बिहार में IIT ने अपने स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट में नौ पुलों को बता दिया सबसे ज्यादा खतरनाक, 5 साल के भीतर प्रदेश में तकरीबन 26 पुल गिरे

By एस पी सिन्हा | Updated: May 17, 2026 16:06 IST2026-05-17T16:06:21+5:302026-05-17T16:06:36+5:30

बताया जाता है कि आईआईटी पटना को राज्य के 85 पुलों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिनमें से अब तक 47 पुलों की रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हो चुकी है.

In its structural audit report, the IIT in Bihar has identified nine bridges as being the most dangerous; within the last five years, approximately 26 bridges have collapsed across the state | बिहार में IIT ने अपने स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट में नौ पुलों को बता दिया सबसे ज्यादा खतरनाक, 5 साल के भीतर प्रदेश में तकरीबन 26 पुल गिरे

बिहार में IIT ने अपने स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट में नौ पुलों को बता दिया सबसे ज्यादा खतरनाक, 5 साल के भीतर प्रदेश में तकरीबन 26 पुल गिरे

पटना: बिहार में पुलों के गिरने की घटनाएं इन दिनों आम बात हो गई हैं. कभी निर्माणाधीन पुल ढह जाता है तो कहीं सालों पुराना पुल अचानक टूटकर गिर पड़ता है. हाल ही में भागलपुर को उत्तर बिहार से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गिर गया. इस बीच राज्य में पुलों की सुरक्षा को लेकर चल रहे व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट के तहत आईआईटी पटना ने पथ निर्माण विभाग को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है. सुल्तानगंज के अगवानी घाट पुल हादसे के बाद राज्य सरकार ने सभी प्रमुख पुलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का निर्णय लिया था. इसी क्रम में पिछले वर्ष जून से ऑडिट कार्य शुरू हुआ.

बताया जाता है कि आईआईटी पटना को राज्य के 85 पुलों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिनमें से अब तक 47 पुलों की रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हो चुकी है. शेष पुलों की रिपोर्ट भी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी. बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा रिपोर्ट के अध्ययन में यह सामने आया है कि नौ पुल ऐसे हैं, जिनकी तत्काल मरम्मत और मजबूतीकरण की आवश्यकता है. मुजफ्फरपुर में दो पुलों की स्थिति चिंताजनक पाई गई है। 

इनमें एक स्टेशन के समीप स्थित पुल और दूसरा बैरिया से जीरो माइल के बीच गंडक नदी पर बना पुल शामिल है. जबकि गया जिले में तीन पुलों को मरम्मत की जरूरत बताई गई है. इनमें बसातपुर-सिंलौंजा मार्ग, चटकी-दरियापुर-गोरा रोड तथा राजबिगहा से बेलदार बिगहा के बीच स्थित पुल शामिल हैं. इसके अलावा लखीसराय में दो पुलों की स्थिति सुधारने की जरूरत बताई गई है, जिनमें एक आरओबी के पास तथा दूसरा शहर क्षेत्र में स्थित है. 

वहीं हाजीपुर में रेलवे के पुराने पुल के समीप बने एक पुल को भी मरम्मत की सूची में रखा गया है. बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने इन पुलों की खामियों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मरम्मत प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है. पुलों की मरम्मत और मजबूतीकरण के लिए अलग से निविदा जारी की जाएगी. पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने अधिकारियों को आईआईटी की रिपोर्ट का सख्ती से अनुपालन करने का निर्देश दिया है. 

उन्होंने लखीसराय के एक पुल को लेकर विशेष निर्देश भी जारी किए हैं. जानकारी के अनुसार आईआईटी पटना द्वारा फिलहाल 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जा रहा है. वहीं 60 मीटर से कम लंबाई वाले पुलों का रखरखाव रोड मेंटेनेंस पॉलिसी के तहत संबंधित सड़क निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाता है. 

उल्लेखनीय है कि पिछले 5 साल के आंकड़े कहते हैं कि प्रदेश में तकरीबन 26 पुल गिर चुके हैं. एक पुल तो निर्माण के समय ही तीन बार गिर गया. इनमें कई पुल ऐसे थे जिनका निर्माण हाल के वर्षों में ही हुआ था. सबसे चर्चित मामला अगुवानी-सुल्तानगंज पुल का रहा, जो निर्माण के दौरान तीन बार ढह चुका है. करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस पुल के बार-बार गिरने पर विपक्ष ने सरकार को घेरा था. विशेषज्ञों का कहना है कि पुल गिरने के पीछे कई वजहें हैं. इनमें खराब डिजाइन, घटिया निर्माण सामग्री, समय पर निरीक्षण नहीं होना और निगरानी में लापरवाही प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. 

विक्रमशिला सेतु की सुरक्षा दीवार का हिस्सा मार्च 2026 में टूटकर गिरा था. उस समय इंजीनियरों ने जांच के बाद कहा था कि मुख्य संरचना सुरक्षित है. लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद पुल का हिस्सा ढह गया. राहत की बात यह रही कि समय रहते पुल पर यातायात रोक दिया गया था, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. पुल गिरने की घटनाओं ने आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं. कई जिलों में लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ रहा है. 

सरकार का कहना है कि आने वाले लगभग 3 महीनों में पुल पर दोबारा आवाजाही शुरू हो सकेगी. बिहार में जून-जुलाई 2024 में 17 दिनों के भीतर 12 से अधिक पुल/पुलिया गिर गए थे. इनमें अररिया, सीवान, पूर्वी चंपारण, किशनगंज, सारण और मधुबनी जिलों में छोटे-बड़े पुल शामिल हैं. 3 जुलाई 2024 को एक ही दिन में सिवान और सारण जिलों में 5 पुल गिरे थे. 

18 जून 2024 को अररिया जिले के सिकटी प्रखंड में परमान नदी पर एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरा. अगस्त 2024 में अगुवानी-सुल्तानगंज पुल (यह 2022 और 2023 में भी गिरा था) फिर चर्चा में रहा. 2023 के प्रमुख हादसे देखें तो 15 मई 2023 में पूर्णिया-कटिहार में ढलाई के दौरान बॉक्स ब्रिज गिरा. 19 फरवरी 2023 को पटना जिले में बिहटा-सरमेरा फोर लेन पुल का हिस्सा गिरा था. इस तरह पुलों के गिरने का सिलसिला लगातार जारी है.

Web Title: In its structural audit report, the IIT in Bihar has identified nine bridges as being the most dangerous; within the last five years, approximately 26 bridges have collapsed across the state

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