर्थपुरा गांव के जिस राकेश कुमार मंडावरिया का नाम सामने आ रहा है वह दसवीं की पढ़ाई के बाद गांव छोड़कर सीकर चला गया. पंद्रह साल से वहीं रह रहा है. करता क्या है?

इस सवाल का जवाब कहानी में पेंच पैदा करता है. पिछले कुछ वर्षों से वह सीकर के पिपराली रोड स्थित एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के सामने कंसल्टेंसी ऑफिस चला रहा है. जरा ध्यान दीजिए कि कोचिंग इंस्टीट्यूट में काम नहीं करता है. वह इंस्टीट्यूट के ठीक सामने कंसल्टेंसी ऑफिस चलता है. किस बात की कंसल्टेंसी? जवाब नदारद है.

उस पर आरोप हालांकि साबित नहीं हुआ है लेकिन कोई भी व्यक्ति सहजता से उसकी भूमिका का अंदाजा लगा सकता है. और यह भी साफ समझ में आ रहा है कि राकेश मंडावरिया यदि गुनहगार है तो वह अकेला नहीं होगा. वह केवल चेहरा है. पीछे से पूरा सिंडिकेट होगा. अन्यथा राजस्थान से लेकर हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना तक प्रश्नपत्र कैसे पहुंच जाता?

श्क्षिाविद् खान सर का यह कहना पूरी तरह दुरुस्त है कि हम एक डायपर खरीदते हैं तो उसमें लीक नहीं होता और यहां इतना बड़ा सिस्टम लीक हो गया? नौ साल पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का गठन ही इसलिए हुआ था ताकि परीक्षा की पवित्रता को कायम किया जा सके. मगर एजेंसी के कार्यकाल में भी हालात कहां सुधरे?

मेरी स्पष्ट राय है कि प्रश्नपत्र लीक होना कोई सामान्य आपराधिक वारदात नहीं है. शिक्षा माफिया का जो कार्टेल यह सब कर रहा है,  वह समाज के लिए ड्रग्स माफिया से भी ज्यादा नुकसानदायक है. यदि कोई अपात्र व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षा पास करके कभी डॉक्टर बन जाने के मुकाम तक पहुंच गया तो वह मरीजों की जिंदगी से कैसा खिलवाड़ करेगा,

इसका केवल अंदाजा भर लगाया जा सकता है. प्रश्नपत्र लीक जैसी वारदात को सीधे तौर पर देशद्रोह की श्रेणी में रखना चाहिए. सजा इतनी कठोर होनी चाहिए कि उस सिंडिकेट का हिस्सा बनने से हर कोई घबराए! प्रश्नपत्र लीक करना  भी एक तरह का आतंकवाद ही है!

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