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ट्रंप मामलाः अमेरिका की परिपक्व न्यायिक प्रणाली कसौटी पर खरी उतरी

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: April 6, 2023 14:59 IST

ट्रम्प के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई पर उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच कोई उन्माद देखने को नहीं मिला। दोनों ही ओर से शालीनता के साथ इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई। ट्रम्प पर पोर्न स्टार ने आरोप लगाए हैं कि पूर्व राष्ट्रपति ने 2006 में उसके साथ जबरन संबंध बनाए और 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में इस प्रकरण को छुपाने के लिए उसे 1.30 लाख डॉलर दिलवाए थे।

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पोर्न फिल्मों में काम करने वाली एक अभिनेत्री से उसकी इच्छा के विरुद्ध संबंध बनाने के आरोप में मंगलवार को एक घंटे तक हिरासत में रहना पड़ा और अब उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका के इतिहास में यह अभूतपूर्व घटना थी। अनैतिक आचरण के आरोप में पहली बार किसी पूर्व राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया गया। ट्रम्प प्रकरण में अमेरिका की न्याय प्रणाली की निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा थी और उसमें वह खरी उतरी। इस घटना ने अमेरिका में लोकतंत्र की परिपक्वता का भी उदाहरण पेश किया। 

ट्रम्प के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई पर उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच कोई उन्माद देखने को नहीं मिला। दोनों ही ओर से शालीनता के साथ इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई। ट्रम्प पर पोर्न स्टार ने आरोप लगाए हैं कि पूर्व राष्ट्रपति ने 2006 में उसके साथ जबरन संबंध बनाए और 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में इस प्रकरण को छुपाने के लिए उसे 1.30 लाख डॉलर दिलवाए थे। ट्रम्प 2024 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की मंशा जता चुके हैं। वैसे उनकी रिपब्लिकन पार्टी की ओर से अगला राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों की कमी नहीं है लेकिन मतदाताओं के मिजाज को लेकर जो हालिया सर्वेक्षण किए गए हैं उनमें ट्रम्प का पलड़ा भारी नजर आता है। इसीलिए अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बता कर ट्रम्प अमेरिकी जनता की सहानुभूति अर्जित करने का पूरा प्रयास करेंगे।

 2020 के चुनाव में वह जो बाइडेन से बेहद कड़े मुकाबले में पराजित हुए थे। रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर इस चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगा था ताकि बाइडेन जीत सकें। अमेरिकी जनमानस में रूस के हस्तक्षेप के आरोप अब तक मिटे नहीं हैं। मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि पुतिन ने अमेरिकी चुनाव को प्रभावित किया और एक गहरी साजिश के तहत ट्रम्प को हराया गया। हस्तक्षेप के इन आरोपों को ट्रम्प पिछले तीन वर्षों से अपने पक्ष में भुनाने का प्रयास कर रहे हैं। अब उन्हें सहानुभूति अर्जित करने का एक और हथियार मिल गया है। राजनीतिक लाभ अपनी जगह हैं लेकिन ट्रम्प प्रकरण ने अमेरिकी न्याय प्रणाली की छवि को चमकाने का काम किया है।

 अमेरिकी न्याय प्रणाली को दुनिया की आदर्श न्यायिक व्यवस्थाओं में से एक माना जाता है और उसने समय-समय पर अपनी निष्पक्षता साबित की है। मोनिका लेवेंस्की से अवैध संबंधों को लेकर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर भी जेल जाने की तलवार लटकी थी। उन पर महाभियोग भी चलने वाला था लेकिन वे बाल-बाल बच गए। बहुचर्चित वॉटरगेट मामले में भी अस्सी के दशक में उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के प्रति अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया था और जांच समिति को सारे दस्तावेज तथा टेप उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया था। निक्सन अगर अपने पद से त्यागपत्र नहीं देते तो उन्हें निश्चित रूप से महाभियोग का सामना करना पड़ता। पद से हटने के बाद भी निक्सन पर मुकदमा चलता रहा लेकिन उनके उत्तराधिकारी जेराल्ड फोर्ड ने उन्हें माफी दे दी। 

अमेरिकी लोकतंत्र की एक खासियत यह भी है कि सत्ता के शीर्ष पर आसीन किसी व्यक्ति के कदाचार से उसकी छवि कभी धूमिल नहीं हुई। इसका सबसे बड़ा कारण यह भी रहा कि अमेरिकी जनमानस ऐसे मामलों को तटस्थता से देखता है और संसदीय एवं न्यायिक प्रणाली पर फैसला छोड़ देता है। कदाचार के मामलों में संबंधित राजनीतिक दल भी अपने नेता को बचाने का प्रयास नहीं करते। वे भी न्यायिक एवं संसदीय व्यवस्था में गहरी आस्था रखते हैं। लोकतांत्रिक तथा न्यायिक व्यवस्था और मतदाताओं में गंभीर मसलों पर ऐसी परिपक्वता बहुत कम देशों में देखी जाती है। अधिकांश देशों में प्रभावशाली राजनीतिक तथा आर्थिक हस्तियां कानून एवं अन्य किसी भी तरह की व्यवस्था से ऊपर समझी जाती हैं। अमेरिका में कानून के समक्ष सभी नागरिक एक समान होते हैं। ट्रम्प का मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

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