मुंबईः एक उपभोक्ता आयोग ने ई-कॉमर्स विक्रेता अमेजन को खराब टीवी बेचने के मामले में ग्राहक को रिफंड देने और मुआवजा अदा करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही आयोग ने कहा कि कोई ऑनलाइन खुदरा मंच खुद को 'सिर्फ मध्यस्थ' बताकर दोषपूर्ण उत्पाद की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है।
उपनगरीय मुंबई के जिला उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग ने छह जनवरी को अमेजन सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (एएसएसपीएल) को शिकायत के समाधान में सेवा में कमी का दोषी ठहराया। आयोग के अध्यक्ष प्रदीप काडू और सदस्य गौरी कापसे की पीठ ने कहा कि कोई ऑनलाइन मंच खुद को महज मध्यस्थ बताकर जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता है,
खासकर जब वह बिक्री प्रक्रिया को सक्रिय रूप से सुगम बनाता है, उससे व्यावसायिक लाभ प्राप्त करता है और बिक्री के बाद उपभोक्ता से सीधे जुड़ता है। आयोग ने कहा, “ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ता की विनिर्माता या सेवा केंद्र तक सीधी पहुंच नहीं होती है। उसके लिए सबसे स्पष्ट और सुलभ इकाई ऑनलाइन विक्रेता ही होता है।
उपभोक्ता न केवल ब्रांड बल्कि मंच की विश्वसनीयता और भरोसे पर भी निर्भर करता है।” शिकायतकर्ता ने कहा था कि उसने 2018 में अमेजन के जरिये 16,499 रुपये में एक फुल एचडी एलईडी टीवी खरीदा था लेकिन उसमें खराब आवाज, घटिया तस्वीर गुणवत्ता और काम न करने वाला रिमोट कंट्रोल पाया गया।
शिकायत करने पर अमेजन ने रिफंड देने से इनकार करते हुए उसे टीवी कंपनी से संपर्क करने की सलाह दी, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजा और रिफंड की मांग करते हुए आयोग का रुख किया। आयोग ने अमेजन को टीवी की कीमत यानी 16,499 रुपये की राशि फरवरी 2018 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने, मानसिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये मुआवजा और 5,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में अदा करने का निर्देश दिया।